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उम्मीदें टूटीं, दुआएं अभी अधूरी हैं... करोड़ों चेहरों पर मुस्कान लाने वाले राजपाल यादव के लिए 'इंतज़ार' की घड़ी और लंबी हो गई! ⚖️💔
आज 12 फरवरी की उस सुबह का सूरज खुशियों की उम्मीद लेकर आया था, लेकिन ढलती शाम ने एक कड़वी हकीकत सामने रख दी। दिल्ली हाई कोर्ट से जिस राहत की उम्मीद पूरा परिवार और उनके करोड़ों चाहने वाले कर रहे थे, वह फिलहाल नहीं मिली। हँसाने वाले इस कलाकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं— राजपाल भाई को अब कम से कम 4 और रातें तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे बितानी होंगी।
अदालत की सख्त टिप्पणी: "वादे किए, पर पूरे नहीं" सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में जो हुआ, वह काफी भावुक और सख्त था। जज ने राजपाल भाई के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए कड़ी फटकार लगाई और कहा— "आप जेल इसलिए गए क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया। इससे पहले कम से कम दो दर्जन मौकों पर आपने पैसे देने का भरोसा दिया, लेकिन हर बार नाकाम रहे।" कानून की इस सख्ती ने साफ़ कर दिया कि जहाँ एक तरफ दुआएं हैं, वहीं दूसरी तरफ वादों को पूरा न करने का भारी बोझ भी है।
वो पारिवारिक शादी और आँखों में आँसू... राजपाल के वकील ने परिवार में होने वाली शादी का वास्ता देकर जमानत की गुहार लगाई थी, ताकि वे इस महत्वपूर्ण मौके पर अपने अपनों के बीच रह सकें। लेकिन अब सब कुछ अगले सोमवार की सुनवाई पर टिक गया है। वकील ने कोर्ट से समय माँगा है कि वे सोमवार तक 'कुछ न कुछ' समाधान लेकर आएंगे।
संघर्ष अभी थमा नहीं है! सुबह जिस एकजुटता का ज़िक्र हमने किया था, उसकी ज़रूरत अब और बढ़ गई है। सोनू सूद, सलमान खान और अजय देवगन जैसे सितारे आज भी उनके परिवार के लिए उम्मीद की किरण बने हुए हैं। तिहाड़ की दीवारों के पीछे बिताई जाने वाली ये अगली 4 रातें राजपाल यादव के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगी। एक कलाकार जो पूरी दुनिया को अपनी कॉमेडी से सराबोर करता है, आज खुद अपने ही वादों और कानूनी पचड़ों में उलझा हुआ है।
यह वक़्त सिर्फ़ राजपाल भाई के लिए नहीं, बल्कि उनके परिवार के लिए भी बहुत भारी है। हम बस यही उम्मीद कर सकते हैं कि सोमवार को कानून की चौखट से कोई ऐसी खबर आए जो उनके घर की खुशियों को वापस लौटा सके।
"कानून की अपनी सख्ती है और एक कलाकार की अपनी मजबूरी। क्या आपको लगता है कि राजपाल यादव को उनके परिवार की खुशियों के लिए सोमवार को राहत मिलनी चाहिए? अपनी राय और राजपाल भाई के लिए अपनी दुआएं कमेंट्स में ज़रूर लिखें।" 👇
सवर्णो सावधान.. 🚨
मैंने पहले ही आप लोगो को आगाह किया था, बीजेपी सवर्णो को गुमराह करने के लिए हिन्दू मुस्लिम कि राजनीति करेगी
और वह सत्य साबित हो रहा है,बीजेपी UGC से ध्यान भटकाने के लिए वन्दे मातरम का मुद्दा लेकर आयी है,
सभी चैनलों मे इस पर डिबेट चल रही है,हिन्दू मुस्लिम का माहौल तैयार किया जा रहा है
पर आपको इनके झासे मे नहीं आना,आपको UGC पर अड़े रहना है...
SCST Act और UGC के मुद्दे पर BJP का विरोध करने पर जो नपुंसक लोग पूछ रहे है कि BJP को हराओगे, तो बताओं किसे जीताओगे?
उन नपुंसकों को हिन्दू समाज बता देना चाहता है कि देश के पास आज राजनीतिक विकल्प के रूप में राष्ट्रीय सनातन पार्टी मौजूद है। राष्ट्रीय सनातन पार्टी की सरकार बनते ही संवैधानिक भेदभाव, एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी को तो हटाएगा ही जाएगा, साथ ही देश को बांटने वाले ऐसे काले कानून बनाने वालों को भी जेल भेजा जाएगा।
#ugc #ugcprotest
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने जनता का काम ना करने वाले नेताओं को हटाने की पॉवर जनता को मिले इस मांग को संसद में उठाते हुए कहा की - 'अगर वोटर के पास नेता चुनने का अधिकार हैं, तो वोटर के पास उसे हटाने का भी अधिकार होना चाहिए, इसलिए राइट टू रिकॉल एक्ट लाया जाए'....
👉सही सोच।। जानता के हित में।। सराहनीये सोच.....
झांसी के पलींदा गांव की 23 वर्षीय पूजा की मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया है, जहां शादी के महज तीन साल के भीतर ही एक हंसती-खेलती जिंदगी का दर्दनाक अंत हो गया। जिस घर में पूजा ने सात फेरे लेकर अपनी नई दुनिया बसाई थी, वही घर उसकी मौत का गवाह बना और अब उसके गले पर पड़े गहरे निशान उसकी खामोश कहानी को चीख-चीखकर बयां कर रहे हैं। मायके पक्ष का आरोप है कि पति धीरज पाल ने पहले रस्सी से बेरहमी से गला घोंटकर उसकी हत्या की और फिर इस जघन्य अपराध को एक साधारण हादसा साबित करने के लिए उसे करंट लगाया गया। 22 अप्रैल 2022 को बड़े अरमानों के साथ शुरू हुए इस वैवाहिक सफर का अंत इतना खौफनाक होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था और अब पूजा की दो साल की मासूम बेटी के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
परिजनों की मानें तो पूजा की प्रताड़ना का सिलसिला शादी के कुछ समय बाद ही शुरू हो गया था, जहां उसे रंग को लेकर लगातार ताने दिए जाते थे और उसका पति आए दिन दूसरी शादी करने की धमकियां देकर उसे मानसिक रूप से तोड़ता था। लालच की हद तो तब हो गई जब ससुराल पक्ष की ओर से 5 लाख रुपए और कार की मांग को लेकर दबाव बनाया जाने लगा और हालांकि कई बार सामाजिक स्तर पर समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन जुल्म का यह दौर नहीं थमा। बुधवार सुबह 4:30 बजे जब मायके वालों को फोन पर करंट लगने की खबर मिली, तो मौके पर पहुंचते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि पूजा का शव बाहर पड़ा था, चेहरे पर चोट के निशान थे और गले पर रस्सी के दो स्पष्ट निशान दिखाई दे रहे थे। आखिरकार मजिस्ट्रेट की निगरानी में हुए पोस्टमॉर्टम ने सच उजागर कर दिया और पुष्टि की कि पूजा की मौत करंट से नहीं बल्कि गला घोंटने से हुई है। फिलहाल आरोपी पति फरार है और पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।
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ब्रेकिंग ट्रेंडिंग न्यूज़
धरती को हमेशा के लिए अलविदा कहने जा रही है 24 साल की एलिसा कार्सन!
अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रचने जा रही है 24 वर्षीय एलिसा कार्सन, जो मंगल ग्रह पर जाने वाली पहली इंसान बनने के बेहद करीब है।
खास बात यह है कि यह मिशन वन-वे माना जा रहा है — यानी एलिसा कभी भी पृथ्वी पर वापस नहीं लौटेंगी।
जहाँ पूरी दुनिया मंगल मिशन को लेकर सिर्फ सपने देखती रही, वहीं एलिसा ने कम उम्र में वो हिम्मत दिखाई है जो इंसानियत को नई दिशा दे सकती है।
यह सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि मानव इतिहास का सबसे बड़ा बलिदान माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर लोग भावुक हैं और कह रहे हैं —
“इंसान अगर ठान ले, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है।”
यह खबर इस वक्त पूरी दुनिया में ट्रेंड कर रही है 🌍🚀
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चुनाव के दिन हम 'मालिक' होते हैं, और अगले दिन से 'मजबूर'। क्या ये 5 साल का इंतज़ार वाकई लोकतंत्र है या सिर्फ़ हमारी मज़बूरी? 🗳️🚫
राज्यसभा में राघव चड्ढा ने एक ऐसी माँग उठाई है जो देश के हर वोटर के दिल की गहरी टीस है। उनका तर्क सीधा और बेहद सटीक है— अगर जनता किसी नेता को चुन सकती है, तो काम न करने पर उसे हटाने का हक भी जनता के पास ही होना चाहिए।
आज हमारे पास 'Right to Elect' तो है, लेकिन अगर हमारा प्रतिनिधि अपने वादों से मुकर जाए या भ्रष्टाचार में डूब जाए, तो हम असहाय होकर अगले चुनाव का इंतज़ार करते हैं। ज़रा सोचिये, अगर हम देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और जजों को पद से हटा सकते हैं, तो एक सांसद या विधायक को 5 साल तक मनमानी करने की 'खुली छूट' क्यों मिले? ⚖️
दुनिया में ऐसा कोई प्रोफेशन नहीं है जहाँ आप 5 साल तक खराब प्रदर्शन करें और आपको कोई हाथ भी न लगा सके। अमेरिका और स्विट्जरलैंड जैसे 24 से ज़्यादा मज़बूत लोकतंत्रों में 'Right to Recall' का कानून पहले से मौजूद है। अगर वहाँ के नागरिक अपने प्रतिनिधियों को जवाबदेह बना सकते हैं, तो भारतीय वोटर्स को इस ताक़त से दूर क्यों रखा गया है?
बेशक, इस अधिकार का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए राघव चड्ढा ने 4 मज़बूत सुरक्षा कवच (Safeguards) भी सुझाए हैं:
लॉकिंग पीरियड: चुनाव के शुरुआती 18 महीनों तक इसे लागू न किया जाए, ताकि नेता को अपना काम साबित करने का पूरा मौका मिले।
जन समर्थन: कम से कम 35% से 40% वोटर्स एक 'वेरिफाइड पिटीशन' के ज़रिए इसकी माँग करें।
ठोस आधार: यह सिर्फ राजनीतिक विरोध के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार या काम में बड़ी लापरवाही के आधार पर ही हो।
अंतिम फैसला: नेता तभी हटे जब 50% से ज़्यादा जनता दोबारा होने वाली वोटिंग में उसे हटाने का समर्थन करे।
यह कानून नेताओं के मन में 'जनता का डर' पैदा करेगा। पार्टियों को मज़बूर होना पड़ेगा कि वे दागी और कामचोर चेहरों को नहीं, बल्कि काम करने वाले 'परफॉर्मर्स' को ही टिकट दें।
लोकतंत्र का असली मतलब सिर्फ़ एक दिन बटन दबाना नहीं, बल्कि उस वोट की ताक़त को पूरे 5 साल तक कायम रखना है। वोटर्स को नेता चुनने का हक है, तो उसे कुर्सी से उतारने का हक भी मिलना ही चाहिए। ✊🔥
"क्या आपको भी लगता है कि 'Right to Recall' आने के बाद ही नेता जनता को गंभीरता से लेना शुरू करेंगे? क्या 5 साल की यह बेबसी अब खत्म होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट्स में बेबाकी से साझा करें।" 👇