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असल अमीरी बैंक बैलेंस में नहीं… इंसानियत में होती है।” ❤️🙏

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अब नहीं अटकेगी किसान रजिस्ट्री! राजस्व विभाग ने जारी की 2.70 करोड़ जमाबंदियों की सूची, अब तेजी से होगा किसानों का निबंधन...

बिहार में फार्मर रजिस्ट्री अभियान को तेज करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने राज्यभर की 2 करोड़ 70 लाख जमाबंदियों की सूची कृषि विभाग को उपलब्ध करा दी है, ताकि किसानों का निबंधन तेजी से पूरा किया जा सके। राजस्व सचिव जय सिंह ने इस संबंध में कृषि विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर पूरी जानकारी दी है।

सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। विभागीय जानकारी के अनुसार पहले चरण में जनवरी और फरवरी के दौरान करीब 45 लाख किसानों का निबंधन किया गया था। अब दूसरे चरण का अभियान 12 मई से 30 जून तक चलाया जा रहा है।

इस बार निबंधन प्रक्रिया को और तेज बनाने के लिए कृषि विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मियों को भी लगाया गया है। इसमें कृषि सलाहकार, कृषि समन्वयक समेत कई स्तर के कर्मचारी शामिल हैं। राजस्व विभाग ने इसके लिए लॉगिन आधारित एक विशेष प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जहां उन सभी जमाबंदियों की सूची साझा की गई है जिनके आधार पर किसान रजिस्ट्री की जा सकती है।

विभाग के मुताबिक सार्वजनिक की गई कुल 2.70 करोड़ जमाबंदियों के आधार पर नाम मिलान स्कोर के जरिए किसानों का सत्यापन और निबंधन किया जाएगा। राजस्व विभाग ने बताया कि पिछले सात-आठ वर्षों से राज्य में आधार कार्ड के साथ जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया चल रही है। इसी आधार पर विभाग के पास 80.7 लाख आधुनिक जमाबंदियों का रिकॉर्ड उपलब्ध है।

इसके अलावा पुरानी 1 करोड़ 89 लाख 7 हजार जमाबंदियों में भी खाता, खेसरा और रकबा जैसी जरूरी जानकारियां दर्ज हैं। विभाग ने अंचलवार पूरी सूची कृषि विभाग के साथ साझा करते हुए अनुरोध किया है कि इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर किसानों का निबंधन अभियान तेजी से पूरा किया जाए।

सरकार ने वसुधा केंद्र संचालकों को भी इस प्रक्रिया की जानकारी देने का निर्देश दिया है, ताकि गांव स्तर पर किसानों को रजिस्ट्री कराने में आसानी हो सके और अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।

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“10 दिन में नोटिस, 20 दिन में आखिरी चेतावनी... फिर 31वें दिन नौकरी खत्म मानी जाएगी”, CM सम्राट चौधरी का अफसरों को सख्त संदेश

बिहार में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा और सख्त संदेश दिया है। राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार अग्निशमन सेवा के विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अब लापरवाही करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों के निपटारे में देरी होने पर पहले 10 दिन में नोटिस, फिर 20 दिन में अंतिम चेतावनी दी जाएगी और इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित माने जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब “सहयोग कार्यक्रम” के जरिए सीधे जमीनी स्तर पर सरकारी कामकाज की समीक्षा करेगी। उन्होंने बताया कि वह खुद भी एक प्रखंड में जाकर कार्यालयों की व्यवस्था और शिकायतों के समाधान की स्थिति देखेंगे। सरकार का मकसद प्रशासनिक व्यवस्था को जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है, ताकि आम लोगों को समय पर राहत मिल सके।

कानून-व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री का रुख बेहद सख्त दिखा। उन्होंने मंच से साफ कहा कि बिहार पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए “खुली छूट” दी गई है। सरकार किसी भी हालत में राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ने नहीं देगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर अपराधी गोली चलाएंगे तो गोली खाएंगे भी। उन्होंने दोहराया कि सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के औद्योगिक विकास को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य अब तेजी से उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। कई बड़े उद्योगपति बिहार में निवेश के लिए रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर रह रहे लोगों से भी अपील की कि वे वापस लौटें और राज्य में उद्योग स्थापित करें।

गांधी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार अग्निशमन विभाग को भी बड़ी सौगात मिली। विभाग की ओर से 80 अत्याधुनिक अग्निशमन वाहनों का लोकार्पण किया गया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक आधारित कंट्रोल रूम की शुरुआत भी की गई। कार्यक्रम में अपर गृह सचिव अरविंद चौधरी, डीजी फायर शोभा आहोटकर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और जवानों की सराहना करते हुए उन्हें “वीर योद्धा” की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि ये जवान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जिंदगी बचाते हैं, इसलिए समाज में उनका सम्मान सबसे अलग होना चाहिए।

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✨ अच्छी बातें और अच्छे लोग

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तीन ❤💯✨👍

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“बिहार में भी बनेगा नोएडा जैसा इलाका...” सोनपुर से CM सम्राट चौधरी के बड़े ऐलान, जमीन पर 4 गुना मुआवजा देने का वादा

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोनपुर के डुमरी बुजुर्ग पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर के दौरान विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग को लेकर कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में सोनपुर बिहार के सबसे विकसित क्षेत्रों में शामिल होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका “सोनपुर को गोद लेने” का सपना अब जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।

सीएम ने सोनपुर के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा करते हुए कहा कि यहां पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर “गंगा अंबिका पथ” बनाया जाएगा। इसके साथ बाबा हरिहरनाथ कॉरिडोर, आधुनिक टाउनशिप और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर भी काम होगा। उन्होंने साफ कहा कि सरकार बिहार में नोएडा जैसी व्यवस्था खड़ी करना चाहती है।

जमीन अधिग्रहण को लेकर लोगों की चिंता दूर करने की कोशिश करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि विकास कार्यों के लिए जमीन देने वालों को बाजार मूल्य से चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से घबराने की बजाय सरकार पर भरोसा रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुआवजा प्राप्त करने के लिए जिलाधिकारी को आवेदन देना होगा और जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गांव-गांव तक विकास और न्याय पहुंचाने के उद्देश्य से “सहयोग शिविर” चला रही है, ताकि लोग सीधे अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रख सकें। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 30 दिनों के भीतर किसी शिकायत का समाधान नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित माना जाएगा। चाहे मामला अंचल, ब्लॉक या थाना स्तर का हो, लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब मामूली बीमारी में मरीजों को सीधे पीएमसीएच रेफर नहीं किया जाएगा। यदि बिना जरूरत मरीजों को पटना भेजा गया तो संबंधित सिविल सर्जन पर कार्रवाई होगी। सरकार की कोशिश है कि लोगों को जिला और अनुमंडल स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सके।

शिक्षा को लेकर सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि जुलाई से उन सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जहां अभी कॉलेज नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में ऐसे सरकारी स्कूल तैयार किए जाएंगे, जहां नेताओं और अधिकारियों के बच्चों के एडमिशन के लिए भी पैरवी करनी पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि युवाओं का पलायन रुके। उन्होंने बताया कि जीविका समूहों के जरिए बिहार की महिलाएं आज करीब 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं, जो राज्य की आर्थिक ताकत का बड़ा उदाहरण है।

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आधुनिक भारत के निर्माता और भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत, राजा राममोहन राय जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।

समाज में तार्किक सोच और शिक्षा की अलख जगाने वाला उनका व्यक्तित्व युगों-युगों तक वंदनीय रहेगा।

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बिहार में पंचायत सचिवों का बड़ा ऐलान : 25 मई से राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी, कामकाज ठप करने की तैयारी...

बिहार में पंचायत सचिवों का आंदोलन अब और तेज होने जा रहा है। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर 25 मई तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया, तो पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। संघ ने यह भी संकेत दिया है कि मांगें पूरी होने तक कामकाज बाधित रखा जा सकता है।

पंचायत सचिवों का धरना बुधवार को लगातार 44वें दिन भी जारी रहा। पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर आयोजित सभा में संघ के पदाधिकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और जल्द निर्णय लेने की मांग की।

संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने कहा कि पंचायती राज विभाग पहले ही उनकी कई मांगों को स्वीकार कर चुका है, लेकिन अब तक उससे संबंधित आधिकारिक पत्र जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने के बावजूद आदेश जारी करने में हो रही देरी कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ा रही है।

संघ की ओर से विशेष रूप से गलत आधार पर निलंबित पंचायत सचिवों के निलंबन वापसी आदेश जारी करने, हड़ताल अवधि को उपार्जित अवकाश में समायोजित करने और लंबित मामलों पर जल्द फैसला लेने की मांग दोहराई गई। पंचायत सचिवों का कहना है कि जब विभाग सहमति दे चुका है, तो आदेश जारी करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है।

आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। संघ ने धरना और आंदोलन से जुड़े प्रस्तावों की जानकारी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव समेत सभी सांसदों और विधायकों को भेजने का फैसला लिया है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

पंचायत सचिवों की चेतावनी के बाद अब नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि 25 मई तक समाधान नहीं निकला, तो राज्यभर में पंचायत स्तर के कामकाज पर इसका असर पड़ सकता है।

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