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भारत ने इंग्लैंड को हराकर ICC पुरुष अंडर-19 विश्व कप 2026 अपने नाम कर लिया।
ये जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है,
ये उस मेहनत की पहचान है जो मैदान में दिखती है,
उस टैलेंट की जीत है जो उम्र नहीं देखता,
और उस सिस्टम का सबूत है जहाँ मौका काबिलियत को मिलता है।
नए भारत के नए चैंपियन 💙🔥
पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है।
#champions #u19worldcup #teamindia
सड़क पर दौड़ती एक बस, लेकिन उस पर छपी तस्वीर ने सबको रोककर देखने पर मजबूर कर दिया! ❤️🇮🇳
ये कोई फिल्म का पोस्टर नहीं था, न ही किसी ब्रांड का विज्ञापन… ये था सम्मान। कर्नाटक की एक स्लीपर बस ने जब “ऑपरेशन सिंदूर” के नायकों की तस्वीर अपने ऊपर लगाई, तो वो बस सिर्फ एक वाहन नहीं रही — वो चलती-फिरती श्रद्धांजलि बन गई। हर मोड़ पर, हर चौराहे पर, वो तस्वीर याद दिला रही थी कि देश की सुरक्षा के लिए खड़े सैनिकों की कीमत शब्दों में नहीं आंकी जा सकती।
आज के दौर में जहाँ बसों पर अक्सर फिल्मी चेहरों या प्रोडक्ट्स के पोस्टर दिखते हैं, वहाँ सैनिकों की तस्वीर लगाना एक संदेश है — “हम अपने रक्षकों को नहीं भूलते।” ये पहल छोटी लग सकती है, लेकिन इसका असर बड़ा है। जब आम लोग अपने तरीके से सेना को सलाम करते हैं, तो वो सिर्फ तस्वीर नहीं, एक भावना बन जाती है।
सच में… किसी ने तो कीमत समझी।
देश पहले, बाकी सब बाद में। 🇮🇳🔥
दिल्ली के जनकपुरी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ सड़क के बीचों-बीच जल बोर्ड द्वारा खोदे गए एक गहरे गड्ढे ने एक बाइक सवार युवक की जान ले ली। हैरानी और गुस्से की बात यह है कि मौत के इस कुएं के पास न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, और अंधेरे में यह लापरवाही एक हंसते-खेलते परिवार के लिए मातम बन गई। एक तरफ जहाँ आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई से इनकम टैक्स, रोड टैक्स और जीएसटी भरता है ताकि उसे सुरक्षित सड़कें मिलें, वहीं बदले में उसे ऐसे जानलेवा गड्ढे मिल रहे हैं। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही द्वारा प्रायोजित हत्या है, जहाँ एक युवक को सिस्टम की नाकामी की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
अगर आप भी मानते हैं कि टैक्स के पैसों से हरामखोरी बंद होनी चाहिए और अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, तो इस खबर को इतना शेयर करें कि यह सिस्टम की नींद उड़ा दे।
गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा दिया। कहानी है रेखा त्यागी नाम की एक महिला की, जिसने इस बार किसी आम आदमी को नहीं, बल्कि यूपी पुलिस के एक दरोगा को ही अपने जाल में फंसा लिया। आरोप है कि रेखा ने पहले दरोगा पर रेप की एफआईआर दर्ज कराई और फिर मामले को रफा-दफा करने के लिए सीधे 35 लाख रुपये की भारी-भरकम डिमांड रख दी। लेकिन इस बार उसका दांव उल्टा पड़ गया और गाजियाबाद पुलिस ने जांच के बाद उसे ही गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की जांच में रेखा त्यागी को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पता चला है कि यह उसका पहला कारनामा नहीं है। पुलिस का दावा है कि वह एक शातिर ब्लैकमेलर है जो लोगों को डरा-धमकाकर उनसे पैसे वसूलती है। साल 2016 में भी उसने एक व्यक्ति को डराकर जबरन शादी की थी और फिर पैसे ऐंठकर बिना तलाक लिए ही उसे छोड़ दिया। उसका मकसद सिर्फ शादी या न्याय नहीं, बल्कि सामने वाले को कानूनी पचड़ों में फंसाकर मोटी रकम वसूलना होता था। अब तक वह अलग-अलग लोगों पर कुल 6 मुकदमे दर्ज करा चुकी है, जिनमें से 2 मामले रेप के हैं। फिलहाल, यह 'लेडी ब्लैकमेलर' अब सलाखों के पीछे है।
उसका गुनाह बस इतना था कि वह अपने पति से बहुत ज़्यादा प्यार करती थी! 💔
91 वर्षीय एक बुज़ुर्ग महिला को अपने 88 वर्षीय पति के लिए दवा चुराने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। वजह? वही दवा जो कभी 50 डॉलर में मिलती थी, उसकी कीमत बढ़कर 950 डॉलर हो गई। उम्र के इस पड़ाव पर जहाँ लोग सहारे की तलाश में होते हैं, वहाँ यह महिला अपने जीवनसाथी की तकलीफ़ देखकर बेबस हो गई। कानून ने अपना काम किया, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया — क्या दवाइयाँ इतनी महंगी हो जानी चाहिए कि कोई मजबूरी में अपराध करने पर उतर आए? यह सिर्फ एक गिरफ्तारी की खबर नहीं, यह उस दर्द की कहानी है जहाँ प्यार और कानून आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। एक पत्नी जिसने पूरी ज़िंदगी साथ निभाया, आखिर में भी वही साथ निभाने की कोशिश कर रही थी। कभी-कभी हालात इंसान को अपराधी नहीं, मजबूर बना देते हैं… और यही इस कहानी का सबसे भारी सच है।
#humanstory #lovebeyondlaw
आइए आज साफ़-साफ़ अपनी राय सामने रखें
देश का अगला प्रधानमंत्री आप किसे देखना चाहते हैं?
1. नरेन्द्र मोदी
2. राहुल गांधी
3. योगी आदित्यनाथ
4. अखिलेश यादव
नीचे दिए गए विकल्पों में से अपना जवाब चुनें।
जवाब देने के बाद यह संदेश अपने दोस्तों, परिवार और परिचितों को भेजें, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस रायशुमारी में भाग ले सकें।
पोल का परिणाम सोमवार रात 8 बजे जारी किया जाएगा।
#nextpm #modi #rahulgandhi
😭😭शादी के 17 दिन बाद ससुराल से भागी बेटी... पिता ने गोली मारकर की हत्या
भिंड में इज्जत के नाम पर पिता ने अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया। बेटी शादी के बाद ससुराल से भाग गईं थी। बेटी को मंगलवार दोपहर खेत में गोली मार दी। मेहगांव थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया है।
पुलिस के अनुसार खेरिया थापक गांव निवासी मनीष उर्फ मुनेश धानुक ने अपनी बेटी निधी की शादी 11 दिसंबर को ग्वालियर के गुड़ागुड़ी नाका निवासी देव धानुक के साथ की थी। शादी के बाद 28 दिसंबर को निधी अपने पति के साथ महाराज बाड़े पर शॉपिंग के लिए गई और वहीं से प्रेमी के साथ चली गई। ससुराल वालों ने हुजरात कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। कुछ दिन बाद निधी मायके लौट आई तो उसे ससुराल ले जाया गया। लेकिन उसने
थाने पहुंचा आरोपी, बोला- मैंने बेटी को मार डाला
खेरिया थापक गांव के बाहर मंगलवार को बेटी निधी की कट्टे से हत्या करने के कुछ समय बाद आरोपी पिता मेहगांव थाने पहुंचा। यहां कट्टा हाथ में लिए वह पुलिस से बोला- 'मैंने अपनी बेटी को मार डाला।'
मृतक निधी, बेटी
आरोपी मनीष, पिता
यहां रहने से फिर से इंकार कर दिया। दो दिन पहले निधि दोबारा ससुराल से विना बताए चली गई, लेकिन मायके नहीं आई। मायके और ससुराल पक्ष के लोग उसे ढूंढ रहे थे। निधी मंगलवार दोपहर गांव के बाहर पिता मनीष को मिली तो
पत्नी बोली- पति ने इज्जत के कारण बेटी को मार डाला, मुझे भी धमकाया
मृतका की मां पूजा ने पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उसने बताया कि पति ने अपनी इज्जत और शर्म के कारण बेटी की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने मुझे भी जान से मारने की धमकी दी। भिंड एसएसपी संजीव पाठक ने बताया आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया गया है। अनिकेतवर्मा
उसे समझाया। इसी दौरान मनीष ने बेटी निधी की कट्टे से गोली मारकर हत्या कर दी। बेटी का शव खेत में ही पड़ा छोड़कर वह चला गया। मृतका का प्रेम-प्रसंग गांव के ही एक युवक से था। वह रिश्ते में उसका चाचा लगता था।😭