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हिंदुओं को जातियों में बांटकर मोदी ने वो काम किया जो मुगल औरंगजेब भी न कर सका, इसने हिंदू को हिंदू का दुश्मन बना दिया, इसने हिंदू समाज का जो नुकसान किया है कि स्कूल कॉलेज में अब हिंदू बच्चे जाति देखकर लड़ रहे है, यही है विकसित भारत।🇮🇳
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दिल्ली में आयोजित AI सम्मिट (Apna Insult Summit) में हो रहे अव्यवस्था और ग्लोबल बेइज्जती पर अचानक लोगों का आँख खुला है ? भाई साहब, आप AI और अन्य टेक्नोलॉजिकल रिसर्च में देश को फ्रंट पे देखना चाहते हैं लेकिन आपको ये क्यों नहीं दिखता की हमारी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में इसके लिए क्या किया है।
चाइना अपने GDP का 2.7% यानि की 780 बिलियन US डॉलर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च करता है। अमेरिका अपने बजट का 3.6% R&D पे खर्च करता है। इजरायल अपने बजट का 5% सिर्फ R&D पे खर्च करता है। साउथ कोरिया (5%), जापान (3.3%), जर्मनी (3.1%), UK (2.9%), फ्रांस (2.2%) जैसे देश रिसर्च एंड डेवलपमेंट में इसलिए आगे हैं।
अब अपने देश का खर्च देखिए R&D के ऊपर...बजट का 0.6%, करीब 70 बिलियन डॉलर। चाइना और US के खर्च के दसवें हिस्से से भी कम। फिर आप चाहते हैं की हमारा देश भी बराबरी करे।
जिस देश में विश्वविद्यालयों में 30-35 साल तक पढ़ने वाले रिसर्च स्कॉलर्स पर तंज कसा जाता हो। जहाँ नेशनल रैंकिंग में टॉप पर रहने वाले JNU, जादवपुर, हैदराबाद जैसे यूनिवर्सिटीज को विलेनाइज किया जाता हो। जहाँ सरकारी नौकरी और UPSC को पब्लिक डिस्कोर्स में एस्पायर किया जाता हो। जहाँ शिक्षा मंत्री कौन है इसका कोई महत्व न रहे। जहाँ UGC जैसे संस्थानों का उपयोग सिर्फ ऊलजुलूल विवादों के लिए इस्तेमाल किया जाता हो। जिस देश का नेशनल यूनिवर्सिटी "व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी" बन गया हो। वो देश जब रिसर्च एंड डेवलपमेंट एक्सीलेंस में एसपेक्टेशन रखता है तो ये सिर्फ दोगलापन है।
आपको बता दें की इस बार दिल्ली के AI सम्मिट में बिहार से सातवीं पास मंत्री को भेजा गया है। पूरी दुनिया AI को भविष्य की तरह देख रही है, उसके लिए पॉलिसी बना रही है, AI आधारित स्टार्टअप एंड इकोसिस्टम डेवलप करने का कोशिश कर रही है, इन्वेस्टमेंट लाने की कोशिश कर रही है। वहीं बिहार हमेशा की तरह इसको भी फोटो सेशन के लिए ही इस्तेमाल कर रहा है। सातवीं पास आदमी जिसको टेक्नोलाॅजी का 'T' नहीं पता, इंटेलीजेंस नाम पे जीरो है वो AI सम्मिट में गया है। फिर आप सवाल उठाते हैं ? गजब करते हैं।
देशभर में कुकुरमुत्ते के तरह उगे प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज का हाल आपको पहले नहीं पता था ? फिर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के खबर पे आपको आश्चर्य क्यों हो रहा है।अब यूनिवर्सिटी बेचारी मैनेजमेंट प्रोग्राम के कम्युनिकेशन प्रोफेसर को AI वाले सम्मिट में भेजेगा तब तो यही होगा।
सवर्णों ये ब्राह्मणवाद की नहीं बल्कि तुम्हारे अस्तित्व को खत्म करने का षडयंत्र है। ये आग लगाई हुई हमारे अपने बाप दादाओं की है जिन्होंने उन्हें अपनी जमीन पर बसाया और अपनी थाली का खिलाया।
देखो इन लोगों की वफादारी ये शोषित वंचित और प्रताड़ित है।🙏
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बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने अपनी बेटी रशा थडानी के साथ सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की तीर्थयात्रा पूरी कर ली है । यह धार्मिक अभियान केदारनाथ से शुरू हुआ और रामेश्वरम पर समाप्त हुआ। रवीना ने दिसंबर 2023 में सोशल मीडिया पर इसकी शुरुआत की घोषणा की, जब उन्होंने केदारनाथ के दर्शन की तस्वीरें शेयर कीं। रशा, जो महज 19 साल की हैं, ने हर ज्योतिर्लिंग से काला धागा लिया और कलाई पर बांध लिया—यह उनकी आस्था का प्रतीक बना ।
प्रमुख ज्योतिर्लिंग दर्शन
यात्रा में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, बैद्यनाथ, नागेश्वर शामिल हुए । बैद्यनाथ धाम (झारखंड) में मां-बेटी ने विशेष पूजा की । नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (द्वारका) 12वें नंबर पर आया, जहां रशा ने अपनी पहली फिल्म 'आजाद' रिलीज के बाद दर्शन किए । रवीना वाइन रेड सलवार में और रशा बेबी ब्लू अनारकली में नजर आईं। रामेश्वरम में आशीर्वाद लेते हुए विशेष पत्थर का स्पर्श किया ।
आस्था और बॉन्डिंग
रवीना ने इंस्टाग्राम पर लिखा, "हर हर महादेव! आशीर्वादित महसूस कर रही हूं" । रशा ने कहा, "12 ज्योतिर्लिंग पूरे, ब्लेस्ड फील कर रही हूं" । यह यात्रा रवीना की शिवभक्ति को दर्शाती है, जो उनकी फिल्मों जैसे 'पटना शुक्ला' के बाद भी जारी रही। मां-बेटी की जोड़ी फैंस को 'क्यूटेस्ट' लगी । रशा ने बताया कि हर दर्शन के बाद धागा बांधना उनकी परंपरा बनी ।
प्रेरणा का संदेश
यह तीर्थयात्रा आधुनिक जीवन में आध्यात्मिकता का उदाहरण है। रवीना-अक्षय कुमार की दोस्ती वाली एक्ट्रेस ने बेटी को संस्कार दिए। यात्रा ने लाखों फैंस को प्रेरित किया, ज्योतिर्लिंग दर्शन की महत्ता सिखाई। हर हर महादेव!
मैं बोल रहा हूं #ब्राह्मणवाद जिंदाबाद 1 लाख #ब्राह्मण बोल सकते हैं तो ठोको हाजिरी..!!
जय भगवान #परशुराम