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गंगाबिशन अग्रवाल, जिन्हें भारत का ‘भुजिया किंग’ कहा जाता है, ने अपने सफर की शुरुआत 1937 में बीकानेर की एक छोटी-सी दुकान से की थी। उन्होंने पारंपरिक भुजिया में बदलाव करते हुए मोठ की दाल का उपयोग किया, जिससे इसका स्वाद और कुरकुरापन बढ़ गया। साथ ही, भुजिया को पतला बनाकर उन्होंने खाने का तरीका भी बदल दिया। उस समय बीकानेर के महाराजा डूंगर सिंह के नाम पर इसे ‘डूंगर सेव’ कहा गया, जो जल्दी ही लोकप्रिय हो गया।
बाद में उनके पोते मोतीलाल अग्रवाल ने इस व्यवसाय को राजस्थान से बाहर कोलकाता, नागपुर और दिल्ली तक फैलाया। उन्होंने 1970-80 के दशक में आधुनिक पैकेजिंग की शुरुआत की, जिससे भुजिया देश-विदेश तक पहुंच सकी। 1982 में दिल्ली के चांदनी चौक में पहला स्टोर खुलने के बाद ब्रांड को राष्ट्रीय पहचान मिली। आज यह विरासत परिवार के अलग-अलग सदस्यों द्वारा संभाली जा रही है और भुजिया के साथ-साथ मिठाइयों और रेस्टोरेंट व्यवसाय में भी विस्तार हो चुका है।
जापान में सोमवार को 7.4 की तीव्रता का भूकंप आया है। जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि सोमवार दोपहर को देश के उत्तर-पूर्वी तट के पास 7.4 की शुरुआती तीव्रता वाला भूकंप आया। इस तीव्रता का भूकंप बहुत ज्यादा नुकसान कर सकता है। भूकंप के बाद एजेंसी ने इवाते आओमोरी और होक्काइडो प्रांतों में 3 मीटर (9.84 फीट) तक ऊंची सुनामी आने की चेतावनी दी है। ऐसे में बड़े नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है। हालांकि अभी तक जानमाल के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी अंतरिक्षव एजेंसी नासा (NASA) ने एक नया ग्लोबल नाइटटाइम मैप जारी किया है। इस मैप में 2014 से 2022 के बीच पृथ्वी पर रात के समय रोशनी में आए बदलावों को सैटेलाइट इमेजरी के जरिए दिखाया गया है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने नौ सालों तक हर रात ली गई तकरीबन 16 लाख सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया। इस दौरान, उत्तर भारत में रात के समय रोशनी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
नासा की ब्लैक मार्बल (Black Marble) डेटा सीरीज की नई तस्वीरों में उत्तर भारत का उत्तर प्रदेश-बिहार (UP-Bihar) बेल्ट रात के समय दुनिया के सबसे चमकीले क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है. यह चमक इतनी ज्यादा है कि इसने शंघाई, न्यूयॉर्क और लंदन जैसे महानगरों को भी पीछे छोड़ दिया है.
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फ्रूट जूस" के नाम पर बिकने वाले कई पैकेज्ड ड्रिंक्स असल में जूस कम और शक्कर वाला फ्लेवरयुक्त पानी ज्यादा होते हैं। हाल ही में Raghav Chadha ने इसी मुद्दे को उठाते हुए बताया कि इन बोतलों पर फलों की तस्वीरें और बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन असल में इनमें बहुत कम मात्रा में असली फल होता है। ज्यादातर हिस्सा पानी, चीनी और आर्टिफिशियल फ्लेवर का होता है, जो लगातार सेवन करने पर डायबिटीज, मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में लोगों को जागरूक रहने और पैकेज्ड जूस खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ने की सलाह दी