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हग'डे पर लड़की बनकर प्रेमिका से मिलने पहुंचे साहिल खान को ग्रामीणों ने बच्चा चोर समझ कर कूटा.. 😬😬
मामला बिहार के दरभंगा का है जहां "साहिल खान" नाम के लड़के की दोस्ती फेसबुक पर एक लड़की से हुई..
लड़के ने प्रॉमिस डे पर प्रेमिका से वादा किया कि हग डे पर उसे गले लगाने जरूर आएगा..
फिर उसने बुरखा का जुगाड़ किया.. और लड़की का रूप धारण कर प्रेमिका को गले लगाने निकल पड़ा..
लेकिन अपनी मर्दाना चाल और संदिग्ध हाव- भाव से वह शक के दायरे में आ गया..
ग्रामीणों ने उसे बच्चा चोर समझ कर जमकर कूटा.. बाद में पुलिस ने उसे बचाया.. 🫤🫤
जन्म से लेकर बुढ़ापे तक…
क्या आम आदमी सिर्फ टैक्स देने के लिए ही जी रहा है? 🤔
एक बच्चा जन्म लेता है – डायपर पर टैक्स।
स्कूल जाता है – शिक्षा पर टैक्स।
काम पर जाता है – पेट्रोल पर टैक्स।
कमाता है – आय पर टैक्स।
बचत करता है – उस पर भी टैक्स।
बीमा लेता है – उस पर भी टैक्स।
सवाल सिर्फ राजनीति का नहीं है,
सवाल उस मध्यम वर्ग का है जो हर महीने अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा सिस्टम को देता है…
और बदले में उम्मीद करता है बेहतर सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा।
क्या टैक्स वसूली और सुविधाओं के बीच संतुलन सही है?
क्या आम आदमी को और राहत मिलनी चाहिए?
आपकी क्या राय है —
टैक्स सिस्टम में क्या बदलाव होना चाहिए?
कमेंट में जरूर लिखिए। 👇
#taxsystem #commonman #middleclass #india #parliament #economicdebate #publicvoice
वीर जवानों को नमन: "14 फरवरी - काला दिन। उन वीर शहीदों को शत-शत नमन जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।" #pulwama #indianarmy
भारतीय लोकतंत्र की आत्मा जनसेवा है। जब शासन व्यवस्था स्वयं को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम मानती है, तब वह राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक उच्च आदर्श स्थापित करती है। आज का दिन इसी भावना का साक्षी है, जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने अपने कार्यालय को “सेवा तीर्थ’ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक भवन का लोकापर्ण ही नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में सेवा, समर्पण और पारदर्शिता के संकल्प का उद्घोष है।
भारतीय लोकतंत्र की आत्मा जनसेवा है। जब शासन व्यवस्था स्वयं को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम मानती है, तब वह राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक उच्च आदर्श स्थापित करती है। आज का दिन इसी भावना का साक्षी है, जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने अपने कार्यालय को “सेवा तीर्थ’ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक भवन का लोकापर्ण ही नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में सेवा, समर्पण और पारदर्शिता के संकल्प का उद्घोष है।
भारतीय लोकतंत्र की आत्मा जनसेवा है। जब शासन व्यवस्था स्वयं को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम मानती है, तब वह राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक उच्च आदर्श स्थापित करती है। आज का दिन इसी भावना का साक्षी है, जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने अपने कार्यालय को “सेवा तीर्थ’ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक भवन का लोकापर्ण ही नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में सेवा, समर्पण और पारदर्शिता के संकल्प का उद्घोष है।
भारतीय लोकतंत्र की आत्मा जनसेवा है। जब शासन व्यवस्था स्वयं को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम मानती है, तब वह राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक उच्च आदर्श स्थापित करती है। आज का दिन इसी भावना का साक्षी है, जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने अपने कार्यालय को “सेवा तीर्थ’ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक भवन का लोकापर्ण ही नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में सेवा, समर्पण और पारदर्शिता के संकल्प का उद्घोष है।
भारतीय लोकतंत्र की आत्मा जनसेवा है। जब शासन व्यवस्था स्वयं को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम मानती है, तब वह राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक उच्च आदर्श स्थापित करती है। आज का दिन इसी भावना का साक्षी है, जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने अपने कार्यालय को “सेवा तीर्थ’ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया। यह केवल एक भवन का लोकापर्ण ही नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में सेवा, समर्पण और पारदर्शिता के संकल्प का उद्घोष है।



