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UGC पर रोक लगाने वाले न्यायधीश सूर्यकांत शर्मा जी को पूरे सवर्ण समाज की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद।

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UGC के खिलाफ याचिका दाखिल कर विनीत जिंदल जी ने सवर्णों को तानाशाही सरकार और काले कानून से बचाया।
कितने भाई विनीत जिंदल जी पर गर्व करते है?

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हल्के में मत लेना, हम इतिहास बदलना जानते हैं,
सिंहासन डोलते हैं जब समाज एक होता है।
UGC के विरोध में सवर्ण समाज की एकता काबिले तारीफ थी, कितने भाई सहमत है कमेंट में अपनी राय दे।

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UGC के खिलाफ कोर्ट में अपील दाखिल करने वाले सवर्ण समाज के तीनों वकीलों का बहुत-बहुत आभार।
कितने भाई इन समाज प्रहरियों पर गर्व करते है?

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हिंदुआ सूरज: महाराणा सांगा 🚩
जिस योद्धा के शरीर पर 80 घाव थे, जिसकी एक आँख और एक हाथ नहीं था, फिर भी जिनका मस्तक कभी शत्रु के आगे नहीं झुका। ऐसे वीर शिरोमणि मेवाड़ के शासक राणा सांगा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
आपका बलिदान और शौर्य क्षत्रिय धर्म की पहचान है।
जय मेवाड़! जय एकलिंग जी!
UGC जैसे काले कानून के खिलाफ हम सब वीर शिरोमणि महाराणा सांगा की तरह डटे रहेंगे।

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वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला बुधवार को सामने आया। आरोप है कि पीड़ित जहां अपने साथ हुए अपराध में केस दर्ज कराने और आरोपियों को सजा दिलाने के लिए भटक रहे थे, वहीं पुलिसकर्मी केस से नाम हटाने की कीमत तय कर बैठे थे।
दहेज उत्पीड़न के एक मामले में नाम हटाने के एवज में चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा ने कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की थी। सौदे के तहत 20 हजार रुपये लेते समय एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई में चौकी इंचार्ज के साथ उसका सहयोग कर रहा सिपाही गौरव द्विवेदी भी पकड़ा गया। मामले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और आगे की जांच जारी है।
#varanasi #uppolice #corruption #anticorruption #dowrycase #policeaction #breakingnews

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कमांडर ने सैनिकों को नंगा कर उल्टा पेड़ से बांधा, कड़कड़ाती ठंड में जबरन खिलाई बर्फ, क्रूरता का वीडियो वायरलशल मीडिया पर एक बेहद डराने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एक रूसी सैन्य कमांडर पर अपने ही दो सैनिकों के साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया जा रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि बर्फ से ढके जंगल में दो सैनिकों को पेड़ों से उल्टा बांधा गया है.दोनों सैनिक लगभग आधे नग्न हैं और कड़ाके की ठंड में खड़े नजर आते हैं.
आदेश न मानने पर दी गई सख्त सजा
बताया जा रहा है कि इन सैनिकों पर बिना अनुमति अपनी पोस्ट छोड़ने और आदेश न मानने का आरोप था. 28 सेकंड के इस वीडियो में एक आवाज बार-बार सैनिकों को डांटते हुए सुनाई देती है. कमांडर कथित तौर पर कहता है कि सैनिकों ने आदेशों की अवहेलना की और अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई.
सैनिकों को जबरन खिलाई बर्फ
वीडियो में यह भी दिखता है कि एक अधिकारी सैनिक के मुंह में जबरन बर्फ डालता है और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करता है. दोनों सैनिक माफी मांगते हुए कहते सुनाई देते हैं कि आगे ऐसा नहीं होगा. यह दृश्य देखने वालों को झकझोर देने वाला है.वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं
यह वीडियो यूक्रेन समर्थक टेलीग्राम चैनल Exilenova+ पर शेयर किया गया है. हालांकि, अभी तक इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. रूसी मीडिया या सरकार की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप
रूसी स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों में पहले भी यह दावा किया गया है कि सेना में आदेश न मानने वाले सैनिकों के साथ मारपीट, अपमान और मानसिक यातना जैसी सजाएं दी जाती हैं. पूर्व सैनिकों ने भी ऐसे अनुभव साझा किए हैं.
युद्ध की पृष्ठभूमि में बढ़ती क्रूरता
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लगातार जारी है. रूस की ओर से यूक्रेन के शहरों पर हमले किए जा रहे हैं, जिनमें आम नागरिक भी घायल हो रहे हैं. वहीं यूक्रेन ने साफ कहा है कि वह किसी भी दबाव में अपनी जमीन नहीं छोड़ेगा.
मानवाधिकारों पर उठे सवाल
इस वीडियो ने एक बार फिर युद्ध के दौरान सैनिकों और आम लोगों के मानवाधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सैन्य अनुशासन के नाम पर की जा रही गंभीर ज्यादती मानी जाएगी.

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जाति प्रमाणपत्र नहीं, गरीबी प्रमाणपत्र जारी किया जाए।
आरक्षण जाति को नहीं, गरीब को दिया जाए।
गरीब हर जाति में होते हैं।
जो इस बात से सहमत हैं, अपनी उपस्थिति दर्ज करें।

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राष्ट्रीय खेल बोर्ड को लेकर खेलनहार परेशान, सताने लगी कुर्सी जाने की चिन्ता
क्या तीन महीने में बदल जाएगा भारतीय खेल तंत्र, खेलों में पारदर्शिता को लगेंगे पंख
श्रीप्रकाश शुक्ला
नई दिल्ली। अगले तीन महीनों में भारत में खेल संगठनों का परिदृश्य पूरी तरह बदलने वाला है, क्योंकि खेल मंत्रालय राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए राष्ट्रीय खेल बोर्ड का गठन करने जा रहा है। यह नया ढांचा नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत सभी संघों के संविधान को संशोधित करने और उन्हें सुव्यवस्थित करने के लिए बाध्य करेगा।

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