बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही घटनाएं अब दिल दहला देने वाली बनती जा रही हैं। हाल ही में के झेनैदाह जिले के कलिगंज इलाके में एक 40 वर्षीय हिंदू महिला के साथ जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। महिला को पेड़ से बांधा गया, उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और दरिंदगी की हद पार करते हुए उसके बाल तक काट दिए गए। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि डर फैलाने की साजिश जैसा लगता है।
दुख इस बात का है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ समय से हिंदुओं पर हमले, हत्याएं और उत्पीड़न लगातार सामने आ रहे हैं। हर बार पीड़ित वही और खामोशी भी वही। गुस्सा इसलिए आता है क्योंकि के नेतृत्व वाली सरकार इसे “सामान्य आपराधिक घटना” बताकर पल्ला झाड़ लेती है। क्या किसी समुदाय को निशाना बनाकर की गई हिंसा सामान्य हो सकती है?
यह पोस्ट लिखते हुए दिल भारी है और गुस्सा भी। सवाल यही है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट मीडिया व सोशल मीडिया में उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है। उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं, बल्कि मानवाधिकारों पर चिंता जताना है।