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केरल में लोग नारियल के छिलकों से रस्सी बना रहे हैं। केरल के अलप्पुझा में नारियल के छिलकों और जटा यानी Coconut Coir Waste का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। इस पहल से नारियल के छिलकों से कोयर फाइबर की चटाइयां, रस्सियां और कोकोपीट तैयार किया जाता है। कोकोपीट बागवानी और गार्डेनिंग में पेड़-पौधों की जड़ों के आसपास नमी बनाए रखने में मदद करता है। नारियल के इस कृषि वेस्ट को फेंकने के बजाय इसको बेहतर तरीके से उपयोगी उत्पादों में बदलने से कृषि का कचरा कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे व्यवसाय के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र स्थित गंजमुरादाबाद कस्बे से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां महज 800 स्क्वायर फीट जमीन के बंटवारे के विवाद में एक युवक की उसके अपने ही परिवार ने बेरहमी से हत्या कर दी। मृतक की पहचान 26 वर्षीय दिलशाद के रूप में हुई है, जो लोडर चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे जमीन के टुकड़े को लेकर दिलशाद और उसके छोटे भाई एजाज के बीच कहासुनी हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर पिता मुर्तजा (65) ने दिलशाद के हाथ पीछे से कसकर पकड़ लिए और बड़े भाई इरशाद ने उसके पैर जकड़ लिए, जिसके बाद एजाज ने उस पर तलवार से ताबड़तोड़ तीन वार कर दिए।यह पूरी खौफनाक वारदात दिलशाद की पत्नी सोफिया (22) के सामने हुई, जो अपने पति को बचाने के लिए रोती-बिलखती और छोड़ने की गुहार लगाती रही, लेकिन घर की अन्य महिलाओं ने उसे पकड़े रखा। खून से लथपथ दिलशाद को पड़ोसी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दिलशाद अपने पीछे पत्नी और 18 महीने के मासूम बेटे को छोड़ गया है, जिसे अभी यह भी नहीं पता कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। सूचना मिलने पर सीओ बांगरमऊ हर्ष मोदी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस ने आरोपी पिता मुर्तजा और भाई इरशाद को हिरासत में ले लिया है, जबकि वारदात में शामिल अन्य आरोपी भाई फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
कोयले की राख से हल्की ईंटे बनाई जाती है। थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली कोयले की राख यानी फ्लाई ऐश से मजबूत और हल्की ईंटें बनाई जाती हैं। इन ईंटों का आकार एक जैसा होने से निर्माण में काम आसान हो सकता है। ये सामान्य लाल ईंटों की तुलना में किफायती विकल्प मानी जाती हैं और उचित गुणवत्ता में टिकाऊ भी हो सकती हैं। फ्लाई ऐश का उपयोग करने से औद्योगिक वेस्ट का बेहतर इस्तेमाल होता है और मिट्टी से बनने वाली ईंटों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। यह निर्माण और पर्यावरण, दोनों के लिए उपयोगी विकल्प है।