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राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण व सहकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त करने वाले श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूँ।
गुजरात में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा व गति देने वाले वकील साहब ने अनेक कार्यकर्ताओं को एक अभिभावक की तरह गढ़ने का कार्य किया। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर निजाम के अत्याचार व आपातकाल के ख़िलाफ कठोर संघर्ष करने वाले लक्ष्मणराव इनामदार जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणीय है।
राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण व सहकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त करने वाले श्रद्धेय लक्ष्मणराव इनामदार जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूँ।
गुजरात में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा व गति देने वाले वकील साहब ने अनेक कार्यकर्ताओं को एक अभिभावक की तरह गढ़ने का कार्य किया। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर निजाम के अत्याचार व आपातकाल के ख़िलाफ कठोर संघर्ष करने वाले लक्ष्मणराव इनामदार जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणीय है।
प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के ठीक एक दिन बाद कूनो नेशनल पार्क से खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए ऐतिहासिक और खुशी का पल बताया। नए शावकों के जन्म के साथ भारत में चीता संरक्षण अभियान को एक और अहम उपलब्धि मिली है। चार साल के प्रोजेक्ट चीता के सफर में कूनो में जन्मे इन चार नए जीवन को भारत में चीतों के संरक्षण और उनके कुनबे को बढ़ाने की दिशा में उम्मीद की एक नई किरण माना जा रहा है।
हिंदी सिनेमा के दो ऐसे चेहरे, जिन्हें भुलाना मुश्किल है!
सदाशिव अमरापुकर ने अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और खलनायक से लेकर जटिल किरदारों तक की शानदार अदायगी से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई। वहीं शक्ति कपूर ने खलनायक के साथ-साथ कॉमेडी किरदारों में भी अपनी अलग पहचान बनाई और अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से लोगों को खूब हंसाया।
दोनों कलाकारों ने अपने-अपने अंदाज़ में हिंदी सिनेमा को ऐसे यादगार किरदार दिए, जिन्हें आज भी दर्शक याद करते हैं।
आपको सदाशिव अमरापुकर और शक्ति कपूर में से किसके किरदार सबसे ज्यादा याद हैं?
गलवान में बिना ह@थियार के चीनी सैनिकों से भिड़ गए थे वीर गुरतेज सिंह!
15 जून 2020 की गलवान घाटी की झड़प में 3 पंजाब की घा@तक प्लाटून के जवान गुरतेज सिंह ने अदम्य साहस दिखाया। उनके पास उस वक्त अपनी कृपाण के अलावा कोई ह@थियार नहीं था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कई चीनी सैनिकों का डटकर सामना किया और गंभीर रूप से घा@यल होने के बाद भी पीछे नहीं हटे।
इस वीरता के लिए गुरतेज सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है।
🇮🇳 देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर गुरतेज सिंह को शत-शत नमन।