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यदि एक आम आदमी यह कर सकता है, तो सरकार क्यों नहीं? पटना के एक सामान्य शिक्षक ने अपने प्रयासों से एक अस्पताल का निर्माण किया है, जहाँ एक्स-रे की कीमत मात्र ₹25 है और ईसीजी भी केवल ₹25 में उपलब्ध है। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता है। अब विचार करने योग्य बात यह है कि हम हर साल टैक्स देते हैं, फिर भी इलाज इतना महंगा क्यों है? यदि एक शिक्षक यह कर सकता है, तो हमारे टैक्स के पैसे से सरकार क्यों नहीं? यह सवाल केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हर टैक्स देने वाले भारतीय का है। आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर लिखें। #taxpayerquestion #healthcareinindia #sastailaaj #publichealth #indiaspeaks
भगवान शिव के अनुयायी कृपया इस संदेश को अनदेखा न करें।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से 60 फीट लंबा और 700 किलो वजन का त्रिशूल अयोध्या के लिए प्रस्थान कर चुका है। इस भव्य त्रिशूल यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु और संत झूमते हुए और भजन गाते हुए पैदल चल रहे हैं। यह यात्रा जबलपुर, काशी और प्रयागराज जैसे शहरों से होकर गुजरेगी और 10 फरवरी को अयोध्या पहुंचेगी। दिव्य त्रिशूल को राम मंदिर के निकट विघेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बिहार में 33 फुट का शिवलिंग पहले ही स्थापित किया जा चुका है।
आज मेरे पति को वही लोग श्रद्धांजलि देंगे, जो एक शहीद की पत्नी और उसके छोटे बच्चों के दर्द को सच में समझते हैं। यह श्रद्धांजलि सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि उस बलिदान के प्रति सम्मान है, जिसने हमारे परिवार से एक सहारा छीन लिया, लेकिन देश को सुरक्षा दी। जो दिल से इस दुःख को महसूस कर सकते हैं, वही सच्चे अर्थों में शहीद को नमन करते हैं। 🙏🇮🇳
सोचने वाली बात है…
फिल्म रामायण से
Vivek Oberoi
एक भी रुपया नहीं लेना चाहते।
अपनी पूरी फीस ज़रूरतमंद बच्चों को दान कर रहे हैं।
ना PR…
ना दिखावा…
ना शोर…
लेकिन फिर भी
👉 सोशल मीडिया पर
👉 एक लाइक भी नहीं?
हम अक्सर गलत लोगों को सिर पर बैठा लेते हैं
और जो सच में अच्छा कर रहा होता है,
उसे चुपचाप नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
अगर आपको भी लगता है कि
अच्छाई को पहचान मिलनी चाहिए,
तो कम से कम एक लाइक, एक शेयर तो बनता है।
क्योंकि
आज लाइक सिर्फ बटन नहीं,
कभी-कभी हौसला भी होता है।
#vivekoberoi
#ramayana
नागौर के इस 'शातिर' कबूतर की दास्तां वाकई किसी बॉलीवुड फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी है! पुरानी फिल्मों में तो कबूतर सिर्फ प्रेम पत्र लेकर 'गुटरगूं' करते थे, लेकिन नागौर के इस 'डिजिटल युग' के कबूतर ने तो सीधे अपनी 'रिटायरमेंट प्लानिंग' ही कर ली।
एक सुनार की दुकान में कारीगर अपना काम कर रहे थे, तभी आसमान से एक 'सफेद वीआईपी' उतरा। लोगों को लगा शायद शांति का संदेश लाया है, लेकिन इस कबूतर के इरादे कुछ और ही थे। बिजली की फुर्ती से उसने मेज पर रखी सोने की चेन उठाई और फुर्र से बाहर निकल गया।
दुकान में हड़कंप मच गया। जो कारीगर कल तक 'भाग्यश्री' के गाने गाते थे, वो अब पसीने-पसीने होकर चिल्ला रहे थे— "आ कबूतर, आ... मेरी चेन वापस दे जा!" * जमावड़ा: देखते ही देखते तमाशबीनों की भीड़ लग गई।