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देहरादून के MMA फाइटर विक्की सिंह अब शादी गार्डन में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे हैं। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों को लगातार नजरअंदाज करने की वजह से एक प्रतिभावान फाइटर को इस हाल में देखना दुखद है।" – राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले उत्तराखंड के एक होनहार एथलीट की यह लाचारी हमारे देश की खेल व्यवस्था और प्राथमिकताओं पर एक बहुत बड़ा और कड़वा सवालिया निशान खड़ी करती है। रिंग में देश और राज्य का नाम रोशन करने का सपना देखने वाला एक जांबाज मिक्स मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर आज अपने परिवार का पेट पालने के लिए एक शादी गार्डन में मामूली तनख्वाह पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने को मजबूर है।विक्की सिंह की यह बेबसी भारत में क्रिकेट के अलावा अन्य सभी खेलों (Other Sports) के प्रति बरती जाने वाली प्रशासनिक और सामाजिक उदासीनता की एक जीती-जागती और बेहद दर्दनाक मिसाल है। हमारे देश में जहां क्रिकेट और उसके खिलाड़ियों पर करोड़ों रुपये और अपार मीडिया अटेंशन बरसती है, वहीं एमएमए, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और कुश्ती जैसे कठिन खेलों के खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं, सरकारी नौकरी या कोई आर्थिक प्रोत्साहन तक नहीं मिल पाता। सालों तक कड़े प्रशिक्षण, खून-पसीना बहाने और चोटें सहने के बाद भी जब एक नेशनल स्तर के खिलाड़ी को इस तरह की तंगहाली का सामना करना पड़ता है, तो यह केवल उस खिलाड़ी की नहीं बल्कि पूरे समाज और खेल तंत्र की सामूहिक विफलता है।सोशल मीडिया पर विक्की सिंह की तस्वीरें और उनका यह संघर्ष वायरल होने के बाद खेल प्रेमियों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश और गहरा दुख देखा जा रहा है। लोग सोशल मीडिया पर उत्तराखंड सरकार, खेल मंत्रालय और खेल संघों को टैग करके यह मांग कर रहे हैं कि ऐसे होनहार और अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्षमता रखने वाले फाइटर को तुरंत सरकारी सहायता, स्पॉन्सरशिप या खेल कोटे से एक सम्मानजनक नौकरी दी जानी चाहिए, ताकि वे अपनी ट्रेनिंग दोबारा शुरू कर सकें और देश के लिए मेडल जीत सकें। इस तरह की उपेक्षा को देखकर ही आज देश के हजारों उभरते हुए खिलाड़ी बीच में ही अपने सपने तोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
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