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🙏विश्व के प्रथम हिंदू लेफ्टिनेंट पुरोहित🙏
🚩लेफ्टिनेंट कर्नल आचार्य पंडित कृष्णकान्त अत्रि🚩
सन 1964 ई० में हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के गाँव गड़खल में जन्मे 🚩पंडित कृष्णकान्त अत्रि🚩 का परिवार अत्यंत साधारण था, लेकिन बचपन से ही उनके भीतर कुछ बड़ा करने का जज़्बा था। कठिन परिश्रम और लगन से उन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण की। पंजाब के होशियारपुर स्थित गुरुकुल से 🎓आचार्य की डिग्री🎓 प्राप्त की तथा अनेक भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया। मात्र 22 वर्ष की आयु में, वर्ष 1986 में वे इंग्लैंड चले गए।
करीब 20 वर्षों तक उन्होंने न्यूकैसल के हिंदू मंदिर में पुजारी के रूप में सेवा दी तथा वहाँ के हिंदू समाज को सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और भाषाओं की शिक्षा दी। ब्रिटिश सेना के इतिहास में पहली बार हिंदू पुरोहित के पद हेतु नियुक्ति निकली, जिसके लिए कमीशन परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक था। वर्ष 2005 में 🚩आचार्य पंडित कृष्णकान्त अत्रि🚩 ने यह परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रच दिया।
‘द टाइम्स’ के अनुसार, इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि यदि कोई सैनिक युद्ध में जाने से हिचके तो वे क्या कहेंगे। इस पर उनका उत्तर था—
Bharatiya Janata Party (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशल संगठनकर्ता एवं कर्मठ जननेता माननीय श्री Nitin Nabin जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएंI
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की मंगलकामना करती हूँ।
आपका ओजस्वी नेतृत्व और राष्ट्र-निर्माण के प्रति अटूट समर्पण हम सभी को जन-सेवा के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
#happybirthdaynitinnabinji #nitinnabin #bjp
विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपके युवा, ऊर्जावान और दूरदर्शी नेतृत्व ने कम समय में ही संगठन को नई दिशा और मजबूती प्रदान की है। आपकी कार्यशैली, संगठनात्मक क्षमता और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की भावना अत्यंत प्रेरणादायक है।
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर सफल नेतृत्व की कामना करता हूँ।
भक्त तुलसीदास जी की दृष्टि में " पशु " एवं " ताड़ना "
पिछले अंकों में ढोल , गंवार एवं शूद्र के साथ " ताड़ना " का क्या संबंध है ? इस पर चर्चा की जा चुकी है। इस अंक में " पशु " का " ताड़ना " के साथ क्या संबंध है ? इस पर प्रकाश डाला जा रहा है।
किसी भी शब्द के अर्थ को समझने के लिए उस ग्रंथ का समग्रता से अध्ययन कर ही अर्थ निकालना चाहिए अन्यथा अर्थ के अनर्थ होने की संभावना अधिक रहती है। ऐसा ही एक शब्द है - पशु।
साधारणतः हम " पशु " शब्द से चतुष्पद प्राणी यानी चार पैरोंवाले जीव को समझते हैं , जिनको पूंछ होती है। कुछ जीवों में पूंछ के साथ-साथ सींग भी होते हैं।
यहां ' ताड़ना ' का तात्पर्य पशुओं की देखरेख करने से है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने महाकाव्य रामचरितमानस में कई बोलियों / भाषाओं के शब्दों का समायोजन किया है। जैसे- जोहार एवं ताड़ना।
" जोहार " शब्द का प्रयोग हमारे संथाली बंधुगण अभिवादन के लिए करते हैं। इसी प्रकार बांग्ला भाषा में पशुओं के भगाने को ' ताड़ाओ ' कहते हैं। उदाहरणस्वरूप - छागोल ताड़ाओ अर्थात् बकरी को भगाओ।
इस प्रकार पशुओं के लिए ताड़ना शब्द का अभिप्राय उसकी निगरानी करने से या उसे हटाने से है।
हम सभी का बौद्धिक , मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर तुलसीदास जी के समकक्ष नहीं है , अतः हम अपने स्तर के अनुसार शब्द एवं उसके अर्थ को आरोपित कर देते हैं। इसलिए रामचरितमानस के उत्तरकांड में तुलसीदास जी लिखते हैं -
💥 “ब्राह्मण भोजन करने से पहले ठाकुर साहब को भोग लगता है”
ये सिर्फ एक पंक्ति नहीं, बल्कि सम्मान, परंपरा और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
👉 पूरे हिंदुस्तान का ब्राह्मण समाज पूरी ताकत के साथ राजा भैया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और उनकी बातों का पूर्णतया समर्थन करता है। 🚩
⚡ जहाँ स्वाभिमान झुकता नहीं, वहीं से इतिहास लिखा जाता है… ⚡⚡ एकता ऐसी… कि विरोधियों की नींद उड़ जाए! ⚡
#ब्राह्मण_समाज 🚩
सुविधा मुक्त साधना युक्त सामूहिक जीवन का अभ्यास है संघ शिक्षा वर्ग : कौशल जी
उन्नाव : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अवध प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) उन्नाव के सरस्वती विद्या मन्दिर पूरननगर के परिसर में प्रारम्भ हो गया। दिनांक २२ मई से प्रारंभ होकर ७ जून तक १५ दिन चलने वाला है। अवध प्रांत के २६ ज़िलों से ३१७ शिक्षार्थी वर्ग में प्रशिक्षण लेने आए हैं।
अवध प्रांत के प्रांत प्रचारक कौशल जी ने वर्ग का उद्घाटन करते हुए कहा कि, राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से स्वंयसेवकों को सुविधा मुक्त, साधना युक्त सामूहिक जीवन का अभ्यास करवाता है। १०० वर्ष के साधना काल का प्रतिफल यह कि प्रत्येक वर्ष लाखों कार्यकर्ता प्रशिक्षित होकर राष्ट्र सेवा के लिए निकलते है।
कौशल जी ने शिक्षार्थियों के समक्ष संघ के उद्देश्य एवं लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यकर्ताओं का गुणात्मक विकास कैसे होता है ? विषय को रखते हुए कहा कि, संघ ने सौ वर्ष की यात्रा पूर्ण कर ली इस बीच लाखों कार्यकर्ता मां भारती की सेवा के लिए आगे आये। गंडकी नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह हजारों किलोमीटर की यात्रा में सारे कोने समाप्त हो जाते हैं, रगड़ते-रगड़ते, घिसते घिसते पत्थर शालिग्राम बन जाते हैं उसी तरह संघ के शिविरों में शारीरिक, बौद्धिक एवं व्यस्था का प्रशिक्षण पाकर सामान्य स्वंयसेवक कुशल कार्यकर्ता बन जाता है और वह राष्ट्र एवं समाज हित में समर्पित भाव से कार्य करता है।
प्रांत प्रचारक ने कहा कि, गर्मी में आयोजित वर्गों में शारीरिक अभ्यास, बौद्धिक के विभिन्न बिषयों के साथ साथ व्यवस्था कौशल भी सीखने को मिलता है। वर्ग में शारीरिक, बौद्धिक, भोजन, स्वच्छता, जल व्यवस्था, चिकित्सा, अतिथि व्यवस्था सहित ३५ प्रकार की व्यवस्थाओं का भी परिचय आता है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षार्थी सूचना का पालन,स्वअनुशासन का पालन एवं जिज्ञासु बन कर रहें।यहां से अच्छे कार्यकर्ता बनकर जाएंगे तो ही संघ का उद्देश्य पूर्ण होगा।
मई व जून माह में हो रहे देश भर में प्रशिक्षण वर्गों की संख्या 96 है जिसमें लगभग 25000 से अधिक स्वंयसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें हैं। संघ शिक्षा वर्ग में आने वाले शिक्षार्थी पहले ३ दिन का प्रारंभिक वर्ग फिर एक सप्ताह का प्राथमिक वर्ग करके आते हैं। देश भर में ऐसे शिक्षार्थियों की संख्या भी सवा लाख से अधिक रहती है।
वर्ग में सर्वाधिकारी श्री प्रमोद कुमार, वर्ग कार्यवाह कृष्णकुमार, सह कार्यवाह सुशील जी, सर्व व्यवस्था प्रमुख लालता प्रसाद जी, सह व्यवस्था प्रमुख आशीष, वर्ग पालक यशोदानंद , मुख्य शिक्षक अभिषेक, सह मुख्यशिक्षक महेंद्र, शारीरिक शिक्षण प्रमुख परितोष, प्रांत प्रचार प्रमुख डा.अशोक दुबे, बौद्धिक प्रमुख प्रवीण, नागेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे ।।