मैं मसूरी के लोगों का बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं। बुलेशा के एक सूफी संत, जिन्होंने धार्मिक कट्टरता का दंश झेलते हुए भी हमेशा उदार, समन्वयवादी, सहिष्णु सोच को आगे बढ़ाया। मानवतावादी दृष्टिकोण के अनन्य प्रचारक बुलेशा की मजार को तोड़ने के खिलाफ जिस तरीके से मसूरी का प्रबुद्ध जनमानस उठकर खड़ा हुआ है, उसने मसूरी के साथ-साथ हमारे राज्य का गौरव भी बढ़ाया है।
अभी विकासनगर में कश्मीरी शॉल बेचने वाले जिस प्रकार से घायल हुए हैं, हमें इस तरीके की घटनाओं पर भी उठकर खड़ा होना चाहिए। हमने मणिपुर के छात्र की हत्या के मामले में भी इसी तरीके की सामूहिक प्रतिक्रिया दी थी। इससे राज्य की उदार, उद्दाम, सहिष्णु और संस्कृति वादी छवि निखरती है।
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