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क्या सच्चा अपनापन घर, पैसे या हैसियत से तय होता है? शायद नहीं… ❤️
ब्राज़ील की यह भावुक कर देने वाली घटना इंसानियत और वफादारी की एक खूबसूरत मिसाल है। बताया जाता है कि एक बेघर व्यक्ति को देर रात इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा। जब वह अस्पताल के अंदर था, तब उसके चार पालतू कुत्ते बाहर चुपचाप बैठकर उसका इंतज़ार करते रहे।
न कोई शिकायत, न कोई बेचैनी… बस अपने मालिक के लौटने का भरोसा। 🐾❤️
कहानी यह भी बताती है कि वह व्यक्ति खुद मुश्किल हालात में जीवन जी रहा था, फिर भी इन बेजुबानों की देखभाल करता था और अपना भोजन तक उनके साथ साझा करता था। शायद यही प्रेम और दया का वह रिश्ता था, जिसने इन कुत्तों को उसके साथ इतनी गहराई से जोड़ दिया।
जब इलाज के बाद वह बाहर आया, तो वे चारों तुरंत उसके पास दौड़कर लौट आए। यह दृश्य सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश है—
रिश्ते खून, दौलत या बड़े घरों से नहीं बनते… रिश्ते बनते हैं प्रेम, विश्वास और उस देखभाल से जो हम दूसरों को देते हैं।
जो दिल से प्यार देता है, उसे किसी न किसी रूप में प्यार वापस जरूर मिलता है। ❤️🐶

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में संकेत दिया कि वह दिसंबर में वापस बांग्लादेश जा सकती हैं। शेख हसीना ने बांग्लादेश के मौजूदा हा*लात पर भी चिंता जताई है।

दूसरी ओर, शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने भी बुधवार को दिल्ली में मीडिया के साथ वर्चुअल बातचीत की। इस दौरान साजीब वाजेद ने भारत को आगाह करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत की पूर्वी सीमा पर एक और पाकिस्तान बन गया है। उनका आरोप है कि अगस्त 2024 से बांग्लादेश में राजनीतिक ह*त्या*ओं को कानूनी संरक्षण दिया गया है और आज बांग्लादेश एक 'फेल्ड स्टेट' (विफल देश) बन गया है, जहां कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है।

'पूरी दुनिया में आतंकी बांग्लादेश से ही आएंगे'

साजीब वाजेद ने मीडिया से बातचीत में कहा, "भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों, खासकर ISI, को खुली छूट मिल गई है। यहां अल-कायदा के सदस्य सार्वजनिक रैलियां कर रहे हैं और भाषण दे रहे हैं। बांग्लादेश में जो वर्तमान में हो रहा है, वह भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। अगर इसे अभी नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में पूरी दुनिया में आतंकवादी बांग्लादेश से ही आएंगे।"

'बांग्लादेश में अभी भी लोगों की मौ*त हो रही है'

दिल्ली में मीडिया के साथ वर्चुअल बातचीत के दौरान साजीब वाजेद ने कहा, "सभी ने बांग्लादेश में जुलाई 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौ*तों के बारे में सुना होगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने मृतकों की संख्या 1,400 बताई, जबकि सरकार ने यह संख्या करीब 800 बताई। बाकी 600 लोग कौन हैं? UN को इनके नाम कहां से मिले? अवामी लीग और हमारे वकीलों ने इस सवाल के जवाब के लिए कई बार UN को पत्र लिखा, लेकिन आज तक हमें कोई नाम नहीं बताया गया। इससे भी ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि UN ने अपने आंकड़ों में केवल 15 अगस्त 2024 तक की अवधि को शामिल किया, जबकि सभी जानते हैं कि बांग्लादेश में उसके बाद भी लोगों की मौत हो रही है।"

साजीब वाजेद ने आगे कहा, "बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया, जो बाद में कानून बन गया। इसे 'इंडेम्निटी बिल' कहा गया। इस कानून के तहत प्रदर्शनकारियों को कानूनी संरक्षण दे दिया गया। उन्हें किसी भी ह*त्या के मा*म*ले में कानूनी का*र्रवाई से बचाया गया, चाहे वह आम नागरिकों की हत्या हो, हमारी पार्टी के सदस्यों की ह*त्या हो या पुलिस अधिकारियों की हत्या। आखिर ह*त्या*ओं, खासकर पुलिस अधिकारियों की ह*त्या के लिए कानूनी सुरक्षा कैसे दी जा सकती है? यह पूरी तरह से मानवाधिकारों के खि*लाफ है।"

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मा*फि*या अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद (21) की गुरुवार सुबह एक सड़क हा*द*से में मौ*त हो गई। वह झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था। बताया जा रहा है कि झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ थाना क्षेत्र में अचानक एक जानवर सामने आ गया। उसे बचाने की कोशिश में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई।

कार में कुल पांच लोग सवार थे। हा*द*से के बाद पुलिस ने सभी घा*य*लों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अबान अहमद और उसके दोस्त सोनू को मृ*त घो*षित कर दिया। वहीं उमर अहमद, मोहम्मद जैद और असलम घा*य*ल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है।

यह हा*द*सा गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे झांसी-कानपुर हाईवे पर हुआ।

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प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, लेकिन राजस्थान के बालोतरा जिले से सामने आए एक मामले ने इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाड़मेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (AC ने धोरीमन्ना पंचायत समिति के जुनाखेड़ा ग्राम पंचायत की ग्राम विकास अधिकारी सपना गुर्जर को 4,500 रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकान की तीसरी किस्त जारी कराने के लिए आवश्यक जियो-टैगिंग और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के बदले रिश्वत मांगी गई थी।

तीसरी किस्त जारी करने के नाम पर मांगे गए पैसे .

एसीबी के अनुसार, परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी के नाम स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना की अंतिम 60 हजार रुपये की किस्त जारी कराने के लिए ग्राम विकास अधिकारी 5,000 रुपये की रिश्वत मांग रही हैं।
शिकायत में कहा गया कि बिना पैसे दिए जियो-टैगिंग और ऑनलाइन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी, जिससे किस्त अटक गई थी।

शिकायत के बाद ACB ने बिछाया जाल

शिकायत मिलने के बाद बाड़मेर एसीबी ने पहले पूरे मामले का सत्यापन किया। जांच के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई। इसके बाद एसीबी की टीम ने निगरानी के बीच कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया।

निजी आवास पर हुई ट्रैप कार्रवाई

एसीबी निरीक्षक देवाराम चौधरी के मुताबिक, ट्रैप कार्रवाई के दौरान ग्राम विकास अधिकारी सपना गुर्जर को उनके निजी आवास पर 4,500 रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को धोरीमन्ना थाने ले जाया गया, जहां प्रारंभिक पूछताछ की गई।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह मामला केवल एक लाभार्थी तक सीमित था या प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्य लाभार्थियों से भी इसी तरह रिश्वत ली गई थी। जांच के दौरान दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता बिना किसी बाधा के पहुंचाना है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी द्वारा योजना का लाभ दिलाने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप सामने आते हैं, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। हालांकि इस मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

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थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने मौजूदा सुरक्षा हालात और भविष्य के युद्धों के लिए सेना की तैयारियों का जायजा लिया है. इसके लिए उन्होंने लखनऊ स्थित मध्य कमान के मुख्यालय का दौरा किया.इस दौरान सेना प्रमुख को मेक इन इंडिया के तहत बने आधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की जानकारी दी गई. अधिकारियों ने उन्हें इलाके की सुरक्षा स्थिति, नए बुनियादी ढांचे के विकास और आधुनिकीकरण के प्रयासों से अवगत कराया. मध्य कमान के जवानों से मुलाकात के बाद उन्होंने नॉर्थ इंडिया के मुख्यालय का भी दौरा किया और वहां तैनात अधिकारियों व सैनिकों के साथ सीधा संवाद किया.
आत्मनिर्भरता पर दिया पूरा जोर
सैनिकों को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी सेना की मजबूती उसकी तैयारी, लचीलापन और आत्मनिर्भरता पर टिकी होती है. उन्होंने सभी रैंकों के अधिकारियों और जवानों से आह्वान किया कि वे हर समय मुस्तैद रहें. उन्होंने कहा कि सीमा पर उभरती नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सैनिकों का सतर्क और तकनीक के साथ भविष्य के लिए तैयार रहना बेहद जरूरी है. उन्होंने जवानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती और हमें हर परिस्थिति के लिए 24 घंटे तैयार रहना होगा.
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी
दौरे के बाद अपने बयान में सेना प्रमुख ने कहा कि इसभविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी
दौरे के बाद अपने बयान में सेना प्रमुख ने कहा कि इस यात्रा ने भारतीय सेना की उच्च स्तर की तैयारी को दर्शाया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय सेना लगातार खुद को तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने पर ध्यान दे रही है. देश में बने स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल से सेना की ताकत कई गुना बढ़ गई है. सेना प्रमुख का यह दौरा देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने और सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह से तैयार करने के निरंतर प्रयासों को दिखाता है.

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भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को राष्ट्र की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में उनके लंबे और महत्वपूर्ण योगदान के लिए लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देश के प्रति उनकी असाधारण सेवा, दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में निभाई गई अहम भूमिका के लिए दिया गया है। इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएँ और बधाइयाँ मिल रही हैं।
अजीत डोभाल को भारत के सबसे अनुभवी रणनीतिकारों में गिना जाता है। दशकों तक सुरक्षा और खुफिया क्षेत्र में उनके योगदान ने देश की कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने में अहम भूमिका निभाई। यह सम्मान उनके समर्पण, सेवा और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

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भारत आतंकवाद से निपटने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए, एक मजबूत और अटल "शून्य सहिष्णुता" नीति की मांग सार्वजनिक चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। कई नागरिकों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना, निर्दोष लोगों की जान बचाना और देश की संप्रभुता को बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। उनका तर्क है कि आतंकवाद, किसी भी रूप में, शांति, सामाजिक सद्भाव, आर्थिक प्रगति और राष्ट्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
इस दृष्टिकोण के समर्थकों का मानना है कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल प्रत्येक व्यक्ति—चाहे वह योजना बनाने, वित्तपोषण करने, भर्ती करने या रसद सहायता प्रदान करने के माध्यम से हो—के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वे इस बात पर जोर देते हैं कि प्रभावी खुफिया तंत्र, मजबूत सीमा प्रबंधन, समन्वित कानून प्रवर्तन, आधुनिक सुरक्षा क्षमताएं और त्वरित न्यायिक प्रक्रियाएं एक व्यापक आतंकवाद-विरोधी रणनीति के लिए आवश्यक हैं। उनके अनुसार, दृढ़ और प्रभावी कार्रवाई यह स्पष्ट संदेश देती है कि लोकतांत्रिक समाज में हिंसा और आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है।
वहीं, संवैधानिक विशेषज्ञ और विधि विद्वान इस बात पर जोर देते हैं कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई हमेशा संविधान और कानून के दायरे में ही लड़ी जानी चाहिए। उनका मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा और मूलभूत कानूनी सिद्धांतों का संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं, जो न्याय को प्रभावी और निष्पक्ष बनाते हैं। सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मजबूत संस्थाएं, पारदर्शी जांच और उचित प्रक्रिया को आवश्यक माना जाता है।
यह सार्वजनिक विमर्श एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सशक्त भारत की साझा आकांक्षा को दर्शाता है, जहाँ नागरिक बिना भय के जीवन जी सकें। कई लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय एकता, जिम्मेदार शासन, जन-जागरूकता और कानून के प्रति सम्मान ही एक मजबूत भारत की नींव हैं।
अंततः, हमारा साझा लक्ष्य एक ऐसे सुरक्षित और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना है जहाँ आतंकवाद के लिए कोई स्थान न हो, पीड़ितों को न्याय मिले और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा भी संरक्षित रहे। शांति, सुरक्षा और कानून के शासन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को ही एक सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला माना जाता है।

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छात्रों की आवाज़ बनी लोकतंत्र की ताकत 📚✊
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्रों ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता से मुलाकात की। इस दौरान छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
राहुल गांधी ने छात्रों की चिंताओं को सुना और कहा कि अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने वाले युवाओं का साहस लोकतंत्र की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
मुलाकात में कई छात्र शामिल रहे, जिनमें मुंबई की रिया अहिर भी थीं, जो छात्र आंदोलन के दौरान अपने साहसिक कदम के कारण चर्चा में आई थीं।
युवाओं की शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य से जुड़े सवाल आज देश के सबसे अहम मुद्दों में शामिल हैं। छात्रों की आवाज़ को कितना महत्व दिया जाता है, यह आने वाला समय बताएगा।

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🚨 FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर बढ़ा विवाद! ईसाई समुदाय और NGOs ने जताई चिंता। अमित शाह से मुलाकात कर प्रतिनिधिमंडल ने बिल वापस लेने या JPC को भेजने की मांग की। अब 12 अगस्त पर सबकी नजर।

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