image

imageimage

image

image

imageimage
21 hrs - Translate

आज भाजपा कार्यालय कमलम, चंडीगढ़ में बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक तरीके से सब ने साथ मिलकर लोहड़ी मनाई। अग्नि के चारों ओर एकत्र होकर सभी ने सुख-समृद्धि, आपसी भाईचारे और देश की खुशहाली की कामना की। लोहड़ी का यह पावन पर्व हमारी संस्कृति, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस अवसर पर सभी ने नई ऊर्जा और संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश लिया।
#लोहड़ी #lohricelebration #भाजपा #bjp #कमलम #चंडीगढ़ #kamalamchandigarh

image
21 hrs - Translate

आज भाजपा कार्यालय कमलम, चंडीगढ़ में बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक तरीके से सब ने साथ मिलकर लोहड़ी मनाई। अग्नि के चारों ओर एकत्र होकर सभी ने सुख-समृद्धि, आपसी भाईचारे और देश की खुशहाली की कामना की। लोहड़ी का यह पावन पर्व हमारी संस्कृति, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस अवसर पर सभी ने नई ऊर्जा और संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश लिया।
#लोहड़ी #lohricelebration #भाजपा #bjp #कमलम #चंडीगढ़ #kamalamchandigarh

image
21 hrs - Translate

आज भाजपा कार्यालय कमलम, चंडीगढ़ में बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक तरीके से सब ने साथ मिलकर लोहड़ी मनाई। अग्नि के चारों ओर एकत्र होकर सभी ने सुख-समृद्धि, आपसी भाईचारे और देश की खुशहाली की कामना की। लोहड़ी का यह पावन पर्व हमारी संस्कृति, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस अवसर पर सभी ने नई ऊर्जा और संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश लिया।
#लोहड़ी #lohricelebration #भाजपा #bjp #कमलम #चंडीगढ़ #kamalamchandigarh

imageimage
21 hrs - Translate

स्वर्णनगरी लंका अपने वैभव के चरम पर थी, जहाँ की दीवारें सोने की और खंभे मणियों के थे। उसी चमक-दमक के बीच महारानी मंदोदरी निवास करती थीं। वे केवल एक सुंदरी नहीं थीं; उन्हें शक्ति का नहीं, अपितु प्रज्ञा और विवेक का वरदान प्राप्त था। एक उच्च कुल में जन्मी और संयम व करुणा के संस्कारों में पली-बढ़ी मंदोदरी का विवाह उस महाप्रतापी दशानन से हुआ था, जिसका तेज सूर्य के समान था, परंतु जो भीतर ही भीतर अपने अहंकार की अग्नि में जल रहा था। वह लंका की रानी अपनी इच्छा से नहीं, अपितु भाग्य के खेल से बनी थीं।

image
21 hrs - Translate

बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।

image