India’s Home Ministry Decision Sparks Discussion
A significant decision by India’s Home Ministry, led by Amit Shah, has drawn attention regarding relief for certain migrant communities. According to reports, non-Muslim migrants from Afghanistan, Bangladesh, and Pakistan may be allowed to stay in India without requiring valid passports or travel documents, provided they meet specific conditions.
The provision is said to apply to Hindus, Sikhs, Buddhists, Jains, Parsis, and Christians who are believed to have migrated due to religious persecution and entered India before a defined cut-off date. It also includes individuals whose documents have expired or those who arrived without proper documentation.
This move is linked to the framework of the Citizenship Amendment Act, which aims to provide a structured pathway toward citizenship for eligible individuals. Supporters see it as a humanitarian step designed to offer protection and stability to persecuted minorities.
At the same time, the policy continues to be part of ongoing public discussion, reflecting broader debates around citizenship, inclusion, and national policy. It highlights how decisions of this scale carry both social and political significance in shaping the country’s future.
#caa #amitshah #indiapolicy #citizenshipdebate #indianews

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राष्ट्रीय चेतना के प्रखर स्वर ‘राष्ट्रकवि’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।

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निस्वार्थ भक्ति और भगवान का ऋण
यह कथा एक ऐसे निस्वार्थ भक्त की है जिसने जीवन भर भगवान का नाम जपा, लेकिन कभी अपने लिए कुछ नहीं माँगा। एक दिन बांके बिहारी मंदिर में भगवान के दर्शन न होने पर वे अत्यधिक व्यथित हो गए। उन्हें लगा कि शायद उनके पाप बढ़ गए हैं, इसलिए वे आत्मग्लानि में यमुना में प्राण त्यागने चल दिए।
तभी अंतर्यामी भगवान ने एक लीला रची। उन्होंने एक कोढ़ी को उस भक्त से आशीर्वाद लेने भेजा। भक्त ने स्वयं को 'पापी' मानते हुए अनमने भाव से कोढ़ी को स्वस्थ होने का आशीर्वाद दिया और चमत्कारिक रूप से वह कोढ़ी ठीक हो गया। उसी क्षण भगवान प्रकट हुए।
भगवान ने प्रकट होकर रहस्य उजागर किया कि भक्त की निष्काम भक्ति के कारण भगवान उन पर 'ऋणी' हो गए थे। भक्त के पुण्य इतने बढ़ गए थे कि भगवान उनके सामने आने में संकोच कर रहे थे। कोढ़ी को आशीर्वाद देकर भक्त ने अपने पुण्यों का कुछ अंश खर्च कर दिया, जिससे भगवान थोड़े ऋण-मुक्त हुए और अपने प्रिय भक्त को दर्शन दे पाए।
सीख: निस्वार्थ भाव से की गई भक्ति भगवान को भी प्रेम के बंधन में बाँध देती है।
राधे राधे
मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज
प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १०८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा

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लाचित बरफुकन जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन

#lachitborphukan #shivajiofnortheast

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🌞 सुप्रभात 🙏
✨ शुभ शनिवार ✨
🚩 जय श्री राम 🚩
“बजरंगबली की कृपा से हर संकट दूर हो,
आपका दिन सुख, शांति और सफलता से भरपूर हो।”

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#जानकी_नवमी
जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की॥
ताके जुग पद कमल मनावउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ॥
आप सभी को माता सीता के प्राकट्योत्सव पर्व 'सीता नवमी' की हार्दिक शुभकामनाएं!
#सीता_नवमी

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महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री 'हिमालय पुत्र' हेमवती नन्दन बहुगुणा जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।

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जब मुगलों की सेनाएं असम सेना को खदेड़ रही थीं, ऐसे में अकेला लाचित बोरफुकन ही था जो अकेले मुगलों पर कहर बनकर टूट पड़ा।
लाचित बोरफुकन ने अपने सैनिकों को ललकारा
वीरों! मुगलों को इस बार ऐसा सबक सिखाओ कि फिर कभी भविष्य में असम की ओर रुख करने का ये साहस न कर सकें। यह आखरी और निर्णायक युद्ध होना चाहिए। इस अवसर को चूक गये तो ये माटी तुम्हें कभी क्षमा नहीं करेगी।
अहोम के राजा चक्रध्वज सिंह ने मुगलों के खिलाफ क्रांति की मशाल थाम ली। चक्रध्वज ने मुगलों से लड़ने के लिए अपने मंत्री मोमाई तामुली बरुआ के पुत्र लाचित बोरफुकन को अपनी सेना का सेनापति बनाया ।
लाचित बोरफुकन भारत के गौरव हैं। 1671 में सरायघाट में ब्रह्मपुत्र नदी में अहोम सेना और मुगलों के बीच ऐतिहासिक लड़ाई हुई, जिसने पानी में लड़ाई की तकनीक को नए आयाम दिए।
सराइघाट के युद्ध में उनके द्वारा प्रदर्शित अपूर्व साहस को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। लाचित ने बीमार होते हुए भी युद्ध किया और अपनी अदम्य नेतृत्व क्षमता के कारण सरायघाट की लड़ाई में लगभग 4000 मुगल सैनिकों को मार गिराया।लाचित ने अपनी सेना को गुरिल्ला युद्ध तथा नौसेना युद्ध में निपुण किया।
NDA में जो बेस्ट कैडेट होता है, उसको एक स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाता है, उस पदक का नाम है “लचित बोरफुकन”
प्रसिद्ध इतिहासकार सूर्यकुमार भूयान ने उनको उनकी रणनीति और बहादुरी के कारण भारत के उत्तर पूर्व क्षेत्र का “शिवाजी” कहकर संबोधित किया है
#महावीर_लाचित_स्मृति_दिवस #mahaveerlachitdiwas

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Full Movie Part 01
❤️"Yeh Saazishein Hain Pyaar Ki… ❤️‍🔥
Mohabbat kabhi seedhi nahi hoti… kabhi kismat rokti hai, kabhi log… aur kabhi khud dil hi saazish kar deta hai.
Har reel ek raaz kholegi… aur har raaz aapko aur gehra kheench lega is kahaani mein.
Kya yeh pyaar sach mein tha… ya sirf ek khoobsurat chaal?
Dekhte rahiye… kyunki asli kahaani abhi baaki hai. 👀❤️❤️ #yehsaazisheinhainpyaarki #loveordhokha