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स्वाधीनता संग्राम के महानायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक वीर सेनानी गुंडाधुर जी की जन्मभूमि बस्तर के नेतानार में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
उन्होंने जिस आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया था, वह आज नक्सलमुक्त भारत में सच्चे अर्थों में साकार हो रही है। इस अवसर पर उनके परिजनों का सम्मान भी किया।
स्वाधीनता संग्राम के महानायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक वीर सेनानी गुंडाधुर जी की जन्मभूमि बस्तर के नेतानार में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
उन्होंने जिस आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया था, वह आज नक्सलमुक्त भारत में सच्चे अर्थों में साकार हो रही है। इस अवसर पर उनके परिजनों का सम्मान भी किया।
स्वाधीनता संग्राम के महानायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक वीर सेनानी गुंडाधुर जी की जन्मभूमि बस्तर के नेतानार में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
उन्होंने जिस आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया था, वह आज नक्सलमुक्त भारत में सच्चे अर्थों में साकार हो रही है। इस अवसर पर उनके परिजनों का सम्मान भी किया।

🇮🇳🚩 जहाँ ध्येय केवल राष्ट्र हो, वहाँ 100 वर्ष का सफर भी एक शुरुआत लगती है…
सौ वर्षों की तपस्या, अनुशासन, सेवा और राष्ट्र निर्माण का अद्भुत संकल्प। एक छोटी सी शाखा से शुरू हुआ यह पावन सफर आज करोड़ों स्वयंसेवकों के हृदय की धड़कन बन चुका है। 🙏✨
हर स्वयंसेवक का समर्पण, हर शाखा का संस्कार और राष्ट्र प्रथम का विचार — यही संघ की पहचान है।
संघ शताब्दी वर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य की नई ऊर्जा और नए संकल्प का प्रतीक है।
🚩 राष्ट्राय स्वाहा, राष्ट्राय इदं न मम 🚩
संघ शताब्दी की अनंत शुभकामनाएँ।
जयतु भारतम् 🇮🇳
जय श्री राम 🚩🙏
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उत्तराखंड की बेटी हंसा मनराल… भारत की पहली महिला भारोत्तोलक कोच, जिनकी कोचिंग में देश ने जीते कई अंतरराष्ट्रीय मेडल 🇮🇳🥇
आज जब बेटियां हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं, तब उत्तराखंड की एक ऐसी बेटी की कहानी प्रेरणा देती है, जिसने उस दौर में इतिहास रचा जब महिलाओं का वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों में जाना भी आसान नहीं माना जाता था। हम बात कर रहे हैं पिथौरागढ़ की हंसा मनराल की, जिन्हें भारत की पहली महिला भारोत्तोलक कोच बनने का गौरव प्राप्त है। 🌟
भाटकोट गांव में जन्मीं हंसा मनराल ने सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपने हौसलों को कभी कमजोर नहीं होने दिया। शुरुआत में उन्होंने गोला फेंक, चक्का और भाला फेंक जैसी एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। प्रैक्टिस के लिए साधन नहीं थे, तो पत्थरों से अभ्यास किया करती थीं। 💪⛰️
साल 1985 तक हंसा राष्ट्रीय स्तर पर 12 गोल्ड, 4 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी थीं। लेकिन एक गंभीर चोट के बाद उन्हें एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भारोत्तोलन की दुनिया में कदम रखा और यहां भी नए राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किए। ✨
बाद में उन्होंने कोच के रूप में भारतीय महिला भारोत्तोलन टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हंसा मनराल के मार्गदर्शन में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने विश्व भारोत्तोलन प्रतियोगिता में 5 रजत और 2 कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वहीं एशियाड चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने 3 स्वर्ण, 4 सिल्वर और 14 कांस्य पदक अपने नाम किए। 🏅🇮🇳
उनके शानदार योगदान के लिए साल 2001 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हंसा मनराल की बेटी भूमिका शर्मा भी अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डर हैं और मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं। 👑🔥
हंसा मनराल की कहानी सिर्फ खेल की नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि पहाड़ की बेटियां किसी भी क्षेत्र में इतिहास रच सकती हैं। ❤️🙌
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