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यूपी के झांसी में एक युवक की इंस्टाग्राम पर राजस्थान की युवती से दोस्ती हुई. परिवार से जिद के बाद मंदिर में उनकी शादी कराई गई. लेकिन महज छह महीने में इस कहानी का ऐसा खौ/फनाक अंत हुआ जिसने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया.
दरअसल, कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित सागर गेट बाहर एक 19 वर्षीय युवक ने फां//सी लगाकर आ/त्ह7त्या कर ली. युवक की मौ/त की खबर सुनकर पड़ोस की एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की सद/मे से मत हो गई. यह घtना पूरे इलाके में चर्चा और गम का कारण बनी हुई है.
ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के महमदपुर गुर्जर गांव में जहरीला पानी पीने से 25 भेड़ों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है. बताया जा रहा है कि कारों के पार्ट्स साफ करने वाली एक वर्कशॉप से दूषित पानी बह रहा था, जिसे पीते ही भेड़ों की तबीयत बिगड़ गई. सूचना पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची, पानी के सैंपल लिए गए, वर्कशॉप को सील किया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया.
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पेरेंटिंग कोच रेनू गिरधर का कहना है कि पेरेंट्स चाहे कितने भी गुस्से में क्यों न हों, उन्हें कुछ बातें अपने बच्चे से कभी नहीं कहनी चाहिए। सबसे पहले, ‘तुमसे तो कुछ नहीं हो पाएगा’ जैसे शब्द बच्चे के आत्मविश्वास को पूरी तरह तोड़ देते हैं। वहीं, ‘तुम अपने भाई-बहन जैसे नहीं हो’ कहकर तुलना करना बच्चे के भीतर असुरक्षा और जलन की भावना पैदा करता है। इसके अलावा, ‘तुम्हें खुद पर शर्म आनी चाहिए’ जैसी बातें बच्चे की गलती पर नहीं, बल्कि उसकी पूरी पर्सनैलिटी पर सवाल खड़े कर देती हैं। साथ ही, ‘बस बहुत हुआ, रोना बंद करो’ कहने से बच्चा अपनी भावनाओं को दबाना सीख लेता है। इसीलिए पेरेंट्स ऐसी बातें कभी न कहें। एक्सपर्ट ने यह जानकारी इंस्टाग्राम वीडियो में दी है।
लंदन के एक प्राइमरी स्कूल से सामने आया यह मामला सिर्फ धार्मिक भेदभाव तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मासूम बच्चे के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। महज तिलक लगाने की वजह से 8 साल के हिंदू बच्चे को स्कूल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे वह डर, अकेलेपन और असुरक्षा की भावना से जूझने लगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार निगरानी और स्कूल में जिम्मेदारियों से हटाए जाने के कारण बच्चा सदमे में चला गया और सामाजिक रूप से खुद को अलग करने लगा।
सामान्य स्वास्थ्य दृष्टिकोण से देखा जाए तो बचपन में इस तरह का भेदभाव, डर और सामाजिक अलगाव मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। इससे बच्चों में एंग्जायटी, आत्मविश्वास की कमी और लंबे समय तक भावनात्मक तनाव रहने का खतरा बढ़ जाता है। एक सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी माहौल बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी होता है, ताकि वे खुद को स्वीकार किया हुआ और सुरक्षित महसूस कर सकें।
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🇮🇳 Unexpected & historic 🇮🇳
26 • 26 • 26 — a rare alignment india will witness for the first time ever 🤯✨
🔹 On 26 january 2026, republic day arrives with a powerful numerical coincidence:
• 26 january
• 26th day of the year
• 76 years since india became a republic (1950 → 2026)
🇮🇳 Republic day marks the day when the constitution of india came into effect on 26 january 1950, transforming india into a sovereign, democratic republic.
This date was chosen to honor the 1930 purna swaraj declaration, symbolizing complete independence and self-rule.
🕊 Some moments feel symbolic… some feel destined.
This rare 26•26•26 alignment reminds us of india’s journey —
From freedom to framework,
From struggle to strength,
From vision to values.
A nation built on law, unity, and democracy 🇮🇳
UPSC जैसी परीक्षा में एक बार सफल होना भी कई लोगों का सपना रह जाता है, लेकिन झारखंड की रोमा श्रीवास्तव ने हार मानने के बजाय अपने लक्ष्य को और मजबूती से पकड़ा. उन्होंने चार बार UPSC का प्रयास किया और तीन बार चयनित हुईं. हर बार मिली सर्विस उनके लिए एक पड़ाव थी, मंजिल नहीं.
2016 में पहला अटेम्प्ट असफल रहा. 2017 में उन्होंने परीक्षा क्लियर की और इंडियन पोस्ट एंड टेलीकॉम सर्विस मिली. 2018 में फिर से सफलता मिली और इस बार IPS बनीं. लेकिन रोमा का सपना IAS बनने का था, इसलिए उन्होंने रुकने के बजाय एक बार फिर तैयारी की. आखिरकार 2019 में चौथे प्रयास में 70वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया.
इस पूरे सफर में रोमा ने कोचिंग पर नहीं, बल्कि सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया. किताबें, नोट्स और YouTube उनके सबसे बड़े साथी बने. इंजीनियरिंग, MBA और कॉरपोरेट जॉब छोड़कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल खुद रास्ता दे देती है.
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