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कॉलेज के दिनों का एक छोटा सा प्रोजेक्ट आज 18 करोड़ रुपए के विशाल बिजनेस साम्राज्य में तब्दील हो चुका है। वाराणसी के वैभव जायसवाल और असम के अमरदीप बर्धन ने साल 2011 में MBA की पढ़ाई के दौरान ऐरिका पाम की गिरी हुई सूखी पत्तियों से बर्तन बनाने का अनोखा आइडिया सोचा था। कॉलेज के बिजनेस कॉम्पिटिशन में पहला इनाम जीतने के बाद दोनों ने नौकरी के साथ-साथ इस पर काम जारी रखा और 2012 में महज 20 हजार रुपए की पूंजी से 'प्रकृति' ब्रांड की नींव रखी। शुरुआत में लोकल कैटरर्स और इवेंट्स को पत्तों की प्लेटें बेचीं, जिससे पहले ही साल 6 लाख की कमाई हुई। आगे चलकर तमिलनाडु में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया और दोनों ने अपनी-अपनी नौकरियां छोड़कर पूरी तरह इस काम की कमान संभाल ली। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी पेड़ को नुकसान पहुंचाए बिना, केवल कुदरती रूप से गिरी सूखी पत्तियों को धोकर, सुखाकर और बिना केमिकल हीट-कंप्रेस करके प्लेट, कटोरी, मग जैसे 70 से ज्यादा इको-फ्रेंडली बर्तन तैयार किए जाते हैं। आज यह कारोबार अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत 18 देशों में फैला हुआ है, जिसने पर्यावरण बचाने के साथ-साथ 140 से ज्यादा लोगों, खासकर स्थानीय महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया है।