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Laos eVisa Online 🇱🇦
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चौपाई
कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ सम संकट भारी॥
भावार्थ
(जानकी जी ने कहा-) हे तात! मेरा प्रणाम निवेदन करना और इस प्रकार कहना- हे प्रभु! यद्यपि आप सब प्रकार से पूर्ण काम हैं (आपको किसी प्रकार की कामना नहीं है), तथापि दीनों (दुःखियों) पर दया करना आपका विरद है (और मैं दीन हूँ) अतः उस विरद को याद करके, हे नाथ! मेरे भारी संकट को दूर कीजिए॥

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Guilt Free Masala Suji Croissant ; A Perfect Light Breakfast | Healthy Masala Suji Ka Nashta

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👉Required Ingre****nts

For the Filling

1 tsp oil
½ tsp cumin seeds
½ tsp crushed coriander seeds
½ tsp fennel seeds
1 small onion, finely chopped
2 green chilies, finely chopped
¼ tsp turmeric powder
½ tsp red chili powder
½ tsp roasted cumin powder
½ tsp chili flakes
1 tsp chaat masala
3 medium boiled potatoes, mashed
½ tsp salt (adjust to taste)
2 tsp fresh coriander leaves, chopped

For the Dough

1 cup semolina (sooji)
½ tsp salt
Hot water (for kneading the dough)

For the Tadka (Tempering)

1 tsp oil
½ tsp cumin seeds
½ tsp mustard seeds
4–5 curry leaves
3 green chilies, finely chopped
½ tsp chaat masala
½ tsp chili flakes
1 tsp fresh coriander leaves, chopped

👉 Required Ingre****nts for Peanut Chutney

1 medium tomato
1 small onion
2–3 garlic cloves
3 Kashmiri whole red chilies (for color) or 1 tsp Kashmiri red chili powder
2–3 whole red chilies (for spice)
2 tsp peanuts
1 tsp cumin seeds
½ tsp salt
Juice of ½ lemon
1 tsp oil (for roasting)
Extra oil (for tempering)
Curry leaves (for tempering)
1 whole red chili (for tempering)

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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत और अमर बलिदानी मंगल पाण्डेय की पुण्यतिथि (8 अप्रैल) पर शत-शत नमन। उन्होंने बैरकपुर में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत कर, चर्बी वाले कारतूसों के विरोध में क्रांति की पहली चिंगारी जलाई थी। मातृभूमि के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान युगों-युगों तक राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता रहेगा।
#ब्राह्मण #brahman #mangalpandey

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एक बार अयोध्या में राघवेंद्र भगवान श्रीराम ने अपने पितरों का श्राद्ध करने के लिए ब्राह्मण-भोजन का आयोजन किया । भगवान शंकर को जब यह मालूम हुआ तो वे कौतुहलवश एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप धर कर ब्राह्मणों की टोली में शामिल होकर वहां पहुंच गए और श्रीरामजी से बोले—‘मुझे भी भोजन करना है।’ अन्तर्यामी भगवान श्रीराम बूढ़े ब्राह्मण को पहचान गए और समझ गए कि भगवान शंकर ही मेरी परीक्षा करने यहां पधारे हैं । ब्राह्मण-भोजन के लिए जैसे ही पंगत पड़ी, भगवान श्रीराम ने स्वयं उस वृद्ध ब्राह्मण के चरणों को अपने करकमलों से धोया और आसन पर बिठाकर भोजन-सामग्री परोसना शुरु कर दिया । छोटे भाई लक्ष्मणजी भगवान शंकर को जो भी वस्तु परोसते, शंकरजी उसे एक ही ग्रास में खत्म कर देते । उनकी पत्तल पर कोई सामान बचता ही नहीं था । सभी परोसने वाले उस बूढ़े ब्राह्मण की पत्तल में सामग्री भरने में लग गए, पर पत्तल तो खाली-की-खाली ही नजर आती। श्रीरामजी मन-ही-मन मुस्कराते हुए शंकरजी की यह लीला देख रहे थे।
भोजन समाप्त होते देख महल में चिंता होने लगी गयी । माता सीता के पास भी यह समाचार पहुंचा कि श्राद्ध में एक ऐसे वृद्ध ब्राह्मण पधारे हैं, जिनकी पत्तल पर सामग्री परोसते ही साफ हो जाती है। श्राद्ध में आमन्त्रित सभी ब्राह्मणों को भोजन कराना भगवान श्रीराम की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया। माता सीता भी चिन्तित होने लगीं।
जब बनाया गया सारा भोजन समाप्त हो गया फिर भी शंकरजी तृप्त नहीं हुए तो श्रीराम ने माता अन्नपूर्णा का स्मरण कर उनका आह्वान किया । सभी परोसने वाले व्यक्ति वहां से हटा दिये गये । माता अन्नपूर्णा वहां प्रकट हो गयीं ।
श्रीरामजी ने माता अन्नपूर्णा से कहा—‘अपने स्वामी को आप ही भोजन कराइए, इन्हें आपके अतिरिक्त और कोई तृप्त नहीं कर सकता है ।’
मां अन्नपूर्णा ने जब अपने हाथ में भोजन पात्र लिया तो उसमें भोजन अक्षय हो गया । अब वे स्वयं विश्वनाथ को भोजन कराने लगीं । मां अन्नपूर्णा ने पत्तल में एक लड्डू परोसा । भगवान विश्वनाथ खाते-खाते थक गये पर वह समाप्त ही नहीं होता था । मां ने दोबारा परोसना चाहा तो भगवान शंकर ने मना कर दिया । शंकरजी हंसते हुए डकार लेने लगे और बोले—‘तुम्हें आना पड़ा, अब तो मैं तृप्त हो गया ।’
जय प्रभु जगन्नाथ जी 🌹🙏🌹 जय माता अन्नपूर्णा जी

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