पिता ही वह मजबूत सेतु होता हैं,
जिसके सहारे बच्चे अपने सपनों से निकलकर
हकीकत की मंजिल तक पहुँचते हैं।
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पिता ही वह मजबूत सेतु होता हैं,
जिसके सहारे बच्चे अपने सपनों से निकलकर
हकीकत की मंजिल तक पहुँचते हैं।
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*।।गुरुमंत्र का प्रभाव।।*
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.....'स्कन्द पुराण' के ब्रह्मोत्तर खण्ड में कथा आती हैः काशी नरेश की कन्या कलावती के साथ मथुरा के दाशार्ह नामक राजा का विवाह हुआ। विवाह के बाद राजा ने अपनी पत्नी को अपने पलंग पर बुलाया परंतु पत्नी ने इन्कार कर दिया। तब राजा ने बल-प्रयोग की धमकी दी।
पत्नी ने कहाः "स्त्री के साथ संसार-व्यवहार करना हो तो बल-प्रयोग नहीं, स्नेह-प्रयोग करना चाहिए। नाथ ! मैं आपकी पत्नी हूँ, फिर भी आप मेरे साथ बल-प्रयोग करके संसार-व्यवहार न करें।"
🌼आइए जानते हैं 51 शक्तिपीठों के बारे में..🌼
आदिशक्ति मां के 51 शक्तिपीठों की उपासना अनादिकाल से की जा रही है। धर्मग्रंथों के अनुसार 51 शक्तिपीठों की यात्रा मनोवांछित फल प्रदान करती है। तो आज हमारे साथ आप भी पढ़िये पवित्र 51 शक्तिपीठों का वर्णन और मांग लीजिए आदिशक्ति से अपनी मन की मुराद।
1.विमला-भुवनेश्वरी शक्तिपीठ- यहां सती का किरीट गिरा था..यह पावन स्थल किरीट में स्थित है.. यहां की शक्ति विमला यानि भुवनेश्वरी हैं और यहां भैरव संवर्त रूप में विराजमान हैं।
2.उमा शक्तिपीठ- यहां सती का केशपाश गिरा था..यह स्थल वृंदावन में अवस्थित है.. यहां की शक्ति देवी कात्यायनी हैं और भैरव भूतेश रूप में विराजमान हैं..
3.महिषमर्दिनी शक्तिपीठ- यहां सती का त्रिनेत्र गिरा था..यह पावन स्थली महाराष्ट्र के कोल्हापुर करवीर में अवस्थित है…यहां की शक्ति महालक्ष्मी हैं और यहां भैरव क्रोधीश रूप में विराजमान हैं..
4.श्रीसुंदीरी शक्तिपीठ- यहां माता सती का दक्षिण तल्प यानि कनपटी गिरा था..यह पावन स्थान श्रीपर्वत में है.. यहां की शक्ति श्री सुन्दरी हैं और भैरव सुन्दरानन्द रूप में विराजमान हैं…
5. विशालाक्षी शक्तिपीठ- यहां माता सती के कर्ण-मणि गिरे थे। यह पावन स्थान उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है …यहां की शक्ति विशालाक्षी और भैरव काल भैरव हैं।
20 जून/इतिहास-स्मृति
पंडित बीरबल धर का श्रीनगर प्रवेश
भारत के नंदनवन कश्मीर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। किसी समय काशी से भी अधिक महत्व होने के कारण पूरे देश से छात्र यहां पढ़ने आते थे। फिर वह समय भी आया जब आतंकवादियों ने कश्मीर घाटी से हिन्दुओं को उजाड़ दिया; पर कश्मीर का यह इस्लामीकरण एक दिन में नहीं हुआ। शाहमीर के शासन से लेकर अफगान सूबेदार आजिम खान तक यह चलता रहा। इस दमन और धर्मान्तरण की प्रक्रिया का ही यह प्रसंग है।