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'स्त्री 2' की बड़ी कामयाबी के बाद श्रद्धा कपूर अपनी अगली बड़ी फ़िल्म 'ईथा' के साथ लौट रही हैं। ये फ़िल्म महाराष्ट्र की मशहूर तमाशा और लावणी कलाकार विठाबाई भाऊ मांग नारायणगांवकर की ज़िंदगी पर बनी है।
फ़िल्म को 'छावा' बनाने वाले लक्ष्मण उतेकर ने डायरेक्ट किया है और दिनेश विजान की Maddock Films ने बनाया है। श्रद्धा के साथ रणदीप हुड्डा भी अहम रोल में हैं। टीज़र में श्रद्धा के नौवारी साड़ी वाले लुक और लावणी डांस की काफ़ी तारीफ़ हुई थी।
फ़ीस को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस फ़िल्म के लिए श्रद्धा को करीब 15 करोड़ रुपये मिले हैं। इसे उनकी अब तक की सबसे बड़ी फ़ीस बताया जा रहा है। हालांकि न श्रद्धा ने और न ही मेकर्स ने इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि की है।
पहले ये फ़िल्म 28 अगस्त को आनी थी, लेकिन अब 4 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। बॉक्स ऑफ़िस पर इसका मुक़ाबला प्रभास की 'फ़ौजी' और अक्षय कुमार-विद्या बालन की एक बिना नाम वाली फ़िल्म से होगा।
अब देखना ये है कि 'ईथा' बॉक्स ऑफ़िस पर 'स्त्री 2' जैसा कमाल दोहरा पाती है या नहीं। 🎬✨
Bigg Boss 20 में YouTuber स्काउट (Tanmay Singh) इस हफ़्ते सबसे ज़्यादा चर्चा में हैं। लव गिल से उनकी नज़दीकी और गर्लफ़्रेंड काश्वी हीरानंदानी के आरोपों के बाद अब उनके शो छोड़ने की ख़बरें social media पर तेज़ी से फैल रही हैं।
Weekend Ka Vaar के promo में सलमान खान ने स्काउट से पूछा कि जिसे वो बहन जैसी दोस्त कहते हैं, उसका बचाव गर्लफ़्रेंड के सामने क्यों नहीं कर पाए। सलमान ने कहा, "अगर आपने फ़र्ज़ी commitment दिया है, then आपसे घटिया आदमी कोई नहीं।"
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इस फटकार के बाद स्काउट ने शो छोड़ने की बात कही। लेकिन जब उन्हें contract में लिखी भारी exit penalty याद दिलाई गई, तो उन्होंने अपना फ़ैसला बदल लिया।
हालांकि चैनल या शो की तरफ़ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, और promo में भी शो छोड़ने का कोई ज़िक्र नहीं है।
स्काउट सच में बाहर जाना चाहते थे या ये सिर्फ़ अफ़वाह है, ये Weekend Ka Vaar एपिसोड में ही साफ़ होगा। 📺🤔
28 अक्टूबर को Jio Platforms की शेयर बाज़ार में लिस्टिंग के मौक़े पर पूरा अंबानी परिवार NSE पहुंचा था। वहां भाषणों और भावुक पलों के बीच ईशा अंबानी का एक छोटा सा नेकलेस भी लोगों की नज़र में आ गया, जो क़ीमत से ज़्यादा अपने मतलब की वजह से ख़ास है।
लाल सूट में मुस्कुराती ईशा के गले में एक नाज़ुक सा नेकलेस था। उस पर तीन नाम लिखे हैं: आदिया, कृष्णा और आनंद। आदिया और कृष्णा उनके जुड़वां बच्चे हैं, और आनंद पीरामल उनके पति।
ईशा और आनंद की शादी दिसंबर 2018 में मुंबई में हुई थी। नवंबर 2022 में दोनों जुड़वां बच्चों, बेटी आदिया और बेटे कृष्णा, के माता-पिता बने।
ये नेकलेस किसने बनाया, इसमें हीरे लगे हैं या नहीं और इसकी क़ीमत क्या है, इस पर अंबानी परिवार ने कुछ नहीं कहा है।
इतने बड़े परिवार से होने के बावजूद ईशा ने अपने सबसे क़रीबी रिश्तों को गले से लगाकर रखा है, और लोगों को यही बात सबसे प्यारी लग रही है। ❤️💎
बॉलीवुड के 'कॉमेडी किंग' कहे जाने वाले जॉनी लीवर का ये मशहूर नाम असल में एक फ़ैक्ट्री की देन है।
आंध्र प्रदेश में जन्मे जॉन प्रकाश राव जनुमाला मुंबई के धारावी इलाक़े में पले-बढ़े। उनके पिता हिंदुस्तान लीवर के प्लांट में operator थे। करीब 18 साल की उम्र में जॉन भी पिता के साथ वहीं काम करने लगे।
फ़ैक्ट्री में काम के साथ-साथ वो mimicry भी करते थे। कंपनी के एक function में उन्होंने कुछ बड़े अफ़सरों की नक़ल उतारी, तो किसी की हंसी नहीं रुकी। उसी दिन से साथी मज़दूरों ने उन्हें "जॉनी लीवर" कहना शुरू कर दिया।
एक पुराने interview में उन्होंने बताया था कि वहां उन्होंने करीब 6 साल काम किया, और "from there, I got the name Lever" (वहीं से मुझे 'लीवर' नाम मिला)। बाद में स्टेज शो से कमाई बढ़ी तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी, लेकिन नाम वही रहा।
वो कंपनी आज हिंदुस्तान यूनिलीवर के नाम से जानी जाती है, पर जॉनी लीवर के नाम में पुराना "लीवर" आज भी ज़िंदा है। फ़ैक्ट्री से बॉलीवुड तक का ये सफ़र मेहनत और हुनर की सच्ची मिसाल है। 🙏😄
NMACC में किताबों का एक नया ठिकाना खुलने जा रहा है, 'द लाइब्रेरी'। इसके launch पर नीता अंबानी बेज कलर के सूट में पहुंचीं, लेकिन सबकी नज़र उनके कोट पर लगे एक चमकीले ड्रैगनफ़्लाई पर जाकर रुक गई।
ये ब्रोच हांगकांग के जाने-माने ज्वेलरी कलाकार वॉलेस चैन की कृति 'Soaring Spirit' है। बताया जाता है कि ये ड्रैगनफ़्लाई उन्हें सपने में दिखी थी, और उसे असल गहने में ढालने में पूरे 10 साल लग गए। इस दौरान उन्होंने कई तरह के मटीरियल और तरीक़े आज़माए, और ज़रूरत पड़ी तो अपने औज़ार भी ख़ुद बनाए। 2017 में ये ब्रोच पहली बार दुनिया के सामने आया था।
इसमें हीरे, रूबी, गुलाबी नीलम और हरे रत्न जड़े गए हैं, और इसकी बॉडी टाइटेनियम से बनी है, जो पहनने वाले के साथ-साथ हिलती है। कलाकार के मुताबिक़ इसके पंख गिनती सिखाने वाले मोतियों के फ्रेम जैसे बनाए गए हैं, क्योंकि उनकी नज़र में ये ड्रैगनफ़्लाई हर बार पंख फड़फड़ाकर वक़्त गिनती है।
सोशल मीडिया पर इसकी क़ीमत को लेकर कई बड़े-बड़े आंकड़े घूम रहे हैं, लेकिन इस ब्रोच की कोई आधिकारिक क़ीमत सामने नहीं आई है।
वैसे किताबों के नए घर के launch पर सपनों से निकली एक कहानी पहनकर पहुंचना, अपने आप में एक ख़ूबसूरत बात है। 📚✨
बिहार के मोकामा में होमगार्ड जवान विकास कुमार ने अदम्य साहस और इंसानियत की मिसाल पेश की है। गंगा नदी की तेज धारा में डूब रही बांका की महिला हिंगला देवी को बचाने के लिए विकास कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना वर्दी में ही नदी में छलांग लगा दी और महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बताया जाता है कि घटना मोकामा के तपस्वी घाट की है। महिला गंगा नदी में डूबने लगी थीं। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात विकास कुमार की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी और अपनी बहादुरी से महिला की जान बचा ली।
इस साहसिक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बिहार पुलिस ने भी जवान के अदम्य साहस की सराहना की है। बाढ़ SDPO रामकृष्ण ने विकास कुमार को फोन कर बधाई दी और कहा कि उनके इस कार्य से पूरे पुलिस बल का मान-सम्मान बढ़ा है।
SDPO ने बताया कि विकास कुमार को सम्मानित करने के लिए वरीय पुलिस अधीक्षक से अनुशंसा की गई है। साथ ही उनके असाधारण साहस को देखते हुए अगले वर्ष राष्ट्रपति जीवन रक्षा पदक के लिए भी नामांकन की अनुशंसा की जाएगी।
बता दें कि विकास कुमार बाढ़ अनुमंडल के बेलछी प्रखंड स्थित गोपालपुर गांव के रहने वाले हैं। उनकी बहादुरी की चर्चा अब बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में हो रही है।
वर्दी का फर्ज निभाते हुए इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश करने वाले विकास कुमार को सलाम! ❤️
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बिहार के बेगूसराय से गंगा नदी में हुए नाव हादसे की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल भावुक हो सकता है। बुधवार शाम चमथा रजौली दियारा से लौट रही एक नाव अचानक नदी में डूब गई। इस हादसे में लापता दो लोगों के शव गुरुवार को बरामद किए गए। मृतकों में 50 वर्षीय सोगारथ महतो और 12 वर्षीय रीना कुमारी उर्फ रावो शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि नाव की क्षमता करीब 15 लोगों की थी, लेकिन उस पर इससे कहीं अधिक लोग सवार थे। नाव कुछ दूर आगे बढ़ी ही थी कि एक युवक के पानी में कूदने के बाद उसका संतुलन बिगड़ गया। नाव एक तरफ झुक गई और धीरे-धीरे उसमें पानी भरने लगा। देखते ही देखते नाव नदी में डूब गई।
इस हादसे में सबसे दर्दनाक कहानी मन्नुता देवी की सामने आई है। उन्होंने बताया कि वह अपने पति और बेटी के साथ दियारा से घर लौट रही थीं। नाव पर अधिक लोगों को बैठाने को लेकर उन्होंने पहले ही आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। हादसे के दौरान उनके पति नाव के नीचे फंस गए। वह उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ना चाहती थीं, लेकिन दूसरे यात्रियों ने उन्हें रोक लिया। इस घटना में उनके पति की जान चली गई, जबकि उनकी बेटी किसी तरह तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रही।
दूसरी ओर, बबीता देवी की कहानी भी बेहद दुखद है। वह अपनी बेटी के साथ नाव पर सवार थीं। नाव का संतुलन बिगड़ने पर उन्होंने बेटी को बचाने की कोशिश की, लेकिन दूसरे लोगों ने उन्हें अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी। अगले दिन उनकी बेटी का शव बरामद हुआ।
हालांकि इस हादसे में कुछ लोगों ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत से जान बचाई। नाव पर सवार करीना नाम की बच्ची ने बताया कि जब नाव डूबने लगी तो उसने भी नदी में छलांग लगा दी। तैरते हुए वह कम गहराई वाले हिस्से तक पहुंची और एक खंभे का सहारा लेकर सुरक्षित बच गई।
इस घटना के बाद गांव के लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि चमथा रजौली के लोगों को खेती और मजदूरी के लिए रोजाना गंगा पार दियारा जाना पड़ता है। लेकिन सुरक्षित आवागमन के लिए अब तक पक्के पुल की व्यवस्था नहीं हो सकी है। चुनाव के दौरान पुल बनाने के वादे जरूर किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक उनकी समस्या आज भी बनी हुई है।
ग्रामीणों ने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और दियारा क्षेत्र में पुल निर्माण कराने की मांग की है।
NDRF-SDRF के अभियान में मिले दोनों शव
हादसे के बाद बुधवार शाम SDRF की टीम ने तलाश अभियान शुरू किया था। अंधेरा होने के कारण पहले दिन दोनों लापता लोगों का पता नहीं चल सका। गुरुवार सुबह NDRF की टीम भी पहुंची। इसके बाद संयुक्त अभियान चलाकर दोनों के शव बरामद किए गए।
यह घटना सिर्फ एक नाव हादसा नहीं, बल्कि उन लोगों की रोजमर्रा की परेशानी भी सामने लाती है, जिन्हें अपनी रोजी-रोटी के लिए हर दिन नदी पार करनी पड़ती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे के बाद दियारा के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल पाएगी?
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