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नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर॥
अमर महाकाव्य 'श्रीरामचरितमानस' के रचयिता, भक्तिधारा के महान कवि, 'पूज्यपाद' गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जयंती पर कोटि-कोटि नमन एवं प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई।
उन्होंने अपनी दिव्य कृतियों के माध्यम से प्रभु श्री राम के आदर्शों, सनातन संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों के अमृत संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। उनका कालजयी साहित्य लोकमंगल का शाश्वत पथप्रदर्शक है।

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ਮੰਤਰੀ ਅਮਨ ਅਰੋੜਾ ਨੇ Software Technology Parks of India Mohali ਤੇ DCM Young Entrepreneurs School ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਸਮਝੌਤਾ
ਕਿਹਾ- ''STPI ਨਾਲ ਸਮਝੌਤੇ ਤਹਿਤ ਮੋਹਾਲੀ ਵਿਖੇ ਸਟਾਰਟਅੱਪ ਪੰਜਾਬ ਹੱਬ ਨਿਓਰੋਨ 2.0 ਵਿਕਸਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ''
#cabinetminister #amanarora #punjab #aap #punjabgovernment #mous

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ਮੰਤਰੀ ਅਮਨ ਅਰੋੜਾ ਨੇ Software Technology Parks of India Mohali ਤੇ DCM Young Entrepreneurs School ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਸਮਝੌਤਾ
ਕਿਹਾ- ''STPI ਨਾਲ ਸਮਝੌਤੇ ਤਹਿਤ ਮੋਹਾਲੀ ਵਿਖੇ ਸਟਾਰਟਅੱਪ ਪੰਜਾਬ ਹੱਬ ਨਿਓਰੋਨ 2.0 ਵਿਕਸਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ''
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ਮੰਤਰੀ ਅਮਨ ਅਰੋੜਾ ਨੇ Software Technology Parks of India Mohali ਤੇ DCM Young Entrepreneurs School ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਸਮਝੌਤਾ
ਕਿਹਾ- ''STPI ਨਾਲ ਸਮਝੌਤੇ ਤਹਿਤ ਮੋਹਾਲੀ ਵਿਖੇ ਸਟਾਰਟਅੱਪ ਪੰਜਾਬ ਹੱਬ ਨਿਓਰੋਨ 2.0 ਵਿਕਸਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ''
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उत्तर प्रदेश की दरोगा बिटिया अस्मिता की कहानी उन्हीं की जुबानी
राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली बेटी
खेलपथ संवाद
लखनऊ। भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो खेल में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। अस्मिता का यहां तक पहुंचने और मुश्किलों पर फतह पाने का सफर बेहद भावुक और प्रेरणादायक है।

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उत्तर प्रदेश की दरोगा बिटिया अस्मिता की कहानी उन्हीं की जुबानी
राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली बेटी
खेलपथ संवाद
लखनऊ। भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो खेल में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। अस्मिता का यहां तक पहुंचने और मुश्किलों पर फतह पाने का सफर बेहद भावुक और प्रेरणादायक है।

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उत्तर प्रदेश की दरोगा बिटिया अस्मिता की कहानी उन्हीं की जुबानी
राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली बेटी
खेलपथ संवाद
लखनऊ। भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो खेल में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। अस्मिता का यहां तक पहुंचने और मुश्किलों पर फतह पाने का सफर बेहद भावुक और प्रेरणादायक है।

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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के 21 वर्षीय सूर्या तिवारी ने अपनी मेहनत से एक बड़ी मिसाल कायम की है। उन्होंने करीब डेढ़ साल की तैयारी में 13 सरकारी नौकरियां हासिल कीं।
सूर्या ने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। वह रोज करीब 7 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उनके पास लैपटॉप खरीदने के पैसे नहीं थे, ऐसे में एक दोस्त ने उन्हें अपना लैपटॉप दे दिया।
बीएससी पूरी करने के बाद उन्होंने अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की और लगातार सफलता हासिल करते गए। उनकी उपलब्धियों में केंद्रीय सचिवालय में ASO, एम्स दिल्ली में प्रशासनिक अधिकारी, रेलवे में स्टेशन मास्टर और टीटी तथा दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर जैसे पद शामिल हैं।
किसान परिवार से आने वाले सूर्या की कहानी बताती है कि सीमित साधनों के बावजूद मेहनत, सही रणनीति और परिवार-दोस्तों के सहयोग से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
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