Знакомьтесь сообщенийИзучите увлекательный контент и разнообразные точки зрения на нашей странице «Обнаружение». Находите свежие идеи и участвуйте в содержательных беседах
मेरे जिंदगी में दुख ही दुख है...
मैं अपनी बेटी को लेकर बहुत चिंतित हूँ...
हर माँ यही चाहती है कि उसकी बेटी खुश रहे, सुरक्षित रहे और उसका भविष्य उज्जवल हो।
*
कभी-कभी हालात साथ नहीं देते, लोग समझते नहीं, पर फिर भी मैं हार नहीं मानूंगी
मुझे आपकी सपोर्ट और दुआओं की बहुत जरूरत है। आपका एक अच्छा शब्द मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता है।
कृपया मुझे और मेरी बेटी को अपना सपोर्ट और प्यार दीजिए
मैं एक गरीब घर की बहू हूँ, लेकिन मेरे सपने बड़े हैं... मैं मेहनत कर रही हूँ, एक बेहतर कल के लिए। आप सबका साथ मिला तो सब संभव है!
दोस्तों गरीब मजबूर को मदद जरूरमेरे जिंदगी में दुख ही दुख है...
मैं अपनी बेटी को लेकर बहुत चिंतित हूँ...
हर माँ यही चाहती है कि उसकी बेटी खुश रहे, सुरक्षित रहे और उसका भविष्य उज्जवल हो।
*
कभी-कभी हालात साथ नहीं देते, लोग समझते नहीं, पर फिर भी मैं हार नहीं मानूंगी
मुझे आपकी सपोर्ट और दुआओं की बहुत जरूरत है। आपका एक अच्छा शब्द मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता है।
कृपया मुझे और मेरी बेटी को अपना सपोर्ट और प्यार दीजिए
मैं एक गरीब घर की बहू हूँ, लेकिन मेरे सपने बड़े हैं... मैं मेहनत कर रही हूँ, एक बेहतर कल के लिए। आप सबका साथ मिला तो सब संभव है
#onthisday in 2004, Rajyavardhan Singh Rathore created history at the Athens Olympics! 🥈
स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता एवं राजनयिक
#विजयलक्ष्मी_पंडित (18 अगस्त 1900 - 1 दिसंबर 199 जयंती पर सादर नमन।
• वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहीं और तीन बार कारावास झेला।
• 1937 में संयुक्त प्रांत की विधान सभा के लिए निर्वाचित होकर स्थानीय स्वशासन एवं जन स्वास्थ्य मंत्री बनीं।
• वे पूर्व-स्वतंत्र भारत में कैबिनेट पद संभालने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
• स्वतंत्रता के बाद उन्होंने सोवियत संघ, अमेरिका, मेक्सिको, स्पेन और आयरलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व किया। • 1953 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के आठवें सत्र की अध्यक्ष चुनी गईं और यह पद संभालने वाली पहली महिला बनीं।
नगर निगम की राजपुरा स्थित गौशाला का औचक निरीक्षण कर चल रहे निर्माण कार्य देखा एवं अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए, निरीक्षण के अंत में मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में यह कहा गया कि :
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
चारे, पानी और दवाइयों की व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
हर एक कर्मचारी अपनी डयूटी को नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र सेवा भाव मानकर निभाए।
गौवंश की सेवा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर परोपकार और आस्तिकता से जुड़ी है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह एक नैतिक अपराध भी है, क्योंकि "इस सेवा और कर्मों का हिसाब हमें ऊपर वाले (ईश्वर) को भी देना होता है।"
नगर निगम की राजपुरा स्थित गौशाला का औचक निरीक्षण कर चल रहे निर्माण कार्य देखा एवं अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए, निरीक्षण के अंत में मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में यह कहा गया कि :
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
चारे, पानी और दवाइयों की व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
हर एक कर्मचारी अपनी डयूटी को नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र सेवा भाव मानकर निभाए।
गौवंश की सेवा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर परोपकार और आस्तिकता से जुड़ी है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह एक नैतिक अपराध भी है, क्योंकि "इस सेवा और कर्मों का हिसाब हमें ऊपर वाले (ईश्वर) को भी देना होता है।"
नगर निगम की राजपुरा स्थित गौशाला का औचक निरीक्षण कर चल रहे निर्माण कार्य देखा एवं अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए, निरीक्षण के अंत में मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में यह कहा गया कि :
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
चारे, पानी और दवाइयों की व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
हर एक कर्मचारी अपनी डयूटी को नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र सेवा भाव मानकर निभाए।
गौवंश की सेवा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर परोपकार और आस्तिकता से जुड़ी है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह एक नैतिक अपराध भी है, क्योंकि "इस सेवा और कर्मों का हिसाब हमें ऊपर वाले (ईश्वर) को भी देना होता है।"
नगर निगम की राजपुरा स्थित गौशाला का औचक निरीक्षण कर चल रहे निर्माण कार्य देखा एवं अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए, निरीक्षण के अंत में मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में यह कहा गया कि :
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
चारे, पानी और दवाइयों की व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
हर एक कर्मचारी अपनी डयूटी को नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र सेवा भाव मानकर निभाए।
गौवंश की सेवा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर परोपकार और आस्तिकता से जुड़ी है। इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह एक नैतिक अपराध भी है, क्योंकि "इस सेवा और कर्मों का हिसाब हमें ऊपर वाले (ईश्वर) को भी देना होता है।"