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उत्तर प्रदेश के मेरठ की पहचान बन चुके पारंपरिक गजक को अब दुनिया भर में आधिकारिक पहचान मिल गई है। करीब 121 साल पुराने इस कारोबार को जियोग्राफिक इंडिकेशन (GI) टैग प्रदान किया गया है।
यह उपलब्धि मेरठ के कारीगरों, व्यापारियों और पीढ़ियों से इस मिठास को संजोए रखने वालों के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। मेरठ रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों से यह सफलता मिली है।
GI टैग मिलने के बाद अब गजक सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि मेरठ की सांस्कृतिक विरासत के रूप में वैश्विक मंच पर दर्ज हो गई है। इससे न सिर्फ नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि इस कारोबार से 10 हजार से अधिक लोगों की आजीविका सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।
थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न (राम दशम) दुनिया के सबसे अमीर शाही शासक माने जाते हैं, जिनकी कुल संपत्ति का अनुमान करीब 50 अरब डॉलर (लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये) है। उनके लग्जरी बेड़े में 300 से ज्यादा कारें, 38 प्राइवेट जेट और 52 सोने की नावें शामिल हैं।
राजा की कमाई का मुख्य जरिया थाईलैंड भर में फैली उनकी 40,000 से अधिक रेंटल प्रॉपर्टीज हैं, जो लगभग 16,210 एकड़ जमीन पर बनी हैं। इसके अतिरिक्त, सियाम कमर्शियल बैंक में उनकी 23% और सियाम सीमेंट ग्रुप में 33% हिस्सेदारी है, जो उनकी आय का बड़ा स्रोत है। 2018 में उन्होंने शाही संपत्तियों की देखरेख करने वाली संस्था 'क्राउन प्रॉपर्टी ब्यूरो' का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।
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ये हैं गोरखा रेजिमेंट के वीर जवान विष्णु सेठ जो चलती ट्रेन में एक लड़की की आबरू बचाने के लिए अकेले ही 40 लुटेरों से भीड़ गए और लड़की को बचा लिया। घटना के दौरान विष्णु सेठ ने अकेले दम पर लुटेरों से भिड़ते हुए 8 लुटेरों को घायल किया और 3 लुटेरों को मार गिराया, जबकि बाकी लुटेरे जान बचाकर भाग गए।
यह घटना तब हुई जब ट्रेन में सवार 18 साल की लड़की पर लुटेरों ने हमला करने की कोशिश की। विष्णु सेठ, जो संयोग से उसी ट्रेन में यात्रा कर रहे थे, बिना किसी डर के लुटेरों से भिड़ गए। उन्होंने एकेले ही 8 लुटेरों को घायल किया और 3 लुटेरों को मार गिराया, जब लुटेरों ने देखा की अकेला सेना का जवान हम सब पर भारी पड़ रहा है तो बाकी लुटेरे जान बचाकर भाग गए। उनकी वीरता और सूझबूझ ने न केवल लड़की को बचाया बल्कि यात्रियों को भी सुरक्षित रखा।
भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर के डोडा ज़िले में गाँव वालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। सेना ने इनका नाम गांव रक्षा गार्ड्स रखा है। इस प्रोग्राम में हथियार चलाने, आत्मरक्षा और बेसिक लड़ाई के हुनर पर ध्यान दिया जा रहा है। VDG को अपने गाँवों की निगरानी और सुरक्षा की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इससे स्थानीय सुरक्षा मज़बूत होगी।
इस प्रशिक्षण के लिए डोडा शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित उन गांवों के निवासियों को चुना गया जो 1990 के दशक के मध्य में चिनाब घाटी क्षेत्र में उग्रवाद के चरम के दौरान सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से थे, जिसमें वर्तमान किश्तवार, डोडा और रामबन जिले शामिल हैं।
आपको ये भी बता दे इससे पहले जम्मू-कश्मीर के हिंदू इलाकों में 1990 के समय में गांववालों को हथियार दिए गए थे. अब एक बार फिर यहां गांववालों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के साथ बंदूक थमाई जा रही है. उन्हें बंकर बनाने की भी ट्रेनिंग दी गई है।
1990 के दशक में आतंकी घटनाएं बढ़ने से कश्मीर से बढ़ी संख्या में पंडितों का पलायन हुआ था. तब एक खतरा पैदा हो गया था कि चिनाब वैली (जम्मू संभाग) में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू लोग भी कहीं चिनाब, डोडा आदि जगहों से पलायन न करने लगें. वहां भी मुस्लिम आबादी ज्यादा रहती है।
ऐसे में एक अफसर ने रणनीति के तहत गांववालों को प्रशिक्षण देकर हथियार देने शुरू कर दिए. इससे गांववालों में न सिर्फ सुरक्षा का भरोसा जगा बल्कि हथियार से ताकत भी मिली. अब एक बार फिर कश्मीर में सेना गांववालों को हथियार दे रही है
क्वार्टर फाइनल दौर में पहुंची नौवीं एलीट महिला-पुरुष राष्ट्रीय मुक्केबाजी
चौथे दिन पवन बर्तवाल और निकहत जरीन मुश्किल में जीते
खेलपथ संवाद
ग्रेटर नोएडा: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय नौवीं एलीट महिला-पुरुष राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में मुक्केबाजों ने मुक्कों की बारिश करते हुए अपना दमखम दिखाया। चौथे दिन के मुकाबले में निकहत जरीन और पवन बर्तवाल के अलावा नवीन कुमार ने कड़े मुकाबले में प्रतिद्वंद्वियों को पराजित किया तथा मीनाक्षी हुड्डा ने एकतरफा 5-0 से जीत दर्ज की।
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चौथे दिन पवन बर्तवाल और निकहत जरीन मुश्किल में जीते
खेलपथ संवाद
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चौथे दिन पवन बर्तवाल और निकहत जरीन मुश्किल में जीते
खेलपथ संवाद
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चौथे दिन पवन बर्तवाल और निकहत जरीन मुश्किल में जीते
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