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ज्ञान के पुंज, अद्वितीय दार्शनिक, आदर्श शिक्षक एवं भारत रत्न से विभूषित पूर्व राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन ।
उनका सम्पूर्ण जीवन इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो एक साधारण मनुष्य को असाधारण बना देती है और एक राष्ट्र को महान ।

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हमारे बलिया की माटी के सपूत, क्रांतिकारी विचारों के धनी और भारतीय राजनीति के 'युवा तुर्क' के रूप में विख्यात, पूर्व प्रधानमंत्री स्व चंद्रशेखर सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। देश के प्रति आपका समर्पण और निर्भीक नेतृत्व सदैव हम सभी का मार्गदर्शन करता रहेगा।
#chandrashekharsingh

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अदालत के फैसले सिर्फ सबूत और कानून पर होते हैं, राजनीति पर नहीं।- विष्णु शंकर जैन

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तो क्या सुबोध उनियाल इस बार 5000 से अधिक मतों से जीतेंगे?
कल घनसाली जाते वक्त मैं आगराखाल में रुका। अक्सर रुककर भुन्नी भात का सेवन करता हूँ, लगे हाथ 4-5 लोगों से चुनावी गुफ़्तगू भी हो जाती है। इस बार लोगों में जो आम अवधारणा देखने को मिल रही है, वो है कि इस बार सुबोध उनियाल अपने राजनीतिक इतिहास के सबसे अधिक मतों से जीत सुनिश्चित कराने जा रहे हैं। मेरा अनुमान है कि नेताजी इस बार 5000 से अधिक मतों से जीत हासिल करेंगे, और आपका?

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अदालत के फैसले सिर्फ सबूत और कानून पर होते हैं, राजनीति पर नहीं।- विष्णु शंकर जैन

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अन्याय के खिलाफ जीतेंगे सनोज मिश्रा?
सनोज मिश्रा ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें वो भगवान शिव की आराधना करते दिख रहे हैं. उन्होंने कैप्शन में लिखा- महादेव जल्दी ही मेरा वनवास खत्म करेंगे कानून ने अपना काम शुरू कर दिया है. मोनालिसा के लव जिहाद में फंसने के बाद मैंने सारे काम छोड़कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मुहिम शुरू की. अब इसका असर दिखाई देने लगा है. हम जल्दी ही विजयी हो सकते हैं और षडयंत्र करने वाले जिहादी को जेल होगी.सनोज मिश्रा लिखते हैं कि हालांकि, इस लड़ाई में फिल्म "द डायरी ऑफ मणिपुर" का नुकसान हुआ. कर्ज के बोझ के साथ जिहादी ने मोनालिसा से मेरे ऊपर झूठे आरोप लगवाए. मुझे झूठे केस में फंसाना चाहा. धमकियां भी लगातार मिलती रहीं, लेकिन धर्मयुद्ध को आप सभी ने रुकने नहीं दिया

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दो मई,1929 को कोलकाता में पंडित गांगेय नरोत्तम शास्त्री तथा रूपेश्वरी देवी के घर में जन्मे आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री साहित्य, संस्कृति और राजनीति के अद्भुत समन्वयक थे। मूलतः इनका परिवार जम्मू का था। केवल भारत ही नहीं, तो सम्पूर्ण विश्व में हिन्दी के श्रेष्ठ विद्वान के नाते वे प्रसिद्ध थे। अपने भाषण में उचित समय और उचित स्थान पर प्रसिद्ध कवियों की कविताओं के अंश उद्धृत करने की उनमें अद्भुत क्षमता थी।
विष्णुकान्त जी की शिक्षा कोलकाता के सारस्वत विद्यालय, प्रेसीडेन्सी काॅलेज और फिर कोलकाता विश्वविद्यालय में हुई। उन्होंने अपने छात्रजीवन की सभी परीक्षाएँ सदा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। 1944 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आये, तो फिर सदा के लिए उससे जुड़ गये। तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरुजी तथा भारतीय जनसंघ के संस्थापक महामन्त्री श्री दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से वे अत्यधिक प्रभावित थे।
26 जनवरी, 1953 को उनका विवाह इन्दिरा देवी से हुआ। इसी वर्ष वे कोलकाता विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक हो गये। तुलसीदास तथा हिन्दी के भक्तिकालीन काव्य में उनकी विशेष रुचि थी। यहाँ उनकी साहित्य साधना को बहुविध आयाम मिले। उन्होंने काव्य, निबन्ध, आलोचना, संस्मरण, यात्रा वृत्तान्त आदि विविध क्षेत्रों में प्रचुर साहित्य की रचना की।

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