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सांसद राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोड़कर मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए।
अपने खून-पसीने और बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज ये पार्टी पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है, पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है और ये पार्टी आज चंद भ्रष्ट लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है, जो अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम कर रही है।
पिछले कुछ सालों से मैं यह महसूस कर रहा था कि शायद मैं एक गलत पार्टी में एक सही आदमी हूं। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे; पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं।
तीसरा विकल्प कि मैं अपनी ऊर्जा और अनुभव लेकर किसी और पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसलिए अकेले मैंने ही नहीं, मेरे साथ छह और सांसदों ने यह फैसला लिया कि हम इस पार्टी से रिश्ता तोड़ देंगे। एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। वे अनगिनत शिक्षित लोग जो इस पार्टी के साथ जुड़े थे, क्या वे सारे लोग गलत थे?
आप ऐसे समझिए, आप में से जितने ऑफिस जाने वाले लोग हैं, अगर आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक बन जाए तो आप कितना काम कर पाएंगे? क्या आप वहां काम कर पाएंगे? आपको वहां काम करने से रोका जाए, आपकी मेहनत को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए, तो आप क्या करेंगे?
उस स्थिति में सही फैसला यही है कि आप उस जगह को छोड़ दें। शायद हमने भी वही किया। आप में से कई लोगों ने पूछा कि क्या मैं आम लोगों के मुद्दे वैसे ही उठाता रहूंगा? तो मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपकी समस्याओं को लगातार और जोश के साथ उठाऊंगा, और अच्छी बात यह है कि अब हम उन दिक्कतों के हल भी ढूंढ पाएंगे।
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पठानकोट के चक्की पुल और मलिकपुर चौंक पर अब से बसे यात्रियों को लेने हेतु नहीं रुकेगी और अगर कोई बस चालक यात्री को इन्ह चौंको में बिठाते हुए देखा गया तब उसकी बस का चलान होगा ।
यह निर्णय लगातार निजी बस चालकों और सरकारी बस चालकों के मध्य हो रहे झगड़े हेतु लिया गया है
अब यात्रियों को अपने अपने गंतव्य के लिए पठानकोट बस अड्डे से ही बस पकड़नी पड़ेगी।
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झारखंड में गिरिडीह के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बजटो गांव में शनिवार शाम गोलगप्पे खाने से तीन दर्जन यानी 36 से अधिक लोग बीमार हो गए. इनमें सबसे अधिक संख्या बच्चों की है. सभी को तेज बुखार, पेट दर्द, उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी. आनन-फानन में बीमार लोगों को सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान 6 साल के बच्चे की मौत हो गई. मृतक की पहचान बजटो निवासी रंजन कुमार के रूप में हुई है.
इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच में जुट गया है. बीमार पड़े लोगों में अधिकांश बच्चे शामिल हैं. जिन बच्चों और महिलाओं को अस्पताल लाया गया, उनमें 12 वर्षीय दिवाकर कुमार, 12 वर्षीय शिवम कुमार, 10 वर्षीय अनुराधा कुमारी, 10 वर्षीय मनीता कुमारी, 11 वर्षीय रिया कुमारी, 12 वर्षीय प्रिंस कुमार, 8 वर्षीय रानी कुमारी, 5 वर्षीय रंजन कुमार, 16 वर्षीय सुजीत कुमार वर्मा, 10 वर्षीय बादल कुमार, 17 वर्षीय मधु वर्मा, रेखा देवी, रिंकी देवी, बलराम प्रसाद वर्मा समेत अन्य शामिल हैं.
गांव वालों के अनुसार इन लोगों ने गोलगप्पे खाए थे, जिनमें से कई की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. पीड़ितों ने बताया कि शनिवार शाम एक ठेलेवाला गोलगप्पे लेकर गांव में घूम-घूमकर बेच रहा था. बच्चों और महिलाओं समेत कई लोगों ने इसे खाया था. रात में कुछ लोगों को हल्की परेशानी महसूस हुई, लेकिन रविवार सुबह होते ही बुखार और पेट दर्द ने गंभीर रूप ले लिया. धीरे-धीरे जिन-जिन लोगों ने गोलगप्पे खाए थे, सभी को तकलीफ होने लगी.
हालात बिगड़ते देख ग्रामीणों ने सभी को एक-एक कर सदर अस्पताल पहुंचाया. सदर अस्पताल में इलाज के दौरान 6 साल के रंजन कुमार की मौत हो गई. बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया. गांव में मातम का माहौल है. बाकी सभी मरीजों को अस्पताल के वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है. डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है.
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हापुड़: पिलखुवा थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब मोदीनगर रोड स्थित एक कपड़ा फैक्ट्री के पास झुग्गी बस्ती में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और करीब 70 झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया।
सुबह करीब नौ बजे लगी इस आग ने पूरे इलाके को धुएं के गुबार में ढक दिया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। झुग्गियों में प्लास्टिक, पॉलिथीन व कबाड़ जैसी ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और पास स्थित गायत्री लाजिस्टिक ट्रांसपोर्ट, यूनाइटेड ट्रांसपोर्ट तथा एक जींस सिलाई फैक्ट्री तक पहुंच गई।
गोदामों में रखा भारी मात्रा में माल भी आग की भेंट चढ़ गया। बताया गया कि एक गोदाम में करीब 800 और दूसरे में लगभग 250 गांठ माल रखा था, जो पूरी तरह जल गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
करीब आठ दमकल गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से झुग्गियों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला। क्षेत्राधिकारी अनीता चौहान ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस अग्निकांड में लाखो रुपये से अधिक के नुकसान की आशंका है। हालांकि अभी वास्तविक क्षति का आकलन किया जा रहा है। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी जनहानि की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों की जांच जारी है।
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