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प्यार का 'हाई-वोल्टेज' ड्रामा: प्रेमी से शादी की जिद पर अड़ी लड़की, सीधे मोबाइल टावर पर चढ़ी!
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से एक बिल्कुल फिल्मी और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ गंजबासौदा क्षेत्र के सिरावदा गांव में एक 20 वर्षीय युवती अपने प्यार को पाने के लिए 'शोले' फिल्म की तरह सीधे मोबाइल टावर पर चढ़ गई।
क्या है पूरा मामला?
🔹 चिलचिलाती धूप में 2 घंटे का ड्रामा: लड़की तेज धूप में करीब 2 घंटे तक टावर पर डटी रही। उसकी एक ही रट थी- "शादी करूंगी तो सिर्फ अपने प्रेमी से!"
🔹 गांव वालों की अटकी सांसें: घटना की खबर फैलते ही पूरा गांव टावर के नीचे इकट्ठा हो गया। नीचे खड़े परिजन लगातार उसे उतरने की मिन्नतें करते रहे।
🔹 कूदने की दी धमकी: हालात तब और गंभीर हो गए जब किसी के भी टावर पर चढ़ने की कोशिश करने पर लड़की और ऊपर चढ़ जाती या नीचे लटकने की धमकी देने लगती।
🔹 पुलिस ने किया रेस्क्यू: 2 घंटे की कड़ी मशक्कत और मान-मनौवल के बाद आखिरकार पुलिस लड़की को सुरक्षित नीचे उतारने में कामयाब रही। बाद में उसे परिजनों को सौंप दिया गया।
आजकल प्यार साबित करने के लिए लोग क्या-क्या नहीं कर रहे हैं! आपकी इस पूरी घटना पर क्या राय है? कमेंट्स में जरूर बताएं। 👇
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“सर्वे सन्तु निरामयाः”
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लीला का प्रसंग:
ऋषि व्याघ्रपाद के पुत्र उपमन्यु छोटे बालक थे। एक बार उन्होंने अपनी माता से दूध माँगा, पर गरीबी के कारण माता के पास दूध नहीं था। माता ने आटा घोलकर पिला दिया, पर बालक समझ गया कि यह दूध नहीं है। माता ने दुखी होकर कहा— "बेटा! अगर दूध चाहिए तो जगत के पिता महादेव की शरण में जा, वही सब देने वाले हैं।"
छोटा सा बालक हिमालय पर जाकर घोर तपस्या करने लगा। भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए 'इंद्र' का रूप धरा और प्रकट होकर शिव जी की निंदा करने लगे। उन्होंने कहा— "उस भस्मधारी (शिव) की पूजा छोड़ दे, मैं तुझे स्वर्ग का ऐश्वर्य दूँगा।"
यह कथा प्रभु के बाल्यकाल की है। ब्रज में एक अत्यंत वृद्ध स्त्री रहती थी जो वन से फल लाकर बेचा करती थी। वह निर्धन थी, लेकिन उसका मन श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम से भरा था।
लीला का वर्णन
एक दिन वह टोकरी में फल लेकर नंद भवन के द्वार पर आई। बाल कृष्ण ने जब सुना कि कोई फल बेचने आया है, तो वे भी फल खाने के लिए मचल उठे। प्रभु ने देखा कि बड़े लोग अनाज के बदले फल ले रहे हैं। वे छोटे-छोटे हाथों में मुट्ठी भर अनाज लेकर दौड़ते हुए बाहर आए।
दौड़ते समय उनके नन्हे हाथों से अधिकांश अनाज जमीन पर गिर गया और जब वे बुढ़िया के पास पहुँचे, तो उनकी हथेली में केवल दो-चार दाने ही शेष बचे थे।