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उत्तर प्रदेश के मेरठ की पहचान बन चुके पारंपरिक गजक को अब दुनिया भर में आधिकारिक पहचान मिल गई है। करीब 121 साल पुराने इस कारोबार को जियोग्राफिक इंडिकेशन (GI) टैग प्रदान किया गया है।
यह उपलब्धि मेरठ के कारीगरों, व्यापारियों और पीढ़ियों से इस मिठास को संजोए रखने वालों के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है।
मेरठ रेवड़ी गजक व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों से यह सफलता मिली है। GI टैग मिलने के बाद अब गजक सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि मेरठ की सांस्कृतिक विरासत के रूप में वैश्विक मंच पर दर्ज हो गई है। इससे न सिर्फ नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि इस कारोबार से 10 हजार से अधिक लोगों की आजीविका सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।
मेरठ की गजक की कहानी साल 1904 से शुरू होती है। गुदड़ी बाजार में लाला रामचंद्र की दुकान पर तिल और गुड़ के मेल से पहली बार यह अनोखा स्वाद सामने आया। एक छोटी-सी गलती से बने इस प्रयोग ने लोगों का दिल जीत लिया और धीरे-धीरे मेरठ की रेवड़ी और गजक पूरे देश में मशहूर हो गई। अंग्रेज अफसर तक इसके स्वाद के कायल थे। 1915 तक यह मिठाई अपने आज के स्वरूप में आ चुकी थी।
तिल और गुड़ से बनी गजक सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि सर्दियों में सेहत के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। इसमें इलायची, लौंग, जायफल और जावित्री जैसे मसाले मिलाए जाते हैं, जो ठंड के मौसम में शरीर को ऊर्जा देते हैं। नवरात्र से लेकर फरवरी तक इसकी मांग चरम पर रहती है।
जहां पहले केवल गुड़ की रेवड़ी और साधारण गजक मिलती थी, वहीं आज पट्टी गजक, स्प्रिंग रोल गजक, चॉकलेट रोल और ड्राई फ्रूट समोसा गजक जैसे नए रूप भी बाजार में उपलब्ध हैं। मेरठ की गजक अब 18 से अधिक देशों तक पहुंच चुकी है।
GI टैग के साथ मेरठ की यह मिठास अब सिर्फ ज़ुबान पर नहीं, बल्कि दुनिया के नक्शे पर भी अपनी पहचान दर्ज करा चुकी है एक ऐसा स्वाद, जो परंपरा, मेहनत और विरासत का प्रतीक है।
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लोग रोज़ ऑफिस जाने के लिए ट्रैफिक से लड़ते हैं…
लेकिन एक माँ ऐसी भी है, जो हर दिन 350 किलोमीटर हवाई जहाज़ से उड़कर ऑफिस जाती है।
रेचल कौर — दो बच्चों की माँ।
वह मलेशिया के पेनांग में रहती हैं, लेकिन उनका ऑफिस कुआलालंपुर में है।
उनका हर दिन कुछ ऐसा होता है👇
सुबह 4 बजे उठना,
5:55 AM की फ्लाइट पकड़ना,
ऑफिस पहुँचना, पूरा दिन काम करना,
और रात 8 बजे तक घर वापस — ताकि बच्चों के साथ वक्त बिता सकें।
सबसे हैरान करने वाली बात?
रोज़ फ्लाइट से आना-जाना,
कुआलालंपुर में किराए पर रहने से सस्ता पड़ता है।
यह कहानी दिखाती है कि
माँ सिर्फ़ त्याग नहीं करती,
वह रास्ते भी खुद बना लेती है।
जब इरादा मज़बूत हो,
तो दूरी भी छोटी लगने लगती है।
🙏❤️
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बचपन की वो तस्वीरें, जहां दो बच्चे सूट-बूट में साथ खड़े हैं, मासूम मुस्कान, बिना किसी मतलब के दोस्ती… और वक्त की तेज़ रफ्तार में वही दोस्त आज “Now” की तस्वीर में ज़िंदगी का सबसे क़रीबी रिश्ता बन चुका है। कल तक जिसे आप भाई जैसा मानते थे, आज वही आपका जीवनसाथी बन सकता है—यही है आज का ज़माना, जहां रिश्ते हालात, समझ और समय के साथ नया नाम ले लेते हैं। यह पोस्ट किसी रिश्ते का मज़ाक नहीं उड़ाती, बल्कि यह दिखाती है कि इंसान बदलता है, उम्र बदलती है और ज़िंदगी अपने फैसले खुद लिखती है। भरोसा टूटता नहीं, बस रूप बदल लेता है… और शायद यही सच है कि आज के दौर में “Then” और “Now” के बीच की दूरी सबसे बड़ा सबक सिखाती है। 😂
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अनीता झाँसी की ऑटो महिला ड्राइवर जो मेहनत ईमानदारी से कमाकर अपना घर परिवार चला रही थी किसी ने उसे मौत के घाट उतार दिया पुलिस लीपापोती में लगी हुई है एक्सीडेंट का नाम दे रही है,जो पुलिस सही FIR नहीं लिख सकती सही अपराधी को कैसे पकड़ेगी उत्तर प्रदेश के ये हालात बताते हैं कि बेटियों की सुरक्षा को लेकर न कोई संवेदनशीलता है और न ही कोई कड़ी कार्रवाई लगातार इस तरह की घटनाएँ आए दिन हो रही है! बेख़ौफ़ अपराधियों से बेटियां बचाओ !
इतने बड़े शिवलिंग का दर्शन कर आप भी बने पुण्य के भागी ।। हर हर महादेव ।। हर हर महादेव
इस शिवलिंग की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
1. ऊंचाई लगभग 33 फीट/10 मीटर
2. वजन 210 मिट्रिक टन/लगभग 2 लाख किलोग्राम
3. पदार्थ-ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर
4. शैली-दक्षिण भारतीय शिल्प कला शैली
5. कुल लागत-3 करोड़
6. निर्माण में लगा समय 10 वर्ष
7. शिल्पकार- लोकनाथ
8. विश्व का सबसे बड़ा एकल पत्थर से बना शिवलिंग
9 वाहन-96 पहिया ट्रक. Ai के द्वार बनाए गए हैं
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