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क्या है धार का भोजशाला विवाद? सरस्वती प्रतिमा रखने और नमाज बंद करने की क्यों हो रही है मांग?
धार का भोजशाला विवाद अदालत में पहुंच गया है. इंदौर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला में सरस्वती देवी की प्रतिमा स्थापित करने और पूरे परिसर की वीडियोग्राफी करवाने की मांग की है।
भोजशाला ही ‘सरस्वती मंदिर’ था। इस बात का दावा पूर्व पुरातत्वविद के के मुहम्मद ने किया है। उनका कहना है कि भोजशाला, जिसे मुस्लिम पक्ष ‘कमल मस्जिद’ असल में वो कोई मस्जिद नहीं, बल्कि सरस्वती मंदिर था। लेकिन बाद में इस्लामवादियों ने इस्लामी इबादतगाह में बदल दिया।
केके मुहम्मद का कहना है कि धार स्थित भोजशाला के बारे में ये ऐतिहासिक तथ्य है कि ये सरस्वती मंदिर ही था। बाद में इसे मस्जिद बनाया गया। केके मुहम्मद पूजा स्थल अधिनियम 1991 का हवाला देते कहते हैं कि इस कानून के तहत किसी भी धार्मिक स्थल की स्थिति आधार वर्ष 1947 निर्धारित है। उस वर्ष में अगर ये एक मंदिर था तो ये मंदिर ही रहेगा और अगर ये मस्जिद था तो ये मस्जिद ही रहेगा।
भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में अब वह किसी से पीछे नहीं है। आंध्र प्रदेश में NH-544G पर महज 24 घंटे में 28.95 लेन किलोमीटर बिटुमिनस सड़क बनाकर भारत ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। यह रिकॉर्ड बेंगलुरु कडप्पा विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर पर, पुट्टपर्थी के पास बनाया गया।
इस ऐतिहासिक काम को National Highways Authority of India - NHAI की निगरानी में अंजाम दिया। लगातार चले इस ऑपरेशन में 10,675 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ। बिना रुके काम, सटीक प्लानिंग और बेहतरीन तालमेल ने इसे मुमकिन बनाया।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इसे राज्य और देश दोनों के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने केंद्र सरकार और नितिन गडकरी के नेतृत्व को इस उपलब्धि का श्रेय दिया।
यह कॉरिडोर पूरा होने के बाद व्यापार, यात्रा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा।
बड़ौदा की महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ एक फैशन गाला में नज़र आईं, लेकिन इस बार वजह उनका लुक नहीं बल्कि उनकी साड़ी थी। उन्होंने गायकवाड़ राजघराने के खजाने से निकली एक विरासत वाली पैठणी साड़ी पहनी, जोकि 100 साल से भी ज़्यादा पुरानी बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रेशमी पैठणी दशकों तक सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई गई थी। जब महारानी इसे पहनकर सामने आईं, तो हर नज़र उसी पर ठहर गई। यह सिर्फ एक साड़ी नहीं थी, बल्कि इतिहास, परंपरा और शाही विरासत की झलक थी।
पैठणी की बारीक बुनाई, गहरे रंग और शाही अंदाज़ ने लोगों को पुराने दौर में लौटा दिया। इस साड़ी ने साबित कर दिया कि फैशन सिर्फ नया पहनने का नाम नहीं, बल्कि विरासत को सहेजने और गर्व से आगे बढ़ाने का भी जरिया है।
महारानी का यह अंदाज़ भारतीय हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक खूबसूरत संदेश बन गया।
उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले के धनैपुर में इक़बाल अहमद पिछले करीब 20 साल से गाड़ियां ठीक कर रहे हैं। कोई बड़ा प्लान नहीं, बस सीखने की आदत और काम से जुड़ा भरोसा। ट्रैक्टरों और पुरानी मशीनों से शुरू हुआ सफर आज मैकेनिकल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों तक पहुंच चुका है।
नई टेक्नोलॉजी आई तो इक़बाल ने खुद को बदला। स्कैनिंग टूल सीखे, ट्रेनिंग ली और यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ यानी CM YUVA योजना से जरूरी उपकरण जुटाए। उनकी वर्कशॉप आज भी साधारण है, लेकिन काम भरोसेमंद है।