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जय श्री राम 🚩
श्रद्धा, आस्था और संस्कार का प्रतीक —
श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर
समस्त रामभक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।
राम नाम ही जीवन का आधार है 🙏✨
#shriramlalla
#rammandir
#ayodhyadham
#pranpratishtha
#rambhakt
#sanatandharma
राम मंदिर उस विचार की पुनर्स्थापना है, जहां शासन नहीं, सेवा सर्वोपरि होती है।
22 जनवरी, 2024 को भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ जिस भावना का उदय हुआ, आज उसके दो वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये दो वर्ष केवल आस्था के नहीं रहे, बल्कि करुणा, कर्तव्य और जनकल्याण के प्रतीक बने हैं।
इन वर्षों में देशवासियों ने सेवा को जमीन पर उतरते देखा, कहीं राशन के रूप में, कहीं इलाज के रूप में, कहीं पक्के मकान बनकर, तो कहीं स्वच्छ पीने के पानी के रूप में। बीते दो वर्षों में मोदी सरकार के निर्णयों ने न सिर्फ सुविधाएं बढ़ाईं, बल्कि जनता के भीतर अभिमान और आत्मविश्वास भी जगाया।
जय श्री राम 🚩
श्रद्धा, आस्था और संस्कार का प्रतीक —
श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर
समस्त रामभक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।
राम नाम ही जीवन का आधार है 🙏✨
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जय श्री राम 🚩
श्रद्धा, आस्था और संस्कार का प्रतीक —
श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर
समस्त रामभक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।
राम नाम ही जीवन का आधार है 🙏✨
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आज (22 जनवरी, 2024) का दिन भगवान श्रीराम के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन अयोध्या में भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई और सभी को उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसे एक ऐतिहासिक क्षण माना गया, जब करोड़ों भारतीयों ने दीये जलाकर और जश्न मनाकर 'राम राज्य' के स्वप्न को साकार होते देखा और अपने आराध्य का स्वागत किया.
22 जनवरी 2024 को राम मंदिर के उद्घाटन के साथ ही लाखों श्रद्धालुओं और देशवासियों को रामलला के बाल स्वरूप के दर्शन हुए, जो एक दिव्य और ऐतिहासिक अनुभव था.
यह दिन 'राम राज्य' (धर्म और सद्भाव के राज्य) की स्थापना की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम माना गया, जिससे हर तरफ खुशी और उम्मीद की लहर दौड़ गई.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस दिन को "भारत के उत्कर्ष और उदय" का साक्षी बताया और करोड़ों लोगों ने इस अवसर पर अपने आराध्य के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया.
हालांकि, यह कलियुग में भगवान के दर्शन की बात है, गोस्वामी तुलसीदासजी को भी चित्रकूट में भगवान राम के बाल रूप के दर्शन हुए थे, जब हनुमानजी ने उन्हें संकेत दिया था, जैसा कि 'रामचरितमानस' में वर्णित है, यह भी एक महत्वपूर्ण घटना है.