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सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ॥
प्रभास क्षेत्र-सौराष्ट्र,गुजरात में सागर तट पर विराजमान द्वादश ज्योतिर्लिंगों में जिनका प्रथम है ऐसे श्री सोमनाथ महादेव का आज दर्शन करने का परम सौभाग्य प्राप्त पूज्यपाद सद्गुरुदेव भगवान हुआ।
वर्षों की प्रतीक्षा आज इतने सुखद स्वरूप में पूर्ण हुई कि मैं इस आनंद को व्यक्त नहीं कर सकाता हूँ।आज प्रातः सोमनाथ भगवान की आरती एवं उनके समक्ष ही रूद्राभिषेक करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ।
इस वर्ष हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे हैं। यह आयोजन जनवरी 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। पूरे विश्व के लिए समस्या बन चूकें इस्लाम और मुगलों को हमने संदेश दिया है कि तुम्हारी विध्वंसक मानसिकता के आगे हमारे सनातन के विचारों की ही विजय होगी।
आज सोमनाथ भगवान जिस परम वैभव के साथ विराजमान है उसके लिए हमें वीर हमीर सिंह गोहिल, सरदार वल्लभभाई पटेल जी और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी के हम निरंतर ऋणी रहेंगे….
जय सोमनाथ
ऊँ नमः शिवाय