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रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत के बीच बड़ा दावा सामने आया है। रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी SVR ने कहा है कि फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम यूक्रेन को परमाणु हथियार देने की कोशिश कर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने इस दावे के बाद पश्चिमी देशों को कड़ी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ऐसा हुआ तो इससे शांति वार्ता पर बुरा असर पड़ सकता है और युद्ध और बढ़ सकता है।
रिश्तों का बंधन जब नफरत में बदल जाए, तो अंजाम कितना भयावह हो सकता है, इसका उदाहरण मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र के मोरना गांव में देखने को मिला। यहां 55 वर्षीय रामप्रसाद की उनकी ही दो बेटियों ने गला रेतक'र हत्या कर दी।
घटना रविवार देर रात की है। रामप्रसाद घर के बाहर गैलरी में चारपाई पर सो रहे थे। आरोप है कि बड़ी बेटी कोमल और उसकी छोटी बहन ने दरांती से उनके गले पर कई वार किए। छोटी बहन ने पिता के पैर पकड़े रखे, जबकि बड़ी ने गर्दन, कंधे और पेट पर ताबड़तोड़ वार किए। वारदात के बाद दोनों अपने कमरे में जाकर सो गईं।
सोमवार सुबह पत्नी चंद्रकली ने शव देखा तो चीख पड़ीं। शोर सुनकर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और पुलिस को सूचना दी गई। शुरुआती पूछताछ में परिवार ने अज्ञात लोगों पर हत्या का आरोप लगाया, लेकिन दोनों बेटियां बार-बार बयान बदलती रहीं। सख्ती से पूछताछ में बड़ी बेटी ने जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस के अनुसार, पिता शादी को लेकर ताने देते थे, जिससे परेशान होकर दोनों ने दो दिन पहले ही हत्या की योजना बनाई। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त दरांती बरामद कर बड़ी बेटी को जेल भेज दिया है, जबकि छोटी बहन को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
दीदी का तो गजब का 'कैरियर ओरिएंटेड' स्वैग है 😀 छलांग मारी तो सीधे एडिशनल एसपी की कुर्सी पर 🤦 बेचारी यूपीएससी (UPSC) तो खामखां बदनाम है, असली टैलेंट तो टेलर की दुकान और दो सितारे लगाने में छिपा है😝 दीदी ने सोचा होगा कि किताबों में सिर खपाने से अच्छा है कि सीधे वर्दी सिलवाओ और मोहल्ले में भौकाल टाइट कर दो😂 मम्मी को लगा होगा कि बिटिया अफसर बन गई, पर बिटिया तो 'सिंघम' की फीमेल वर्जन बनने के चक्कर में थाने की मेहमान बन गईं🤦
इतना तगड़ा कॉन्फिडेंस कि वर्दी तो ऑफिसर वाली पहन ली, पर नेमप्लेट पर सिपाही वाला नंबर चिपका लिया—मतलब कंफ्यूजन का लेवल ऐसा कि खुद को ही समझ नहीं आया कि मैं ऑफिसर हूँ या कॉन्स्टेबल 🤔 जब असली पुलिस वाली मैडम ने इनका 'इन्वेस्टिगेशन' शुरू किया, तब जाकर समझ आया कि ये खाकी का जलवा नहीं, बल्कि ओवर-एक्टिंग का तड़का है🤣 अब थाने में बैठकर जो मासूमियत वाला चेहरा बना रही हैं, उसे देखकर तो ऑस्कर वाले भी शर्मिंदा हो जाएं 🙈
दीदी को लगा था कि रील बनाकर 'वर्दी का रौब' दिखाएँगी😎 पर यहाँ तो रीयल लाइफ में ही पुलिस ने क्लाइमेक्स लिख दिया 😀 गजब की तैयारी थी 🙄 बस एक छोटी सी चूक हो गई—असली पुलिस वाले सिर्फ स्टार्स नहीं देखते, वो स्टाइल के पीछे का 'फ्रॉड' भी पकड़ लेते हैं 😂 अब पढ़ाई की जगह पुलिस की धाराओं का सिलेबस याद करना पड़ेगा। इसे कहते हैं शॉर्टकट के चक्कर में सीधे 'लॉकअप' का रूट पकड़ना🤣🤣
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दो बेटियों ने भेदभाव से तंग आकर सो रहे पिता का गला काट दिया. सबूत मिटाने के बाद वे चैन से सो गईं और अगले दिन मां के आंसू पोंछकर निर्दोष होने का नाटक करती रहीं. हालांकि, पुलिस की सख्ती के आगे वो टूट गईं और अपना जुर्म कबूल कर लिया. इस घटना से इलाके में सनसनी फ़ैल गई है.
🔥 बड़ा बयान… और बड़ा सवाल!
मतदान की मशीन पर उंगली दबाते वक्त जनता सिर्फ सरकार नहीं चुनती, बल्कि जवाबदेही का अधिकार भी सौंपती है। लेकिन सवाल यह है कि जब विधायक या सांसद जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, भ्रष्टाचार, अहंकार या नाकामी दिखाते हैं—तो क्या जनता सिर्फ अगला चुनाव आने तक चुप रहे? यह बयान उसी बेचैनी से निकला है, जहाँ कहा जा रहा है कि मतदाताओं को अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाने का अधिकार मिलना चाहिए। लोकतंत्र सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं, बल्कि हर दिन की जवाबदेही मांगता है। क्या सत्ता जनता की सेवक है या जनता सत्ता की मजबूरी बन चुकी है? अब फैसला आपके सोच का है—क्या आप ऐसा अधिकार चाहते हैं, या फिर पुराने सिस्टम पर ही भरोसा रखते हैं?
#बड़ा_बयान #लोकतंत्र #righttorecall
🔥 रवि किशन का PM मोदी पर बयान
बीजेपी सांसद रवि किशन ने 22 फरवरी 2026 को लखनऊ में कहा,
"मोदीजी भगवान के रूप हैं, एपस्तिन फ़ाइल में उनका नाम हो ही नहीं सकता।"
यह बयान Epstein Files में मोदी का नाम आने के आरोपों के जवाब में आया है। रवि किशन ने मोदी को "भगवान के अवतार" बताया। बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
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क्या टीम चयन पर उठ रहा है बड़ा सवाल? 🤔🏏
साउथ अफ्रीका मैच के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस…
पूर्व विस्फोटक ओपनर Virender Sehwag ने बड़ा बयान देते हुए कहा —
“दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जिनका भी रिकॉर्ड अच्छा था, उसे गंभीर ने बाहर रखा – हाँ या ना?”
इशारा साफ तौर पर टीम मैनेजमेंट और हेड कोच Gautam Gambhir की रणनीति की ओर है।
अब सवाल ये है —
क्या टीम चयन में रणनीति सही थी?
या जिन खिलाड़ियों का रिकॉर्ड मजबूत था, उन्हें मौका मिलना चाहिए था?
क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, भावनाएं भी है…
और जब फैसले बड़े होते हैं, तो बहस भी बड़ी होती है।
आपकी क्या राय है?
टीम सिलेक्शन सही था या बदलाव की जरूरत है? 👇
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जनता का पैसा और नेताओं के ठाठ: ₹9000 का मोबाइल बिल? 🤔
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस देश में एक आम आदमी मात्र ₹350 में महीने भर का अनलिमिटेड डेटा और कॉलिंग का लुत्फ उठा लेता है, वहां हमारे माननीय विधायकों को फोन खर्च के नाम पर ₹9000 प्रति महीना क्यों दिया जा रहा है?
यह सवाल सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था और मंशा का है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ 5G और अनलिमिटेड प्लान्स ने दूरियों और खर्चों को समेट दिया है, वहां सरकारी खजाने से इतनी भारी-भरकम राशि का आवंटन समझ से परे है।
क्यों ज़रूरी है यह सवाल?
टैक्सपेयर्स का पैसा: यह पैसा किसी नेता की जेब का नहीं, बल्कि आपकी और हमारी मेहनत की कमाई (Tax) का है।
बचत की गुंजाइश: अगर एक विधायक ₹8650 महीना बचा सकता है, तो पूरे देश में यह आंकड़ा करोड़ों में पहुँच जाएगा। क्या यह पैसा शिक्षा या स्वास्थ्य में नहीं लग सकता?
समानता का अधिकार: जब जनता को सस्ते रिचार्ज का सुझाव दिया जाता है, तो नेताओं के लिए अलग मानक क्यों?
यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। भारत पूछ रहा है कि क्या अब समय नहीं आ गया है कि इन फिजूलखर्ची वाले भत्तों (Allowances) पर लगाम कसी जाए? अगर आप भी मानते हैं कि सरकारी सुविधाओं के नाम पर होने वाली इस बर्बादी को रुकना चाहिए, तो इस पोस्ट को शेयर करें और अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर दें!
जगो इंडिया, सवाल पूछना शुरू करो! 🇮🇳✍️
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