image

image

image
3 d - Translate

इस दोहे में श्री राधा रानी के प्रति अनन्य भक्ति और उनके पावन धाम 'बरसाना' की महिमा का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है।
मन की डोर का मुड़ना: जब सांसारिक मोह-माया, उलझनों और चिंताओं से हटकर मनुष्य के 'मन रूपी धागे' का रुख बरसाने (राधा जी के दिव्य प्रेम और आनंद के केंद्र) की तरफ होने लगता है, तो जीवन में एक सकारात्मक बदलाव आता है।
राधे-राधे नाम का आकर्षण: जैसे ही मन पूरी तरह से श्री राधा रानी के चरणों में समर्पित होने को व्याकुल होता है, वैसे ही 'राधे-राधे' महामंत्र की ध्वनि मन को अपनी तरफ एक चुंबकीय शक्ति की तरह आकर्षित करने लगती है।
भावार्थ: यह दोहे दर्शाते हैं कि जब जीव का झुकाव सात्विकता और ईश्वरीय प्रेम की ओर होता है, तो 'राधा' नाम की महिमा उसे स्वतः ही अपनी शरण में ले लेती है। फिर चाहकर भी इंसान का मन इस पावन नाम को जपने से खुद को रोक नहीं पाता। यह नाम आत्मा को परम शांति और असीम आनंद की ओर खींच ले जाता है।
राधे राधे
मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज
प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १०८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा

image
3 d - Translate

Radhe Krishna ❤️

image
3 d - Translate

नेहरु का रिकॉर्ड साल , महीने और दिन गिनकर नहीं तोड़ा जा सकता. नेहरु ने अपने कालखंड में जो किया और देश को जो दिया , उससे इन 12 सालों की तुलना ही नहीं की जा सकती . समाज में नफ़रत और ज़हर का घोल नेहरु ने नहीं घोला था . नेहरु ने बड़े -बड़े संस्थान तब बनाए थे , जब देश गुलामी से आज़ाद हुआ था . हज़ार तरह की चुनौतियां थी. आर्थिक तौर भारत बहुत कमज़ोर था. अंग्रेज गरीबी और तंगी हमारे हिस्से में छोड़ गए थे . वैश्विक पटल भी भारत एक आज़ाद मुल्क के तौर पर अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था . तब भी नेहरु ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना को साकार करने की कोशिश की थी , जिसमें भाईचारा हो , मोहब्बत हो .धर्म आधारित राजनीति न हो , सांप्रदायिकता न हो .
नेहरु ने तरक्की की ऐसी बुनियाद रखी थी , जिसमें नफ़रत और साम्प्रदायिकता की कोई जगह नहीं थी . और आज ?
मीडिया को गुलाम बनाकर अपनी चाटुकारिता करवा लेने से कोई नेहरु नहीं बन सकता .

image
3 d - Translate

Radhe Krishna ❤️

image

image

image

imageimage