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बांग्लादेश के फेनी ज़िले में एक और हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया है. 28 वर्षीय समीर चंद्र, जो पेशे से रिक्शा चालक था, की 11 जनवरी की रात पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. घटना डागनभुइयां इलाके की बताई जा रही है. हमलावर समीर का CNG ऑटो-रिक्शा, जो उसकी रोज़ी-रोटी का एकमात्र साधन था, लेकर फरार हो गए. स्थानीय पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह लूट और हत्या का मामला है. समीर का शव उपज़िला अस्पताल के पास मिला.
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जिस चोटी पर ईगल भी नहीं उड़ सकता, वहां बाना सिंह तिरंगा फहरा आए!"
भारतीय सेना के नायब सूबेदार बाना सिंह ने 21,000 फीट की ऊंचाई पर 90 डिग्री की सीधी बर्फ की दीवार चढ़कर दुश्मन को खत्म किया जो एक चमत्कार से कम नहीं है। उनके सम्मान में भारत सरकार ने उस पोस्ट का नाम 'बाना टॉप' रख दिया।
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91 साल की उम्र में, अपने पति की जान बचाने की कोशिश करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
91 वर्ष की उम्र में, एक महिला को मजबूरी में किए गए एक कदम के कारण हिरासत में लिया गया। वह एक ऐसी दवा हासिल करने की कोशिश कर रही थीं, जिसकी कीमत 50 डॉलर से बढ़कर 950 डॉलर हो गई थी। वही दवा उनके पति की जान बचाने का एकमात्र इलाज थी। उनके पति लगभग 90 साल के थे और जीवित रहने के लिए उसी दवा पर निर्भर थे।
उनका नाम हेलेन है। उनके पास कोई मेडिकल बीमा नहीं था और जीवनभर की जमा पूंजी भी उस जरूरी दवा का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त नहीं थी, जो उनके जीवनसाथी जॉर्ज की सेहत के लिए बेहद जरूरी थी। जब सारे रास्ते बंद हो गए, तो उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता—उन्होंने बिना पैसे चुकाए दवा ले जाने की कोशिश की।
इस कदम का नतीजा गिरफ्तारी के रूप में सामने आया, जिसने इस कहानी को जानने वाले सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया। अदालत में, जज ने उनके हाथों से हथकड़ियाँ हटाने का आदेश दिया और सभी आरोप खारिज कर दिए। उन्होंने इसमें कोई अपराध नहीं देखा, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की झलक देखी जो बुजुर्गों को बुनियादी दवाओं तक पहुँच से वंचित कर देता है।
यह मामला वायरल हो गया और एक दर्दनाक याद दिलाने वाला उदाहरण बन गया कि कैसे बुढ़ापा, प्रेम और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सबसे कमजोर लोगों को भी बेहद कठोर फैसले लेने पर मजबूर कर सकती है।
₹2,000 करोड़ की विरासत, फिर भी नो स्मार्टफ़ोन! 📵 जानिए Aaradhya Bachchan की सादगी का गहरा राज़... 🤫
क्या आप यकीन करेंगे? एक ऐसी बच्ची जिसके इशारों पर दुनिया की सारी लक्ज़री हाज़िर हो सकती है, वो आज भी डिजिटल दुनिया से दूर है! 😲
जरा सोचिए:
माँ 👸 मिस वर्ल्ड (ऐश्वर्या राय),
पिता 🎬 दमदार अभिनेता (अभिषेक बच्चन),
दादा 🌟 सदी के महानायक (अमिताभ बच्चन),
और ₹2,000 करोड़ से भी ज्यादा की कुल संपत्ति! 💰
इसके बावजूद, आराध्या बच्चन (Aaradhya Bachchan) के पास अपना खुद का स्मार्टफोन (Smartphone) 📱 नहीं है!
जहाँ आज के समय में बच्चे "मम्मा" या "पापा" बोलने से पहले मोबाइल पर Reels ▶️ और Shorts स्क्रॉल करना सीख जाते हैं, वहीं बच्चन परिवार की यह लाड़ली अनुशासन (Discipline) की एक अनोखी मिसाल पेश कर रही है।
🧐 आखिर क्यों है ये पाबंदी?
यह सिर्फ़ सख्ती नहीं, बल्कि सही परवरिश (Parenting) का एक नायाब नमूना है। ऐश्वर्या राय बच्चन अक्सर आराध्या का हाथ थामे नजर आती हैं। 🤝 इसका मतलब यह नहीं कि वे उन्हें कंट्रोल कर रही हैं, बल्कि वे उन्हें असली दुनिया से जोड़े रखना चाहती हैं, आभासी (Virtual) दुनिया से नहीं।
✨ इस फैसले के पीछे छिपे हैं 3 बड़े कारण:
1. सादगी और संस्कार (Values): बच्चन परिवार चाहता है कि आराध्या अपनी पहचान 'स्टार किड' ✨ के रूप में नहीं, बल्कि अपनी काबिलियत और संस्कारों से बनाए।
2. फोकस (Focus): गैजेट्स की लत से दूर रखकर, उनका ध्यान पढ़ाई 📚 और कौशल विकास पर केंद्रित किया जा रहा है।
3. सुरक्षा (Privacy): सोशल मीडिया की चकाचौंध और ट्रोलिंग से एक बच्चे के मासूम बचपन को बचाना। 🛡️
🌟 आज के माता-पिता के लिए एक सीख
हम अक्सर प्यार जताने के लिए बच्चों को महंगे गैजेट्स 🎁 दे देते हैं, लेकिन बच्चन परिवार ने साबित कर दिया है कि असली विरासत पैसा नहीं, बल्कि "वक्त" ⏳ और "संस्कार" हैं।
आराध्या का बिना फ़ोन के बड़े होना यह बताता है कि अमीरी का मतलब बिगाड़ना नहीं, बल्कि जिम्मेदार बनाना है। 👏
❓ आपकी राय क्या है?
क्या आज के दौर में बच्चों को फोन से दूर रखना सही है या नहीं? कमेंट में जरूर बताएं! 👇🙏🏻
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जयपुर की दिव्यकृति सिंह ने भारत का नाम रोशन किया है। एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली राजस्थान की यह सबसे युवा घुड़सवारी खिलाड़ी साल 2024-25 ग्लोबल ड्रेसाज रैंकिंग में एशिया की नंबर 1 राइडर का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं। इंटरनेशनल इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन की रैंकिंग में उन्हें दुनिया में 14वां स्थान मिला है।