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भारतीय सेना के एक जवान ने सरहद से एक भावुक कर देने वाला वीडियो संदेश भेजा है। जवान वायरल वीडियो में पूछा रहा है कि देश की रक्षा तो हम कर लेंगे, लेकिन हमारी बहन-बेटियों की रक्षा कौन करेगा? वो वीडियो में आगे कहता है कि तीन साल हो गए, हमारी बहन अंकिता भंडारी को अभी तक न्याय नहीं मिला इसलिए जागो उत्तराखंड, बात हमारे राज्य की है।

— अंकिता भंडारी के साथ हुए अन्याय पर देश की सरहद से एक फौजी का यह संदेश आपको झकझोर देगा!

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फिरोजाबाद में 8 साल के रोहित को पड़ोसी ने अगवा कर 70 फीट गहरे कुएं में फेंक दिया सिपाही शिव कुमार गौतम ने जा*न जोखिम में डालकर उसे बचा लिया, मगर किसी ने उन्हें धन्यवाद नहीं दिया, क्या आप दे सकते हैं।

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10 साल की बेटी से रे'प की कोशिश करने पर पिता ने पत्थर से दरिंदे को मा'र डाला और ख़ुद को सरेंडर कर दिया

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सिद्धार्थ मंडल ने लड़कियों को रे:प से बचाने के लिए सेंसर वाली चप्पल का आविष्कार किया फिर भी किसी ने देश के बेटे को बधाई नहीं दिया

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एक IAS और दूसरी IPS,
सिर्फ 2 हजार रुपये में शादी करने वाली UPSC जोड़ी

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आसाम से 18 साल की हिमा दास ने आज भारत की तरफ से पहला ऑन ट्रैक गोल्ड मैडल जीता है
हिमा एक किसान की बेटी है और आज उन्होंने पुरे देश का नाम ऊंचा किया है

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आज के दिन क्रांतिवीर खुदीराम बोस को फाँसी दी गई थी। वे मात्र 18 वर्ष के थे। कोई देशद्रोही ही होगा जो आज अंतिम बार इन्हें श्रृद्धाजंलि देकर नहीं जाएगा।

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सर्दी से बचने के लिए बा/ली अंगूठी बनी 'का/ल'
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अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले एकजुट होकर आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया है।गुरुवार को प्रेस क्लब देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंच से जुड़े संगठनों ने 10 जनवरी को गांधी पार्क से मशाल जुलूस और 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का एलान किया। साथ ही सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से समर्थन देने की अपील की।
महिला मंच की अध्यक्ष कमला पंत ने कहा कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआइपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश में भी वीआइपी का उल्लेख है और अंकिता व उसके मित्र के बीच हुई व्हाट्सएप चैट में भी इसका जिक्र सामने आया है। लेकिन एसआइटी ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में पूरे मामले की सीबीआइ जांच की मांग दोहराई। यह आरोप लगाया कि मामले में रोज नए घटनाक्रम, नए चेहरे सामने आ रहे हैं, लेकिन बचाव की मुद्रा में है।उन्होंने वनंतरा रिजॉर्ट में साक्ष्य नष्ट किए जाने के मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि साक्ष्य किसके निर्देश पर और किन लोगों द्वारा मिटाए गए। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने सरकार पर मामले को भटकाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता लगातार सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह कहना कि यदि माता-पिता चाहेंगे तो जांच कराई जाएगी, केवल टालने वाला बयान है।आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, इसके बावजूद इसे प्रदेश का माहौल बिगाड़ने वाला बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह किसी एक दल या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता की लड़ाई है।
संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्यों ने बताया कि वे गुरुवार सुबह अंकिता भंडारी के माता-पिता से मिले। अंकिता का नाम आते ही आज भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं और परिवार भविष्य की चिंताओं से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा अंकिता के परिवार की मदद के लिए सरकारी घोषणाओं की प्रगति भी बताई जाए।
पत्रकार वार्ता में गढ़वाल सभा के सचिव गजेंद्र भंडारी, राष्ट्रीय रीजनल पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना इष्टवाल, उक्रांद प्रवक्ता शांति भट्ट, ज्ञान विज्ञान समिति से उमा भट्ट, उत्तराखंड समानता पार्टी के राष्ट्रीय महासिचव टीएस नेगी और अखिल भारतीय समानता मंच के प्रदेश अध्यक्ष विनोद धस्माना सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
#dehradun #ankitabhandaricase #uttarakhand

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अंकिता भंडारी के माता-पिता पहले ही बहुत कुछ झेल चुके हैं, वो अभी भी असहनीय पीड़ा में हैं, उन पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उनका दिल और मत दुखाओ!
अंकिता की माँ ने कहा - "जिस VIP के लिए मेरी बेटी की जान ली गई, उसे हमारे सामने लाया जाए। हम भी उस VIP को देखें — आखिर कौन है वो, जिसके कारण मेरी अंकिता आज हमारे बीच नहीं है।"
वो आगे बोलती हैं कि हम माँ-बाप हैं ना! हमको तो अपनी औलाद से बढ़कर कुछ नहीं है। हम तो बोलते हैं कि अगर इसमें हमारी जान भी चली जाए तो हमें कोई गम नहीं। क्योंकि हमारी बेटी ने हमारे साथ रहते हुए गरीबी के दिन देखे, बहुत दुख झेले। जब उसके सुखी के दिन आने वाले थे, तो आप सबको पता है। हमने उसका बचपन देखा है, हमारे बच्चे एक छोटी सी चीज के लिए भी तरसे हैं, लेकिन आज हम इतने दुखी हैं कि हम बोल भी नहीं पाते हैं। उसके भाई ने अब तक राखी नहीं बांधी और तब तक नहीं बांधेगा, जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिल जाता। हम भी इसीलिए कोई त्यौहार नहीं मनाते। जब हमारी बेटी ने अपनी आखिरी सांस तक अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया, तो हम कैसे कर सकते हैं!"
आगे वो कहते हैं कि हमारी बेटी तो चली गई, वो अब लौटकर वापस नहीं आएगी। लेकिन ये लड़ाई हम उन बेटियों के लिए लड़ रहे हैं, जो घर से दूर पढ़ने-लिखने, नौकरी करने जाएंगी, और उनके साथ ऐसा न हो, जैसा हमारी अंकिता है साथ हुआ।"
सीएम से मुलाकात के बाद अंकिता के माता–पिता ने अपना दुःख व्यक्त करते हुए बताया कि कुछ लोग उन पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं कि वो बिक गए!
ऐसा नहीं है कि उन पर कभी कोई दबाव नहीं बनाया गया होगा, लेकिन जिनकी बेटी ने म-रते दम तक समझौता नहीं किया, उसके माँ-बाप भी कभी समझौता नहीं कर सकते।

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