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#श्री_मलयनाथ_स्वामी_मंदिर, डीडीहाट, पिथौरागढ़
👉 उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में डीडीहाट के निकट स्थित श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर कुमाऊँ क्षेत्र का एक प्राचीन एवं प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इसे #सिराकोट_मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ से हिमालय की सुंदर चोटियों और आसपास की घाटियों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।

👉 स्थापना एवं ऐतिहासिक महत्व: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर की स्थापना चंद अथवा रैका राजाओं के शासनकाल में हुई थी। ऐतिहासिक विवरणों में सिराकोट स्थित इस प्राचीन मंदिर का संबंध डोटी के रैका राजाओं से भी जोड़ा जाता है। मंदिर क्षेत्र कुमाऊँ की प्राचीन राजवंशीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

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#गर्जिया_माता_मंदिर, रामनगर, नैनीताल
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में रामनगर के निकट स्थित गर्जिया माता मंदिर कुमाऊँ क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर रामनगर से लगभग 14 किलोमीटर दूर कोसी नदी के बीचों-बीच एक विशाल चट्टानी टीले पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है।
पौराणिक एवं धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गर्जिया माता को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। हिमालयराज की पुत्री होने के कारण माता पार्वती का एक नाम गिरिजा भी है। श्रद्धालु माता को शक्ति, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजते हैं। मंदिर में माता के दर्शन करने के बाद समीप स्थित भैरव बाबा के दर्शन करना भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि भैरव बाबा की पूजा के बिना माता की आराधना अधूरी मानी जाती है।

एक लोकमान्यता के अनुसार, पुराने समय में मंदिर के आसपास शेर की गर्जना सुनाई देती थी और लोगों ने उसे टीले की परिक्रमा करते हुए भी देखा था। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से माता के दर्शन और प्रार्थना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवविवाहित दंपति सुखी वैवाहिक जीवन तथा संतान की कामना करने वाले श्रद्धालु भी यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

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श्री गोल्ज्यू दरबार
"जो दुनिया से हारा, उसे यहां मिला सहारा"
गोल्ज्यू (गोलू देवता) को न्याय का देवता कहा जाता है, लाखों लोगों की मान्यता है कि जब उन्हें कहीं न्याय नहीं मिला तब गोल्ज्यू के दरबार में आकर अर्जी लगाई, तब उनके साथ असल में न्याय हुआ।
गोल्ज्यू देवता के दरबार में हजारों लोग न्याय की उम्मीद में चिट्ठियां लिखकर लटका जाते हैं और जब उनकी मुराद पूरी हो जाती है तो श्रद्धानुसार उनके दरबार में घंटियां चढ़ा कर जाते हैं।
गोल्ज्यू देवता के दरबार में सजी हजारों घंटियां इस बात का सबूत है कि इस दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटा।
किसी की औलाद की मुराद पूरी हुई तो किसी को मनवांछित जीवन साथी मिला तो किसी का रुका हुआ काम बन गया।
गोलू देवता सभी की न्यायोचित मनोकामना पूरी करते हैं।

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1. राजपूताना राइफल्स इंडियन आर्मी की सबसे पुरानी और सम्मानित राइफल रेजिमेंट है, इसे 1921 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तौर पर विकसित किया गया था। साल 1945 से पहले इसे 6 राजपूताना राइफल्स के तौर पर जाना जाता था, क्योंकि इसे तब की ब्रिटिश इंडियन आर्मी के 6 रेजिमेंट्स के विलय के बाद बनाया गया था। राजपूताना राइफल्स को मुख्य रूप से पाकिस्तान के साथ युद्ध के लिए जाना जाता है। .

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वीर भोग्य वसुन्धरा, जय राजपूताना
"राजपूताना राइफल्स" बस नाम ही काफी है।

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हरियाणा के जिला पलवल के गाँव राजूपुर की होनहार बेटी एडवोकेट दिव्या राठौड़ जी, पुत्री श्री अजय राठौड़, ने हरियाणा में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADA) के पद पर चयनित होकर अपने परिवार, गाँव और समाज का गौरव बढ़ाया है।
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। दिव्या जी की सफलता क्षेत्र की अन्य बेटियों और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
समाज की बेटियाँ आज शिक्षा और मेहनत के दम पर हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। दिव्या जी की यह सफलता निश्चित रूप से नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा देगी।
एडवोकेट दिव्या राठौड़ जी को इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की अनंत शुभकामनाएँ।

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शुभ समाचार - काशी को मिला वस्त्रों का नया आधुनिक उद्योग।
खोचवां, मिर्जामुराद में गुजरात की प्रमुख वस्त्र निर्माता कंपनी अरविंद लिमिटेड (अरविंद मिल्स) के नए गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का 25 अक्टूबर 2026 को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी ने उद्घाटन किया।
लगभग ₹150 करोड़ के निवेश से स्थापित यह औद्योगिक इकाई काशी और पूरे पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को नई गति देने की क्षमता रखती है।
फैक्ट्री में पहले चरण में 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है और 300 से अधिक महिलाओं की भर्ती कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आगे विस्तार होने पर रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे।
स्थानीय महिलाओं को घर के आसपास काम करने, तकनीकी हुनर सीखने और अपनी नियमित आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
यहां स्पोर्ट्सवियर, टी-शर्ट, जैकेट, अंडरगारमेंट और अन्य परिधानों का निर्माण होगा। जॉकी, यूएस पोलो, एरो सहित विभिन्न ब्रांडों के लिए उत्पादन से वाराणसी में कपड़ा एवं परिधान उद्योग का आधार मजबूत होगा।
फैक्ट्री के संचालन से परिवहन, पैकेजिंग, माल ढुलाई, भोजन, किराये के आवास और अन्य सहायक सेवाओं की मांग बढ़ेगी। इससे आसपास के छोटे व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं को भी लाभ मिलेगा।
मशीन संचालन, सिलाई, गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादन प्रबंधन और अन्य तकनीकी कार्यों का अनुभव मिलने से स्थानीय युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह पूर्वांचल की पहली बड़ी परिधान विनिर्माण इकाइयों में से एक है। इसके विस्तार और सहायक उद्योगों के विकास से क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगे और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का रास्ता मिलेगा। इससे पूर्वांचल के लोगों के लिए रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन करने की आवश्यकता कम होगी।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी के दूसरे चरण का विस्तार भी प्रस्तावित है। हालांकि, रोजगार और आर्थिक लाभ का वास्तविक स्तर फैक्ट्री के उत्पादन, विस्तार और स्थानीय भर्ती पर निर्भर करेगा।
अरविंद मिल्स की यह फैक्ट्री काशी में रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास और औद्योगिक निवेश की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि इसके साथ स्थानीय युवाओं का प्रशिक्षण और सहायक उद्योगों का विकास भी होता है, तो इसका लाभ वाराणसी से आगे पूरे पूर्वांचल तक पहुंचेगा।
काशी के साथ-साथ पूरे पूर्वांचल के युवाओं को यह ऐतिहासिक उपहार देने के लिए धन्यवाद मोदी जी!

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