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Join us in celebrating the spirit of freedom at every doorstep!
Let’s paint the nation in the colours of unity.

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For the first time in India's Independence Day history, Vande Mataram will be sung from the Red Fort on August 15.

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यहाँ हर हवा का झोंका कंडोलिया ठाकुर के आशीर्वाद का एहसास कराता है।
न्याय के देवता कंडोलिया महाराज 🙏

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उत्तराखंड की महिलाओं के लिए बड़ा तोहफा! 🚌💐

स्वतंत्रता दिवस पर उत्तराखंड सरकार महिलाओं को बड़ी सौगात दे सकती है। प्रदेश की रोडवेज की साधारण बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की तैयारी चल रही है। इसके लिए रोडवेज प्रबंधन की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो प्रदेश की हजारों महिलाओं और छात्राओं को रोजाना सफर में बड़ी राहत मिलेगी। रोडवेज की करीब 900 बसों में प्रतिदिन लगभग सवा लाख यात्री सफर करते हैं, जिनमें करीब 50 हजार महिलाएं और छात्राएं शामिल हैं।

महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की मांग लंबे समय से उठती रही है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर सरकार की ओर से इस संबंध में घोषणा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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दो भाई..दोनों तबाही...🤣😂🤣😛😎

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जहां बड़े भाई योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं, वहीं शैलेंद्र मोहन ने देशसेवा का रास्ता चुना। वह लंबे समय से भारतीय सेना की गढ़वाल रेजिमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कुछ साल पहले उन्हें सूबेदार से पदोन्नत कर सूबेदार मेजर बनाया गया था। गढ़वाल रेजिमेंट में सूबेदार मेजर वरिष्ठतम गैर-कमीशंड/जूनियर कमीशंड नेतृत्व पदों में से एक है। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले वह उत्तराखंड के माणा क्षेत्र में भी तैनात रह चुके हैं।
शैलेंद्र मोहन ने बचपन से ही देशसेवा का सपना देखा था और सेना में शामिल होकर उन्होंने उस सपने को सच कर दिखाया।
बड़ा भाई राजनीति में, छोटा भाई सरहद और सेना की वर्दी में—देशसेवा का जज़्बा वाकई परिवार से भी बड़ा होता है। 🇮🇳🙏
#indianarmy #garhwalrifles #subedarmajor #shailendramohanbisht #yogiadityanath

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी पीड़ितों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने देश के विभाजन के दौरान असहनीय पीड़ा और अकल्पनीय त्रासदियों का सामना किया।

कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व की नीतिगत भूलों और सत्ता की राजनीति ने माँ भारती की अखंडता और स्वाभिमान को गहरी चोट पहुँचाई। इसका दंश करोड़ों लोगों ने नरसंहार, विस्थापन और अपनों से बिछड़ने के रूप में सहा।

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