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देवप्रयाग संगम
पाप शरीर नहीं करता “विचार” करते है
और गंगा “विचारों” को नहीं शरीर को धोती है 💯
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राजस्थान का इतिहास वीरता और त्याग की स्याही से लिखा गया है, लेकिन हाड़ी रानी का बलिदान उन सबमें स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। एक ऐसी घटना जिसने पत्नी प्रेम पर मातृभूमि के कर्तव्य को सर्वोच्च साबित किया।
यह अमर गाथा है बूंदी की बेटी और मेवाड़ (सलुम्बर) के रावत चुण्डावत जी की हाड़ी रानी की।
विवाह को अभी मात्र सात दिन ही हुए थे, हाथों की मेहंदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था कि मेवाड़ रक्षार्थ युद्ध का बुलावा आ गया। नई-नवेली दुल्हन के मोह में बंधे रावत जी का मन युद्धभूमि में जाने से हिचक रहा था। रानी ने पति को उनका क्षत्रिय धर्म याद दिलाया और युद्ध के लिए प्रेरित किया।
नायक नीरज कुमार सिंह (अशोक चक्र): जब राइफल छूट गई, तो नंगे हाथों से आतंकी को मार गिराया!
2014 में कुपवाड़ा (कश्मीर) में '57 राष्ट्रीय राइफल्स' (राजपूताना राइफल्स) के नायक नीरज कुमार सिंह आतंकियों से भिड़ गए।
उनके सीने में गोली लगी और उनकी राइफल हाथ से छूट गई! लेकिन राजपूती खून का उबाल देखिए- वे निहत्थे ही खूंखार आतंकी पर झपट पड़े और उसे नंगे हाथों से मौत के घाट उतार दिया! इस अदम्य साहस के लिए उन्हें शांति काल के सर्वोच्च सम्मान 'अशोक चक्र' से नवाजा गया।