01 September 1965 | When nation calls the IAF responds with precision.

On this day in 1965, Air Marshal Arjan Singh ordered air strikes against the Pakistan Forces. Just before sunset, 26 IAF fighter-****ers - 12 Vampires of No. 45 Squadron and 14 Mystères of Nos. 3 & 31 Squadrons, took off from Pathankot for the Chhamb sector.
The mission marked the beginning of Indian air action, with the IAF destroying 10 tanks, 2 anti-aircraft ****s and 30-40 Pakistani Army vehicles.

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AERO INDIA 2027 IS TAKING FLIGHT!
Asia’s largest Air Show returns to Air Force Station Yelahanka, Bengaluru, from 8-12 February 2027.
Exhibitor Registrations Open 3 September 2026! Registrations will be available through the dedicated Aero India website: www.aeroindia.gov.in.
The 16th edition of Aero India will build on its illustrious legacy, bringing together global aerospace and defence leaders to unlock new opportunities for collaboration, innovation, partnerships and growth.
Mark your calendars. Aero India 2027 awaits!
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हरयाणा में महर्षि दयानंद जी का शुभ आगमन
महर्षि दयानंद जी पंजाब में वेद व्याख्यान के पश्चात वापस लौट रहे थे , तो १७ जुलाई , १८७८ को वे अम्बाला रुके थे । यद्यपि वे अधिक समय वहाँ नहीं ठहरे , पर अपने स्वल्प निवास का उपयोग उन्होंने धर्मचर्चा में किया , जिससे अम्बाला के लोग बहुत प्रभावित हुए । पर अभी वहाँ आर्यसमाज की स्थापना नहीं हुई । अम्बाला के अतिरिक्त हरयाणा का केवल एक नगर और था , जहाँ महर्षि ने पदार्पण किया था । यह नगर रिवाड़ी था , जहाँ महर्षि जयपुर से दिल्ली आते हुए २५ दिसम्बर , सन् १८७८ को पधारे थे , और जहाँ उन्होंने ९ जनवरी , १८७९ तक निवास किया था । हरयाणा में केवल रिवाड़ी को ही यह गौरव प्राप्त है , कि वहाँ महर्षि दो सप्ताह से भी कुछ अधिक समय ठहरे और वहाँ उन्होंने वैदिक धर्म के प्रचार के लिए अनेक व्याख्यान दिये । लार्ड लिटन ने १ जनवरी , १८७७ को दिल्ली में जो दरबार आयोजित किया था , रिवाड़ी के प्रतिष्ठित रईस व जागीरदार राव युधिष्ठिरसिंह भी उसमें गये थे । महर्षि भी उस अवसर पर दिल्ली पधारे हुए थे । राव युधिष्ठिर सिंह ने उनसे भेंट की और उनके प्रवचनों को सुनकर तथा उनसे बातचीत कर बहुत प्रभावित हुए । उन्होंने महर्षि से रिवाड़ी पधारने के लिए भी अनुरोध किया । उस समय तो महर्षि रिवाड़ी नहीं जा सके , पर राव युधिष्ठिरसिंह के बार - बार जोर देने पर वे सन् १८७८ के अन्त में वहाँ गये , और अपने दो सप्ताह के लगभग के निवास में उन्होंने वहाँ ११ व्याख्यान दिये । राव युधिष्ठर सिंह ने अपने सम्बन्धियों तथा उस क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को महर्षि के व्याख्यान सुनने के लिए आग्रहपूर्वक निमन्त्रित किया था , जिसके परिणामस्वरूप रिवाड़ी तथा उसके समीप वर्ती प्रदेश में वैदिक धर्म के प्रति लोगों में आस्था उत्पन्न हो गई थी । राव युधिष्ठिर सिंह स्वयं भी महर्षि के अनुयायी बन गये थे , और पण्डित ठाकुरसिंह आदि अपने सहयोगियों के साथ वैदिक धर्म का प्रचार करने के लिए तत्पर हो गये थे ।

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सशस्त्र बलों में नारी शक्ति का कीर्तिमान
भारतीय वायुसेना (IAF) में नारी शक्ति ने एक नया और स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। वरिष्ठ अधिकारी शक्ति शर्मा को एयर वाइस मार्शल (AVM) के टू-स्टार पद पर पदोन्नत किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) के रूप में पदभार संभाला है।
इस प्रतिष्ठित और उच्च सैन्य पद तक पहुंचने वाली वह एजुकेशन ब्रांच की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। अपने शानदार करियर के दौरान शक्ति शर्मा ने वायुसेना की शैक्षणिक नीति, ट्रेनिंग और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टू-स्टार रैंक हासिल करने की उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि न सिर्फ भारतीय सशस्त्र बलों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि देश की लाखों बेटियों के लिए रक्षा क्षेत्र में ऊंचे मुकाम हासिल करने का नया हौसला भी है।
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