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अक्सर कहा जाता है कि शादी और मातृत्व के बाद महिलाओं के सपने पीछे छूट जाते हैं। लेकिन हरियाणा की चेतना सैनी ने इस सोच को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना दिया।
कम उम्र में बॉक्सिंग शुरू करने वाली चेतना का करियर शादी और दो बच्चों की ज़िम्मेदारियों के कारण लगभग 5 साल के लिए रुक गया। कई लोगों को लगा कि अब उनकी रिंग में वापसी मुश्किल है। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
परिवार के सहयोग, अनुशासन और अपनी अटूट मेहनत के दम पर चेतना ने दोबारा ट्रेनिंग शुरू की। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी फिटनेस और खेल दोनों में वापसी की और खुद को फिर से साबित किया।
28 जून 2026 को नई दिल्ली में Gloves Games द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रोफेशनल मुकाबले में चेतना ने थाईलैंड की ख्वुनचित खुन्या को हराकर अपने प्रोफेशनल करियर की 8वीं जीत दर्ज की।
इस शानदार जीत के साथ वह भारत की नंबर-1 प्रोफेशनल महिला मुक्केबाज़ बन गईं।चेतना सैनी की यह उपलब्धि सिर्फ़ एक खेल जीत नहीं है। यह उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो परिवार और ज़िम्मेदारियों के बीच भी अपने सपनों को ज़िंदा रखती हैं।
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पृथ्वी पर पड़े बारह वर्षों के भीषण अकाल के दौरान, जब नदियाँ और जलाशय सूख गए थे और चारों ओर हाहाकार मचा था, तब एक किसान चिलचिलाती धूप में अपनी बंजर ज़मीन पर हल जोत रहा था। वहां से गुज़र रहे भगवान शिव और माता पार्वती ने जब उसे देखा, तो वे आश्चर्यचकित रह गए।

पार्वती जी के पूछने पर कि बिना वर्षा के हल चलाने का क्या लाभ, शिव जी ने बताया कि किसान केवल इसलिए हल चला रहा है ताकि वह लंबे अकाल के कारण हल चलाने का अभ्यास न भूल जाए। किसान की इस अटूट निष्ठा और तर्क को जानकर माता पार्वती ने एक चतुर युक्ति अपनाई। उन्होंने शिव जी से कहा कि कहीं इतने वर्षों तक वर्षा न करने के कारण आप भी अपना शंख बजाना न भूल गए हों।

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