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तमिलनाडु के लाइब्रेरियन पालम कल्याणसुंदरम ने अपनी 35 साल की नौकरी की पूरी सैलरी, पेंशन और पुरस्कारों की राशि सहित कुल 30 करोड़ रुपये गरीब और अनाथ बच्चों के लिए दान कर दिए हैं। इस वजह से उन्हें 'भारत का सबसे अमीर गरीब' कहा जाता है।
1940 में तिरुनेलवेली के एक पिछड़े गांव में जन्मे कल्याणसुंदरम ने बचपन में ही अन्य गरीब बच्चों की स्कूल फीस और किताबों का खर्च उठाना शुरू कर दिया था। लाइब्रेरी साइंस में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्हें कॉलेज में लाइब्रेरियन की सरकारी नौकरी मिली थी। अपनी पूरी कमाई दान करने के बाद, खुद का पेट पालने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए वे अपनी नौकरी के बाद होटलों और लॉन्ड्री में काम करते थे।
इसके अलावा, 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भी प्रधानमंत्री की अपील पर उन्होंने देश की मदद के लिए अपनी सोने की चेन तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज को दान कर दी थी। कल्याणसुंदरम ने अपनी माँ की सीख पर चलते हुए अपना पूरा जीवन दूसरों की मदद में लगा दिया।
बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बेरी ने एक हालिया पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें 'भगवान विष्णु का अवतार' बताया है। बेरी ने कहा कि वह पीएम मोदी से कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिले हैं, लेकिन उनके मन में प्रधानमंत्री के लिए असीम श्रद्धा है। उन्होंने इच्छा जताई कि यदि मौका मिले, तो वह पीएम मोदी के पैर धोकर पानी पीना चाहेंगे, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने कभी सम्मान में अपनी मां के लिए किया था।
इसके साथ ही, 'बॉर्डर' फेम एक्टर ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की आलोचना करते हुए जंतर-मंतर पर उनके विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। बेरी ने कहा कि विरोध करने के बजाय लोगों को जनसेवा, जैसे बच्चों के लिए पार्क और बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम बनाने पर ध्यान देना चाहिए। पीएम मोदी का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि एक चाय बेचने वाले ने दुनियाभर की यात्रा की है। इसके अलावा, बेरी ने कहा कि भारत में 'राम राज्य' आ गया है और अमित शाह, अजित डोभाल व सीएम योगी आदित्यनाथ देश की तरक्की के लिए काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में 'एंटी-पेपर लीक बिल' के पारित होने के बाद इंस्टाग्राम पर छात्रों और युवाओं के लिए एक नया सेल्फी वीडियो संदेश जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने बिल के पास होने की सराहना करते हुए कहा कि यह नया कानून देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाएगा।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस सख्त कानून के लागू होने के बाद किसी भी 'पेपर लीक माफिया' या गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसके तहत एक विशेष टास्क फोर्स का गठन, मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना और राज्यों से सुझाव लेने जैसे अहम उपाय शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक की समस्या ने वर्षों से केंद्र और कई राज्यों को प्रभावित किया है। इस नए बिल के जरिए परीक्षाओं में सेंधमारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।
नीट पेपर लीक विवाद के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। दीपके ने आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में पुलिस छात्रों के घर जाकर उन्हें हिरासत और गिरफ्तारी का डर दिखाकर परेशान कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र केवल तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से संतुष्ट नहीं हैं और पूरी सरकार से नाराज हैं। दीपके के अनुसार, अगर भविष्य के निर्माताओं (छात्रों) का उत्पीड़न इसी तरह जारी रहा, तो वे सरकार बदलने की ताकत भी रखते हैं।
इसके साथ ही, सीजेपी दिल्ली सरकार की उस घोषणा से भी असंतुष्ट है जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड या हिंसा में शामिल छात्रों पर कानूनी कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है। सीजेपी की मांग है कि बिना किसी शर्त के सभी छात्रों से एफआईआर वापस ली जाएं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि पुलिस इस शर्त का दुरुपयोग कर सकती है। मांगें पूरी न होने पर सीजेपी ने दोबारा विरोध-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को सदन में नीट (NEET) पेपर लीक मामले पर अपना बयान दिया। उन्होंने छात्रों और उनके परिवारों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का गुस्सा, दर्द और शिकायत पूरी तरह जायज है।
चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक होने से सिर्फ पर्चा ही आउट नहीं होता, बल्कि छात्रों की सालों की मेहनत, भरोसा और सपने भी टूटते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान केवल मीडिया बयानों से नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत बदलावों से ही होगा।
इसके साथ ही उन्होंने नए बिल के जरिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की तारीफ की। चड्ढा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक अभिभावक की तरह छात्रों की चिंताएं सुनीं और व्यवस्था में सुधार के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वह एक पूर्व सीए (CA) छात्र रहे हैं, इसलिए वह परीक्षार्थियों के दर्द और उनके परिवारों द्वारा किए गए भारी आर्थिक और सामाजिक समझौतों को गहराई से समझते हैं।