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कड़कड़ाती ठंड में भी उदिता त्यागी का आमरण अनशन जारी, मोदी सरकार से UGC नियमों की वापसी की मांग!
क्या आप डॉ. उदिता त्यागी का समर्थन करते है ?

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गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत: असली दोषी कौन?

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ये ओबीसी का मुख्यमंत्री है या MP का???
ये मोदी के मोहन है जो हिंदू एकता की बात कर रहे है।

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UGC के नए नियमों को लेकर पूर्व WFI चीफ और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि इस कानून को वापस लिया जाए. बृजभूषण शरण सिंह ने कहा यूजीसी का कानून समाज को बांटने का काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि समाज ऑफिस में बैठकर नहीं चलता. समाज को चलाना है तो गांव आइए. समाज कागजी कानूनों से नहीं चलता. उन्होंने आगे कहा कि गांव में आकर देखिए बिना किसी भेदभाव और जातीय रंग के बच्चे एक साथ खेलते हैं. कोई भी बच्चा किसी की जाति के बारे में नहीं पूछता.
#ugcregulations #ugcrules #brijbhushansharansingh

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गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत: असली दोषी कौन?

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राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित एक सरकारी स्कूल में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया. यहां स्कूल में खेलते समय तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 9 वर्षीय छात्र राधेश्याम की आंखों में गलती से फेवीक्विक गिर गया. मासूम ने जलन के कारण आंखों को मसल दिया, जिससे दोनों आंखों की पलकें कुछ ही देर में बुरी तरह चिपक गईं. बच्चे के रोने-चिल्लाने पर स्कूल स्टाफ ने उसे संभाला और तुरंत परिजनों को सूचना दी.
सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजन राधेश्याम को कुशलगढ़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे. जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया. हालत गंभीर होने और नेत्र ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने के चलते डॉक्टरों ने बच्चे को उदयपुर स्थित एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया. डॉक्टरों के अनुसार फेवीक्विक के केमिकल के कारण पलकें मजबूती से चिपक गई थीं.

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Radha Krishna Radha Krishna

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अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने की मजबूरी में इस माँ ने सिर्फ़ 150 रुपये में अपने बाल बेच दिए। सोचिए—एक माँ अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए अपनी पहचान तक कुर्बान कर देती है। यह कहानी गरीबी की नहीं, माँ की ममता, त्याग और हिम्मत की है। अगर इंसानियत आज भी ज़िंदा है, तो ऐसी माँओं को नज़रअंदाज़ मत कीजिए—उन्हें सम्मान दीजिए, समझिए और संवेदना दिखाइए। 🙏

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