image

image

imageimage

image
2 d - Translate

यह आदमी 21 किलो मीटर लंबी गोवर्धन यात्रा पर निकला हुआ है।

ये 1008 पत्थर साथ लेकर चल रहे हैं ये इसी तरह एक बार में सारे पत्थरों को चूमने के बाद ही एक कदम आगे बढ़ते हैं — ऐसा करते हुए इन्हें 8 साल गुजर गया है।

आपके हिसाब से ये, "आस्था है या मूर्खता"

image
2 d - Translate

पूरे परिवार को ऐसे ही साथ रखें 🤲
सभी लोग मेरे दादा जी के लिए दुआ करे

image
2 d - Translate

मोदी जी सभी से करते प्रेम😋😋

image
2 d - Translate

हर हर महादेव 🥰👏
बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के कैथवलिया में विराट रामायण मंदिर परिसर में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना किया गया कल 17 जनवरी 2026 को ही इसकी प्राण-प्रतिष्ठा और स्थापना का मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ
इस शिवलिंग और मंदिर से जुड़ी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. शिवलिंग की भव्यता और माप
ऊंचाई और गोलाई: इस शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट और इसकी गोलाई (परिधि) भी 33 फीट है।
वजन: इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन (2.10 लाख किलोग्राम) है।
सहस्त्रलिंगम: इसे 'सहस्त्रलिंगम' कहा जा रहा है क्योंकि इस एक मुख्य शिवलिंग पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं।
2. निर्माण और सामग्री
दुर्लभ पत्थर: यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही विशाल काले ग्रेनाइट पत्थर (मोनोलिथ) को तराश कर बनाया गया है।
निर्माण का समय: इसे बनाने में कारीगरों को लगभग 10 साल का समय लगा है।
यात्रा: इसे तमिलनाडु से बिहार तक लगभग 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करके एक विशेष 96 पहियों वाले विशाल ट्रक (ट्रेलर) से लाया गया है।
#harharmahadev #fbviral #fbviralpost #goviral #nonfollower

image
2 d - Translate

हर हर महादेव 🥰👏
बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के कैथवलिया में विराट रामायण मंदिर परिसर में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना किया गया कल 17 जनवरी 2026 को ही इसकी प्राण-प्रतिष्ठा और स्थापना का मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ
इस शिवलिंग और मंदिर से जुड़ी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. शिवलिंग की भव्यता और माप
ऊंचाई और गोलाई: इस शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट और इसकी गोलाई (परिधि) भी 33 फीट है।
वजन: इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन (2.10 लाख किलोग्राम) है।
सहस्त्रलिंगम: इसे 'सहस्त्रलिंगम' कहा जा रहा है क्योंकि इस एक मुख्य शिवलिंग पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं।
2. निर्माण और सामग्री
दुर्लभ पत्थर: यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही विशाल काले ग्रेनाइट पत्थर (मोनोलिथ) को तराश कर बनाया गया है।
निर्माण का समय: इसे बनाने में कारीगरों को लगभग 10 साल का समय लगा है।
यात्रा: इसे तमिलनाडु से बिहार तक लगभग 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करके एक विशेष 96 पहियों वाले विशाल ट्रक (ट्रेलर) से लाया गया है।
#harharmahadev #fbviral #fbviralpost #goviral #nonfollower

image