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हमें गर्व है 🚩
आज पूरी दुनिया में हालात ठीक नहीं चल रहे हैं। कहीं युद्ध है, कहीं सरकारें गिर रही हैं, कहीं जनता परेशान है।
ईरान में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर बाहर जाना पड़ा।
नेपाल कई सालों से राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
पाकिस्तान का एक पूर्व प्रधानमंत्री जेल में है और वहां की अर्थव्यवस्था बहुत कमजोर हालत में है।
यूक्रेन में युद्ध चल रहा है और वहां की सरकार सुरक्षित जगहों से काम कर रही है।
वेनेजुएला में हालात इतने खराब हैं कि वहां की पूरी व्यवस्था डगमगा गई है।
लेकिन इन सबके बीच भारत की स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
यहां लोग अपने त्योहार मना रहे हैं, ठंड में अलाव जला रहे हैं, पतंग उड़ा रहे हैं, परिवार के साथ बैठकर खाना खा रहे हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।
यहां बाजार खुले हैं, स्कूल चल रहे हैं, लोग काम पर जा रहे हैं और भविष्य को लेकर डर नहीं है।
यह सब अपने आप नहीं हो गया।
इसके पीछे देश में बनी स्थिर सरकार, मजबूत व्यवस्था और सही दिशा में लिए गए फैसले हैं।
एक ऐसा नेतृत्व जिसने देश को आगे रखने की कोशिश की और सुरक्षा, विकास और सम्मान पर ध्यान दिया।
जब देश में स्थिरता होती है, तब ही आम आदमी चैन से जी पाता है।
और आज भारत में यही देखने को मिल रहा है।#narendrmodiindia
ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਤਖ਼ਤ ਸਾਹਿਬ ਸਕੱਤਰੇਤ ਵਿਖੇ ਪੇਸ਼ ਹੋਏ CM ਭਗਵੰਤ ਮਾਨ
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पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का अमृतसर आगमन पर स्वागत किया
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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने एक वीडियो जारी कर 'धर्म की राह' छोड़ने का ऐलान किया है। महाकुंभ 2025 से चर्चा में आईं हर्षा ने कहा कि धर्म के रास्ते पर चलते हुए उन्हें लगातार विरोध और चरित्र हनन का सामना करना पड़ा, जिससे उनका मनोबल टूट गया। उन्होंने वीडियो में स्पष्ट कहा, "मैं कोई मां सीता नहीं हूं कि अग्नि परीक्षा दूंगी।"
हर्षा ने बताया कि लोग उन्हें करोड़पति समझते हैं, लेकिन असल में वह कर्ज में हैं। अब वह अपने पुराने एंकरिंग और मॉडलिंग के पेशे में वापस लौट रही हैं, जहां वह खुश थीं। उन्होंने घोषणा की है कि इस मौनी अमावस्या पर माघ मेले में स्नान के साथ वह अपने धर्म के संकल्प को विराम देंगी।
भीगी मूंगफली 🥜
🌿 Ayurved Reason:
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आयुर्वेद में मूंगफली को बल्य (ताकत देने वाली) और वात-शामक माना गया है। भिगोने से इसकी गुरु (भारी) प्रकृति हल्की हो जाती है, जिससे अग्नि सही रहती है और गैस कम बनती है!
🔬 Scientific Reason:
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भीगी मूंगफली में प्लांट प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं! भिगोने से फाइटिक एसिड घटता है, जिससे पाचन आसान होता है!
❤ फायदे:
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✅गैस और एसिडिटी में कमी
✅लंबे समय तक एनर्जी
✅कब्ज में राहत
✅मसल्स और दिमाग को पोषण
✅ब्लड शुगर बैलेंस में मदद
⚠️ नुकसान:
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❌ज़्यादा मात्रा में खाने से वजन बढ़ सकता है
❌एलर्जी वालों के लिए नुकसानदायक
❌कमजोर पाचन वाले लोग सीमित मात्रा लें
👉मूंगफली गुरु (भारी) - स्निग्ध (चिकनी)
होती है
👉 कफ प्रकृति वालों में बलगम ,सुस्ती
👉 हमेशा भिगोकर कम से कम 5 घंटे भिगोय, और सुबह कम मात्रा में खूब चबाकर खाएँ!
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पूर्व WWE रेसलर और 'वीर महान' के नाम से मशहूर रिंकू सिंह राजपूत अब वृंदावन में प्रेमानंद महाराज की शरण में सादगी भरा आध्यात्मिक जीवन बिता रहे हैं. ग्लैमर और ताकत की दुनिया छोड़कर रिंकू अब आश्रम में सेवा करते हैं और महाराज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं.
हाल ही में प्रेमानंद महाराज ने एक प्रवचन में रिंकू का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे संयम से जीवन बदला जा सकता है. उन्होंने खुलासा किया कि 6 फुट 4 इंच लंबे और 125 किलो वजनी रिंकू, जो पहले 30-35 रोटियां खाते थे, अब पूरे दिन में मात्र डेढ़ रोटी खाते हैं. इसके अलावा, उनकी नींद भी घटकर अब केवल 3 घंटे रह गई है, फिर भी वे पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हैं. महाराज के अनुसार, यह बदलाव उनकी साधना और इच्छाशक्ति का परिणाम है.
वीर भड़ माधो सिंह भंडारी 🚩 उत्तराखंड की मिट्टी का वो शेर, जिसकी दहाड़ से तिब्बत कांपा और जिसकी सोच से सूखे खेत लहलहा उठे 🌾⚔️
लगभग 1595 ई., मलेथा (टिहरी, उत्तराखंड) में जन्मे
वीर माधो सिंह भंडारी केवल एक योद्धा नहीं थे — वे थे सेनापति, समाजसेवी और अद्भुत इंजीनियर 💪🛠️
👑 गढ़वाल नरेश महीपति शाह के सेनाध्यक्ष रहते हुए
उन्होंने तिब्बती और गोरखा आक्रमणकारियों को कई बार परास्त किया।
दावा और छोटा चीनी के युद्धों में
उनका नाम ही दुश्मनों के लिए डर बन गया ⚔️🔥
💧 मलेथा की गूल — त्याग और तकनीक का चमत्कार
जब गांव में पानी नहीं था,
तो माधो सिंह ने पहाड़ काटकर
225 फीट लंबी सुरंग बना दी — वो भी बिना आधुनिक तकनीक के! ⛰️🔨
किंवदंती कहती है — गांव की भलाई के लिए उन्होंने
अपने इकलौते पुत्र गजेसिंह का बलिदान दे दिया 😔🙏
और तभी सुरंग में पानी बहा…
ऐसा त्याग इतिहास में विरला है।
🎶 उत्तराखंड के पंवाड़ों में आज भी गूंजता है उनका नाम — “एक सिंह रैंदो बण, एक सिंह गाय का।
एक सिंह माधो सिंह, और सिंह काहे का।”
⚔️ वीरगति उन्हें तिब्बत की धरती पर मिली, लेकिन उनका नाम अमर हो गया।
🌸 आज भी —
🪔 मलेथा में माधो सिंह भंडारी मेला
🎉 इगास पर्व उनकी विजय की खुशी में
🎓 UTU का नाम — वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय
वे केवल इतिहास नहीं हैं…
👉 वे गढ़वाल की आत्मा हैं ❤️
👉 त्याग, वीरता और समाज सेवा की जीवित मिसाल हैं।
🙏 वीर भड़ माधो सिंह भंडारी को शत्-शत् नमन
🚩 जय उत्तराखंड | जय गढ़वाल 🚩
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