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यह कहानी है पुणे, महाराष्ट्र की रहने वाली त्रुनिका शिवाजी भुजबल की।
एक मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं त्रुनिका के पिता ITI Electrician हैं और माँ Accountant। उन्होंने अपनी इकलौती बेटी के सपनों को हमेशा उड़ान दी।
आज वह Skyroot Aerospace में Composite Structures Manufacturing पर काम करते हुए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 की टीम का हिस्सा हैं।
यह कहानी बताती है कि सही मौका, परिवार का भरोसा और लगातार मेहनत मिल जाए, तो साधारण घरों से भी देश के अंतरिक्ष मिशन तक का सफर तय किया जा सकता है।
यह कहानी है पुणे, महाराष्ट्र की रहने वाली त्रुनिका शिवाजी भुजबल की।
एक मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं त्रुनिका के पिता ITI Electrician हैं और माँ Accountant। उन्होंने अपनी इकलौती बेटी के सपनों को हमेशा उड़ान दी।
आज वह Skyroot Aerospace में Composite Structures Manufacturing पर काम करते हुए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 की टीम का हिस्सा हैं।
यह कहानी बताती है कि सही मौका, परिवार का भरोसा और लगातार मेहनत मिल जाए, तो साधारण घरों से भी देश के अंतरिक्ष मिशन तक का सफर तय किया जा सकता है।
यह कहानी है पुणे, महाराष्ट्र की रहने वाली त्रुनिका शिवाजी भुजबल की।
एक मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं त्रुनिका के पिता ITI Electrician हैं और माँ Accountant। उन्होंने अपनी इकलौती बेटी के सपनों को हमेशा उड़ान दी।
आज वह Skyroot Aerospace में Composite Structures Manufacturing पर काम करते हुए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 की टीम का हिस्सा हैं।
यह कहानी बताती है कि सही मौका, परिवार का भरोसा और लगातार मेहनत मिल जाए, तो साधारण घरों से भी देश के अंतरिक्ष मिशन तक का सफर तय किया जा सकता है।
