भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को नया जीवन देने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। अडानी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव में गौतम अडानी ने भारत की सभ्यतागत विरासत को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए ₹100 करोड़ देने की घोषणा की। इसे हाल के वर्षों में इंडोलॉजी के क्षेत्र में सबसे महत्वाकांक्षी पहलों में से एक माना जा रहा है।
इस पहल का केंद्र है भारत नॉलेज ग्राफ, जो 5,000 से अधिक वर्षों की भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया के सामने लाने का प्रयास है। इसमें वेद, संस्कृत साहित्य, आयुर्वेद, प्राचीन खगोल विज्ञान, व्याकरण और भारतीय विज्ञान से जुड़े ग्रंथों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा के ज़रिये डिजिटल रूप में संरक्षित और समझने योग्य बनाया जाएगा।
यह परियोजना केवल अतीत को सहेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे आज की पीढ़ी और आने वाले भविष्य से जोड़ने का प्रयास है। शोध, डिजिटल आर्काइव और वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत की बौद्धिक धरोहर को नई प्रासंगिकता दी जाएगी।
गौतम अडानी का संदेश साफ है—अगर हम अपनी जड़ों की रक्षा नहीं करेंगे, तो मशीनें हमारे सोचने का तरीका तय करेंगी। यह पहल याद दिलाती है कि भविष्य तभी मजबूत होता है, जब अतीत को सम्मान और समझ के साथ सहेजा जाए।
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