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सरदार बेअंत सिंह जी की 104 वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने चंडीगढ़ पहुँचे केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू।
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सरदार बेअंत सिंह जी की 104 वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने चंडीगढ़ पहुँचे केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू।
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सरदार बेअंत सिंह जी की 104 वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने चंडीगढ़ पहुँचे केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू।
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कर्नाटक की रहने वाली चांदनी की शादी कर्नाटक के ही युवक से 4 साल पहले होती है। शादी के बाद चांदनी को दो बच्चे भी होते हैं, लेकिन 1 साल पहले चांदनी के पति की मौत हो जाती है।
चांदनी अपना ससुराल छोड़कर मायके आकर रहने लगती है। जब भी उसे खाली वक्त मिलता था वह फ्री फायर खेलना शुरू कर देती थी, इस गेम में उसे गोरखपुर के रहने वाले सोनू से मुलाकात होती है।
दोनों साथ में गेम खेलते खेलते एक दूसरे के बेहद करीब आने लगते हैं, नंबर एक्सचेंज होता है और फिर फोन पर बात भी करने लगते हैं। इनके बीच में जो सबसे बड़ी रुकावट थी वह थी दूरी, क्योंकि कर्नाटक से गोरखपुर की दूरी 2100 किलोमीटर है।
5 महीने तक इस रिश्ते के चलने के बाद दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया। चांदनी ने अपने मां-बाप से झूठ बोलकर अपने दोनों बच्चों को साथ लेकर सीधे दिल्ली पहुंची और वहां पर सोनू को बुलाया।
सोनू के आते ही चांदनी ने अपनी सिम तोड़कर फेंक दी और फिर सोनू के साथ गोरखपुर चली आई।
इधर चांदनी के मां-बाप ने चांदनी और दो बच्चों सहित गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज करवाई, पुलिस खोजते खोजते गोरखपुर पहुंची और चांदनी को खोज निकाला, लेकिन चांदनी ने वापस कर्नाटक जाने से मना कर दिया।
इधर सोनू की मां ने कहा कि जिस चीज में बेटे की खुशी है इस चीज में हमारी भी खुशी है। मेरे सभी बच्चों में सोनू सबसे बड़ा है, जिसकी उम्र उसे 19 साल है और वह समझदार है इसलिए यह फैसला भी उसने समझदारी से लिया होगा। इसके बाद कर्नाटक पुलिस खाली हाथ वापस लौट जाती है।
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हर सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा अनिवार्य है, तो देश चलाने वाले नेताओं के लिए क्यों नहीं? अगर नेता बनने के लिए भी परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक हो जाए, तो देश को शिक्षित प्रतिनिधि और जिम्मेदार नेतृत्व मिलेगा, न कि भाषणबाजी करने वाले और अयोग्य राजनेता। यह सवाल भारतीय संसद में उठाया गया है, और अब जनता स्पष्ट जवाब की मांग कर रही है।
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खेत की जुताई में ट्रैक्टर फंसा तो खुला ‘भक्ति’ का मार्ग, खुदाई में निकला शिवलिंग
[जिला/राज्य] – खेत की जुताई के दौरान ट्रैक्टर के अचानक फंस जाने से शुरू हुई कहानी ने पूरे गांव को भक्ति में डुबो दिया। बताया जा रहा है कि जब किसान ने ट्रैक्टर निकालने के लिए जमीन की खुदाई करवाई, तो मिट्टी के भीतर से शिवलिंग जैसा आकार दिखाई दिया।
देखते ही देखते गांव में यह खबर फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुदाई के दौरान एक घड़ा और पूजा-सामग्री भी मिली, जिसके बाद ग्रामीणों ने इसे आस्था से जोड़ते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
घटना के बाद इलाके में भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया और आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंचने लगे। कुछ लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, तो वहीं प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
फिलहाल प्रशासनिक टीम मामले की जांच कर रही है कि जमीन के भीतर मिले अवशेषों की वास्तविकता क्या है।