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In a significant step to protect the religious sanctity of the holy city, the Ayodhya administration has enforced a strict ban on the sale and delivery of non-vegetarian food and liquor within a 15-km radius of the Ram Janmabhoomi Temple. The order, effective from January 9, 2026, also brings online food delivery platforms under its scope after repeated complaints from locals and pilgrims about meat being transported through the sacred Panchkosi Parikrama route.
Assistant Food Commissioner Manik Chandra Singh stated that all hotels, homestays, and local vendors in the restricted zone have been clearly warned. Any violation—whether physical sale or doorstep delivery—will invite immediate legal action along with cancellation of licenses. While non-veg food and alcohol were already restricted along key stretches such as the 14-km Ram Path, this new “digital boundary” ensures that online deliveries do not bypass the rules.
As Ayodhya continues to grow as a major spiritual centre of India, the move is being seen as a firm effort to preserve its sacred atmosphere. The decision has also sparked discussion nationwide, with many wondering whether other prominent pilgrimage towns may soon adopt a similar “pure zone” model. 🚩🚫🥩
#ayodhyanews #rammandir #nonvegban #ayodhyadham
ये #अश्विनीसोनी टाइप #नास्तिक जिहादी हिदु देवीदेवताओ को मानते ही नही तो ..
तो फिर किस आधार पे ऐसे किसी भी सनातनधर्मी पर उंगली क्यो उठा रहा है
जो की रिद्धिमा सिर्फ ये फूछने गई थी के भाई तूम हमारे मंदिर मे क्यो बैठो हो ..
क्यो तूमने मंदिर को पीर का पोस्टर चिपकाकर झाडफूंक करणा शूरू कर दिया। सिर्फ पुछने पर🧐
ये लोग पवेडे मे पेर दे रहे है इसको किसने कहा है रिद्धिमा के बारे अफवाह फैलाणे केलिए🧐
फिर इनको कोई रेल देगा फिर ये विकटिम कार्ड खेलना शूरू करते है।
मै गोगामेड़ी के बिल्कुल नजदीक के गांव से हु और मैने मेरे बुजुर्गों से यही सुना था कि इन मुसलमानों के पूर्वजों को मन्दिर के बाहर साफ सफाई का कार्य करने के लिए रखा था और पहले पुजारी ब्राह्मण थे लेकिन धीरे धीरे इन मुसलमानों ने उन ब्राह्मण पुजारियों को भगा दिया क्योंकि उन बाह्मण पुजारियों का किसी ने साथ नहीं दिया था ,
लेकिन मेरे दादा जी ने उन ब्राह्मण पुजारियों का साथ दिया था और इन मुस्लिम पुजारियों को मन्दिर से बाहर निकाल दिया था , उस समय बुजुर्गो के जीवट रहते हुए कभी भी इन मुस्लिमों की हिम्मत मन्दिर में घुसने की नहीं हुई ,
लेकिन समय बदल गया और वोटों की राजनीति के कारण कांग्रेस के विधायक ने इनको मन्दिर के अंदर पहुंचा दिया , ओर ब्राह्मणों को बाहर निकाल दिया ,
जब एक अकेली लड़की गोगा जी महाराज के मंदिर में जाती है और वहां के लोगों से पूछता है तुम्हारा नाम क्या है तो एक शख्स गैर हिंदू नाम बताता है जिससे यहां पर सवाल शुरू हो जाता है कि यदि कोई गैर हिंदू मंदिर में आकर और जब मंदिर है और उनका नाम पहले से मार्बल पर गुदा हुआ है जहर वीर गोगा जी महाराज मंदिर है तो इसका मतलब साफ है कि गोगा जी महाराज हिंदू थे और रिद्धिमा के कथन अनुसार वहां पर चादरे चढ़ाई जाती हैं और उन छात्रों पर 786 लिखा होता है यह सब चीज गलत है | उसके बाद वहां पर जो नाम प्लेट है उसे पर जाहर पीर नाम कैसे आया,
#photographychallenge #gogajijharveer #photochallenge #fblifestyle
विश्व गीता संस्थान, मयराष्ट्र (मेरठ) द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों के सामूहिक पारायण महायज्ञ एवं भंडारे का भव्य आयोजन किया गया । इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने, हिंदू एकता को सुदृढ़ करने और समाज में धार्मिक मूल्यों के प्रसार का सशक्त माध्यम रहा। गीता के शाश्वत संदेशों ने सभी उपस्थितजनों को आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित किया। भागवत गीता ओर सनातन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को गीता गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्व गीता संस्थान के संस्थापक श्री राधा कृष्णन जी, श्रीमती तुषा शर्मा जी, श्री विजय भोला जी, डॉक्टर संजय जैन जी, आदि उपस्थित रहे।
विश्व गीता संस्थान, मयराष्ट्र (मेरठ) द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों के सामूहिक पारायण महायज्ञ एवं भंडारे का भव्य आयोजन किया गया । इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने, हिंदू एकता को सुदृढ़ करने और समाज में धार्मिक मूल्यों के प्रसार का सशक्त माध्यम रहा। गीता के शाश्वत संदेशों ने सभी उपस्थितजनों को आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित किया। भागवत गीता ओर सनातन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को गीता गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्व गीता संस्थान के संस्थापक श्री राधा कृष्णन जी, श्रीमती तुषा शर्मा जी, श्री विजय भोला जी, डॉक्टर संजय जैन जी, आदि उपस्थित रहे।
विश्व गीता संस्थान, मयराष्ट्र (मेरठ) द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों के सामूहिक पारायण महायज्ञ एवं भंडारे का भव्य आयोजन किया गया । इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने, हिंदू एकता को सुदृढ़ करने और समाज में धार्मिक मूल्यों के प्रसार का सशक्त माध्यम रहा। गीता के शाश्वत संदेशों ने सभी उपस्थितजनों को आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित किया। भागवत गीता ओर सनातन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को गीता गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्व गीता संस्थान के संस्थापक श्री राधा कृष्णन जी, श्रीमती तुषा शर्मा जी, श्री विजय भोला जी, डॉक्टर संजय जैन जी, आदि उपस्थित रहे।