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नाम पंकज है और पेशे से वह स्विगी में डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम करते हैं। पंकज की ज़िंदगी में उस वक्त गहरा सदमा आया, जब उनकी पत्नी का निधन बच्चे को जन्म देते समय हो गया। उस हादसे के बाद पंकज पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई—रोज़ी-रोटी भी और महज़ दो साल की बेटी “Tun Tun” की परवरिश भी।
आज पंकज अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर डिलीवरी का काम करते हैं। काम के दौरान बच्ची को संभालना, समय पर ऑर्डर पहुंचाना और रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना—यह सब उनके लिए आसान नहीं है, लेकिन पंकज ने हालात के आगे हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना।
पंकज का अपनी बेटी के प्रति समर्पण और प्यार लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि ज़िंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, हौसला और मेहनत इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देते हैं।
सोशल मीडिया पर भी पंकज की कहानी लोगों का दिल छू रही है और कई लोग उनके जज़्बे को सलाम कर रहे हैं। यह कहानी सिर्फ एक डिलीवरी बॉय की नहीं, बल्कि उस पिता की है, जिसने हालात से लड़ते हुए अपनी बेटी के लिए उम्मीद बनाए रखी।
गुरदासपुर (पंजाब) के हरदोबथवाला गांव में एक आटा चक्की मालिक, संदीप सिंह रंधावा ने 200 रुपये की लॉटरी टिकट से 1.50 करोड़ रुपये का जैकपॉट जीता है। संदीप शनिवार शाम बाज़ार गए थे, जहां बेदी लॉटरी स्टॉल के मालिक ने उन्हें 'पंजाब स्टेट डियर लॉटरी' का टिकट लेने का आग्रह किया।
संदीप ने किस्मत आजमाने के लिए टिकट खरीद लिया। शाम को परिणाम घोषित होने पर पता चला कि उन्होंने पहला इनाम जीता है। संदीप ने इस जीत को ईश्वर की कृपा बताया है, वहीं स्टॉल मालिक मोहन लाल ने खुशी जताते हुए कहा कि उनके स्टॉल से पहले भी कई लोग लॉटरी जीतकर करोड़पति बन चुके हैं।