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राम मंदिर के ऐतिहासिक उद्घाटन को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन अयोध्या में आस्था और श्रद्धा का प्रवाह आज भी उतना ही सशक्त बना हुआ है। देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु लगातार मंदिर पहुंचकर दर्शन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। यह मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक एकता और सनातन मूल्यों का सशक्त प्रतीक बन चुका है। नियमित पूजा, भव्य उत्सव और जनभागीदारी इस बात को दर्शाती है कि भगवान श्रीराम भारतीय समाज और जनमानस से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं, और कैसे यह आस्था भारत की पहचान को निरंतर मजबूती प्रदान कर रही है।

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राम मंदिर के ऐतिहासिक उद्घाटन को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन अयोध्या में आस्था और श्रद्धा का प्रवाह आज भी उतना ही सशक्त बना हुआ है। देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु लगातार मंदिर पहुंचकर दर्शन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। यह मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक एकता और सनातन मूल्यों का सशक्त प्रतीक बन चुका है। नियमित पूजा, भव्य उत्सव और जनभागीदारी इस बात को दर्शाती है कि भगवान श्रीराम भारतीय समाज और जनमानस से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं, और कैसे यह आस्था भारत की पहचान को निरंतर मजबूती प्रदान कर रही है।

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मैं ग्वालियर एडवोकेट अनिल मिश्रा UGC का विरोध करता हूं कितने भाई मेरे साथ खड़े है?
सवर्ण समाज के भाइयों कमेंट box में हाजिरी दो..

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एडवोकेट क्षत्राणि रीना.एन.सिंह जी की बात से कौन - कौन सहमत है?

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भविष्य की जंग अब ताकत से नहीं, तकनीक से जीती जाएगी। ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और स्पेशल ऑप्स से लैस यह हाई-टेक सेना सीमाओं की नई प्रहरी है।
इनका मिशन साफ़ है: त्वरित और सटीक कार्रवाई। बिना बड़े युद्ध को न्योता दिए, दुश्मन को उसकी ही भाषा में जवाब देना।

हमारी सेना की इस नई ताकत के लिए एक लाइक तो बनता है!

#bhairavbattalion #indianarmy #futurewarfare #jaihind

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35 करोड़ से अधिक सवर्ण समाज के लोग हैं कितने भाई UGC बिल का विरोध करते हैं?
सभी कमेंट Box में हाजिर हो...

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किसी ने माँगा नहीं था, फिर भी केंद्र की भाजपा सरकार ने UGC के माध्यम से एक ऐसा नियम थोप दिया है, जो हर कॉलेज और विश्वविद्यालय के परिसर में सामान्य वर्ग के छात्रों को खुलेआम निशाना बनाने का रास्ता खोल रहा है। रोहित वेमुला जैसे मामलों पर बवाल मचाने वाली सरकार ने अब 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026' नाम से एक नया बिल लागू कर दिया है।

इस नए व्यवस्था के अनुसार, हर उच्च शिक्षा संस्थान में 'इक्विटी कमिटी' और 'इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर' बनाना अनिवार्य है। इन कमिटियों में SC, ST, OBC, महिलाओं और विकलांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों-शिक्षकों का कोई स्थान नहीं। ये कमिटी 'समानता स्क्वाड' की तरह काम करेगी, जो कैंपस में घूम-फिरकर शिकायतें इकट्ठा करेगी। एक भी शिकायत मिली नहीं कि सामान्य वर्ग के छात्र को तुरंत दोषी ठहरा दिया जाएगा। जांच का पूरा बोझ उसी पर डाल दिया जाएगा।

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35 करोड़ से अधिक सवर्ण समाज के लोग हैं, सभी को दोनों का समर्थन करना चाहिए।
कमेंट में उस बिल पर अपनी राय दे, देखते कितने भाई UGC बिल का विरोध करते हैं?

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