Bikaner News : दूल्हा-दुल्हन और बारातियों ने दिया मतदान संदेश, ग्रामीणों ने मतदान कर लोकतंत्र मजबूत करने की ली शपथ
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Bikaner News : दूल्हा-दुल्हन और बारातियों ने दिया मतदान संदेश, ग्रामीणों ने मतदान कर लोकतंत्र मजबूत करने की ली शपथ
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हाट कालिका माता मंदिर, गंगोलीहाट, पिथौरागढ़, उत्तराखंड।
उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल के पिथौरागढ़ जिले में स्थित हाट कालिका माता मंदिर माँ महाकाली को समर्पित एक प्रसिद्ध प्राचीन धार्मिक स्थल है। घने देवदार और चीड़ के वृक्षों से घिरा यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक महत्ता, पौराणिक मान्यताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है
1. मंदिर की स्थापना एवं इतिहास
हाट कालिका माता मंदिर की स्थापना के संबंध में प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने अपने हिमालय भ्रमण के दौरान गंगोलीहाट में माँ महाकाली की उपासना की थी और यहाँ शक्तिपीठ की स्थापना की थी। स्थानीय परंपराओं में मंदिर की प्राचीनता का संबंध सदियों पुरानी धार्मिक साधना से जोड़ा जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर पहले माँ काली दिव्य ज्योति के रूप में विराजमान थीं। बाद में संत जंगम बाबा ने देवी की प्रेरणा से यहाँ मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर की वर्तमान संरचना के विकास में विभिन्न कालखंडों में योगदान दिया गया। मंदिर की स्थापना की सटीक तिथि को लेकर अलग-अलग विवरण मिलते हैं, इसलिए इन कथाओं को धार्मिक परंपराओं के रूप में समझना उचित है।
#श्री_मलयनाथ_स्वामी_मंदिर, डीडीहाट, पिथौरागढ़
👉 उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में डीडीहाट के निकट स्थित श्री मलयनाथ स्वामी मंदिर कुमाऊँ क्षेत्र का एक प्राचीन एवं प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इसे #सिराकोट_मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ से हिमालय की सुंदर चोटियों और आसपास की घाटियों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।
👉 स्थापना एवं ऐतिहासिक महत्व: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर की स्थापना चंद अथवा रैका राजाओं के शासनकाल में हुई थी। ऐतिहासिक विवरणों में सिराकोट स्थित इस प्राचीन मंदिर का संबंध डोटी के रैका राजाओं से भी जोड़ा जाता है। मंदिर क्षेत्र कुमाऊँ की प्राचीन राजवंशीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
#गर्जिया_माता_मंदिर, रामनगर, नैनीताल
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में रामनगर के निकट स्थित गर्जिया माता मंदिर कुमाऊँ क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर रामनगर से लगभग 14 किलोमीटर दूर कोसी नदी के बीचों-बीच एक विशाल चट्टानी टीले पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है।
पौराणिक एवं धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गर्जिया माता को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। हिमालयराज की पुत्री होने के कारण माता पार्वती का एक नाम गिरिजा भी है। श्रद्धालु माता को शक्ति, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजते हैं। मंदिर में माता के दर्शन करने के बाद समीप स्थित भैरव बाबा के दर्शन करना भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि भैरव बाबा की पूजा के बिना माता की आराधना अधूरी मानी जाती है।
एक लोकमान्यता के अनुसार, पुराने समय में मंदिर के आसपास शेर की गर्जना सुनाई देती थी और लोगों ने उसे टीले की परिक्रमा करते हुए भी देखा था। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से माता के दर्शन और प्रार्थना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवविवाहित दंपति सुखी वैवाहिक जीवन तथा संतान की कामना करने वाले श्रद्धालु भी यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
श्री गोल्ज्यू दरबार
"जो दुनिया से हारा, उसे यहां मिला सहारा"
गोल्ज्यू (गोलू देवता) को न्याय का देवता कहा जाता है, लाखों लोगों की मान्यता है कि जब उन्हें कहीं न्याय नहीं मिला तब गोल्ज्यू के दरबार में आकर अर्जी लगाई, तब उनके साथ असल में न्याय हुआ।
गोल्ज्यू देवता के दरबार में हजारों लोग न्याय की उम्मीद में चिट्ठियां लिखकर लटका जाते हैं और जब उनकी मुराद पूरी हो जाती है तो श्रद्धानुसार उनके दरबार में घंटियां चढ़ा कर जाते हैं।
गोल्ज्यू देवता के दरबार में सजी हजारों घंटियां इस बात का सबूत है कि इस दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटा।
किसी की औलाद की मुराद पूरी हुई तो किसी को मनवांछित जीवन साथी मिला तो किसी का रुका हुआ काम बन गया।
गोलू देवता सभी की न्यायोचित मनोकामना पूरी करते हैं।
1. राजपूताना राइफल्स इंडियन आर्मी की सबसे पुरानी और सम्मानित राइफल रेजिमेंट है, इसे 1921 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तौर पर विकसित किया गया था। साल 1945 से पहले इसे 6 राजपूताना राइफल्स के तौर पर जाना जाता था, क्योंकि इसे तब की ब्रिटिश इंडियन आर्मी के 6 रेजिमेंट्स के विलय के बाद बनाया गया था। राजपूताना राइफल्स को मुख्य रूप से पाकिस्तान के साथ युद्ध के लिए जाना जाता है। .
हरियाणा के जिला पलवल के गाँव राजूपुर की होनहार बेटी एडवोकेट दिव्या राठौड़ जी, पुत्री श्री अजय राठौड़, ने हरियाणा में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी (ADA) के पद पर चयनित होकर अपने परिवार, गाँव और समाज का गौरव बढ़ाया है।
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। दिव्या जी की सफलता क्षेत्र की अन्य बेटियों और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
समाज की बेटियाँ आज शिक्षा और मेहनत के दम पर हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। दिव्या जी की यह सफलता निश्चित रूप से नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा देगी।
एडवोकेट दिव्या राठौड़ जी को इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की अनंत शुभकामनाएँ।